Param Pita Shah Satnam Ji: पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज लगभग तीन सालों तक पूजनीय बेपरवाह साईं मस्ताना जी महाराज के सत्संगों को सुनते रहे। 14 मार्च सन् 1954 की बात है, उस दिन सत्संग का कार्यक्रम गांव धूकांवाली (जिला सरसा) में था। अपने पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज का शुभ संदेश पाकर आप जी अपनी पूजनीय माता माता जी को साथ लेकर गांव धूकांवाली पहुंच गए। MSG Maha Rahmokaram Month
सत्संग के पश्चात जब शाह मस्ताना जी नाम शब्द देने के लिए जाने लगे तो आप जी को चबूतरे पर खड़ा देखकर दूर से ऊंची आवाज में फरमाया, ‘‘हरबंस सिंह! आप भी अंदर चलकर हमारे मूढ़े के पास बैठ जाओ। आज रात आपको भी दाता सावण शाह जी के हुक्म से नाम की दीक्षा मिलेगी।’’ आप जी उसी समय अपने सतगुरु जी की आज्ञानुसार अंदर चले गए और मूढ़े के पास स्थान खाली न होने के कारण आप जी पीछे बैठ गए।’’
इतने में पूजनीय शाह मस्ताना जी कमरे के अंदर आ गए और मूढ़े पर बैठते ही, आप जी को मूढ़े के पास बैठा हुआ न देखकर बोले ‘‘कहां हैं भाई!’’ वो जलालआणे वाले लंबे सरदार जी? क्या नाम है उनका… हरबंस सिंह।’’इस पर आप जी ने खड़े होकर प्रार्थना की कि, ‘‘साई जी! मैं यहां बैठा हूं।’’ तब पूजनीय शाह मस्ताना जी ने मधुर वाणी से फरमाया, ‘‘नहीं भाई, यहां पर आगे आकर हमारे मूढ़े के पास बैठो।’’ आप जी को अपने पास बैठाते हुए पूजनीय मस्ताना जी ने यथार्थ को प्रकट करते हुए फरमाया, ‘‘आपको इसलिए बैठा कर नाम देते है कि आपसे कोई काम लेना है, आपको जिंदाराम का लीडर बनाएंगे। MSG Maha Rahmokaram Month















