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    WHO News: डब्ल्यूएचओ का चौंकाने वाला खुलासा! हर 7 में से एक किशोर मानसिक विकार से ग्रस्त

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    WHO News: डब्ल्यूएचओ का चौंकाने वाला खुलासा! हर 7 में से एक किशोर मानसिक विकार से ग्रस्त

    WHO Adolescent Mental Health: नई दिल्ली। जयपुर में हाल ही में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश का मन द्रवित कर दिया। विद्यालय में अध्ययनरत 9 वर्षीय छात्रा ने अचानक स्कूल भवन की ऊपरी मंजिल से कूदकर अपनी जान ले ली। इस घटना के कारणों को लेकर तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं, किंतु इसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा किशोर मानसिक स्वास्थ्य पर जारी नवीन तथ्य-पत्र की ओर गंभीर ध्यान आकर्षित किया है। यह फैक्ट शीट 1 सितंबर 2025 को प्रकाशित हुई थी। WHO News

    डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट “किशोरावस्था का मानसिक स्वास्थ्य” के अनुसार, विश्व के प्रत्येक सात में से एक किशोर—अर्थात लगभग 16 करोड़ बालक-बालिकाएँ—किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं। यह संख्या वैश्विक स्तर पर बढ़ते मानसिक संकट की स्पष्ट चेतावनी मानी जा रही है।

    तथ्य-पत्र में बताया गया है कि 10 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों में अवसाद, चिंता एवं व्यवहारगत विकार सबसे अधिक सामान्य मानसिक स्थितियाँ हैं। ये समस्याएँ न केवल उनकी पढ़ाई, पारिवारिक संबंध और सामाजिक व्यवहार पर असर डालती हैं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती हैं। WHO News

    डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार, 15 से 29 वर्ष के युवाओं में आत्महत्या तीसरा प्रमुख मृत्यु कारण बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था में मानसिक चुनौतियों की अनदेखी करने से आगे चलकर गंभीर अवसाद, नशे की लत, आत्मसम्मान में गिरावट और संबंधों में टूटन जैसी स्थितियाँ जन्म ले सकती हैं।

    रिपोर्ट यह भी इंगित करती है कि आज के युवाओं में मानसिक दबाव का सबसे बड़ा कारण सामाजिक तुलना, परिवारिक तनाव, आर्थिक असुरक्षा और निरंतर बदलती डिजिटल दुनिया है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली कृत्रिम “संपूर्णता” बच्चों के मन में असुरक्षा और तनाव पैदा कर रही है। जो किशोर लंबे समय तक डिजिटल माध्यमों पर सक्रिय रहते हैं, उनमें अनिद्रा, आत्मविश्वास की कमी और तनाव का स्तर अधिक पाया गया है। WHO News

    डब्ल्यूएचओ ने सरकारों, शिक्षण संस्थानों और समाज से आग्रह किया है कि वे विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा दें, परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करें और ऐसे कार्यक्रम विकसित करें जो बच्चों को भावनात्मक सहारा प्रदान कर सकें। संगठन का मानना है कि समय रहते उचित सहायता मिल जाए, तो अनेक मानसिक संकटों को टाला जा सकता है।