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    त्वरित टिप्पणी: किसकी ओर से होगा अगला ‘एक्सपेरिमेंटल प्राइम मिनिस्टर’

    Experimental Prime Minister

    उत्तर प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एक दिलचस्प महांगठबंधन आकार ले रहा है जिसमें सपा-बसपा एक धुरी होंगे। राजनीतिक विश्लेषक इस पर जो मर्जी कयास लगाएं लेकिन अखिलेश व मायावती जानते हैं कि पहले अपना आप बचाया जाए, कांग्रेस को बाद में देख लिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में यूं भी कांग्रेस ज्यादा तीर मारने की स्थिति में है भी नहीं। कांग्रेस को किसी जमाने में सत्ता पर बैठाए रखने वाला ब्राहमण व स्वर्ण वर्ग अब पूरी तरह से भाजपा के खेमे में जा चुका है।

    दलित व पिछड़ा वर्ग बसपा-सपा के साथ हो लिया है। इतना ही नहीं कांग्रेस का समर्थक रहा अल्पसंख्यक वर्ग भी अब बसपा सपा पर ज्यादा भरोसा करता है। कांग्रेस को अगर अपनी जमीन वापिस पानी है तब उसे स्वर्णों व अल्पसंख्यकों को साथ लाने का फार्मूला अपनाना होगा जो अभी बनता दिख नहीं रहा है। उत्तर प्रदेश में बिछ रही बिसात को देखकर कांग्रेस की बढ़ रही लोकप्रियता को थोड़ा आघात जरूर पहुंचेगा। बिहार, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक में भी स्थानीय दल कांग्रेस को एकबारगी हाशिए पर रखकर अपना कद बड़ा करेंगे। परन्तु यहां कुछ बुरा भी नहीं है चूंकि इन प्रदेशों में कर्नाटक को छोड़कर कांग्रेस अपना वक्त ही बर्बाद करती जबकि समर्थन लायक सीटें उसे फिर भी मिल ही जानी है, अगर प्रादेशिक गठबंधनों को भाजपा अपना समर्थन देकर सरकार न बनवाए।

    भाजपा कश्मीर में यह कर चुकी है। कश्मीर में भाजपा व पीडीपी की नीतियों में कोई मेल नहीं था फिर भी वहां भाजपा ने दो-दो मुख्यमंत्रियों को सरकार चलाने का मौका दिया। इतना ही क्यों वीपी सिंह भी देश को याद होंगे जिन्हें बाद में लालकृष्ण आडवाणी ने वक्त से पहले ‘पूर्व प्रधानमंत्री’ होने का सम्मान दिया। केन्द्र में जो आज शोर मच रहा है कि कांग्रेस फिर से केन्द्र में अपना प्रधानमंत्री बना सकती है, यह क्षेत्रीय दलों की बड़ी जीत से असंभव भी हो सकता है।

    नीतिश कुमार भी भाजपा से आधी सीटें ले चुके हैं जो चुनाव बाद अवसर देखकर अपना मन बदल सकते हैं चूंकि लालू यादव के राजद के साथ वो ऐसा कर चुके हैं। इतना ही नहीं के. चन्द्रशेखर राव भी दहाई से ऊपर सीटें लेंगे। ममता बनर्जी व नवीन पटनायक भी भाजपा-कांग्रेस का रास्ता रोकेंगे। ऐसे में इस बार लोकसभा चुनाव राजनीतिक विश्लेषकों के लिए नाकों चनें चबवा देने वाला साबित होगा। कोई कितना भी गुणा-भाग कर ले यह पक्का नहीं बता सकते कि अगला प्रधानमंत्री कौन बनने जा रहा है। अब देखना यह है कि अगला ‘एक्सपेरिमेंटल प्राइममिनिस्टर’ किसकी ओर से होगा।

    प्रकाश सिंह सलवारा

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