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    नशों में जिंदगी बर्बाद करने की बजाय सेवा कार्यों में लगे युवा

    Sirsa
    डेरा सच्चा सौदा, सरसा में साध-संगत की सेवा करते हुए नौजवान। छाया: जसवीर गहल

    महा परोपकार भंडारे पर बड़ी संख्या में पहुंचे यूथ ने पूज्य गुरु जी को बताया प्रेरणास्रोत | Sirsa

    सरसा (सच कहूँ/जसवीर सिंह गहल)। समाज में जहां एकतरफ युवा अपनी बेशकीमती जिदंगी को नशों में बर्बाद कर रहे हैं, वहीं डेरा सच्चा सौदा से जुड़ने वाले लाखों युवा अपनी जिदंगी इंसानियत की सेवा में समर्पित कर चुके हैं और दिन-रात सेवा कार्याें में जुटे रहते हैं। Viral News

    इसकी अनोखी मिसाल शनिवार को यहां 33वें पवित्र महा परोपकार भंडारे पर देखने को मिली, जहां साफ-सुथरे नए परिधानों में सजे एवं ऐशो-आराम के साथ रहने वाले ये युवा साध-संगत के झूठे बर्तन धोते और भंडारे के दरमियान बिखरे कूड़े-कर्कट को उठाते हुए दिखाई दिए। बातचीत करने पर युवाओं ने बताया कि उनके अंदर सेवा-भावना का यह जज्बा पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं का ही कमाल है, जिसकी बदौलत वे नशों में अपनी जिदंगी को बर्बाद करने की बजाय इंसानियत की सेवा में लगा रहे हैं। पेश हैं इन युवाओं से की गई बातचीत के कुछ अंश :-

    ‘हजार गुणा अच्छा है’

    विद्यार्थी कुश इन्सां नागलोई ने बताया कि लगभग 10 साल पहले उन्हें पूज्य गुरु जी से अनमोल नाम की दात प्राप्त हुई। जिसके बाद उसकी जिदंगी में अनेक और बडेÞ बदलाव आए। उन्होंने कहा कि समाज के अंदर बेशक उनके इर्द-गिर्द नशों और अन्य बुराईयों का बोलबाला है, परंतु पूज्य गुरु जी की दया-रहमत से वह नशों और अन्य सामाजिक बुराईयों के नजदीक भी नहीं जाते। पूज्य गुरु जी की शिक्षाएं ही उसकी जिदंगी का असल गहना हैं। इन गहनों को वह हमेशा पहन कर रखेंगे। उसने कहा कि साध-संगत के झूठे बर्तन धोना नशों में अपनी जिंदगी को बर्बाद करने से हजारों गुणा अच्छा है।

    ‘सेवा से ही जिंदगी में बहारें’

    दिल्ली से आशीष इन्सां ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में नशों और अन्य बुराइयों से बचकर रहना बेहद मुश्किल होता है, परंतु पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं की बदौलत उनके लिए यह मामूली बात बन चुकी है। उन्होंने कहा कि नशे बर्बादी का घर हैं। सेवा कोई भी हो उसका फल महान और अमूल्य है। मेरे में सेवा का जज्बा पूज्य गुरु जी ने ही पैदा किया है, जिससे मेरी जिदंगी में बहारें छाई हुई हैं।

     

    ‘ढाल बनी पवित्र शिक्षा’

    पेशे से ड्राइवर धर्मवीर इन्सां पातड़ा (पंजाब) ने बताया कि इस पेशे में अधिकतर ड्राइवर कोई न कोई नशा लेते ही हैं, परंतु पूज्य गुरु जी की कृपा से उन्होंने कभी भी नशे को हाथ नहीं लगाया। उन्होंने कहा कि साध-संगत भगवान का रूप है, इसलिए वह साध-संगत के झूठे बर्तन धो रहे हैं। यह ऊंची और सच्ची शिक्षा उन्हें पूज्य गुरु जी से ही नसीब हुई है। जिसने उनकी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों की जिंदगी भी बदल कर रख दी है। धर्मवीर इन्सां ने बताया कि अगर वह डेरा सच्चा सौदा के साथ न जुड़ता तो शायद यहां न होकर नशे की गर्त होते। नशे ने आज समाज को खोखला कर दिया है, परंतु पूज्य गुरु जी की पाक-पवित्र शिक्षाएं उनके साथ ढाल का काम कर रही हैं। Sirsa

    ‘करोड़ों बार धन्यवाद मुर्शिद का’

    पिंजौर (अंबाला) से जग्गी इन्सां ने बताया कि उनका टेंट हाऊस का कारोबार है, परंतु वह यहां आकर हमेशा स्वच्छता अभियान का हिस्सा बनता है और कूड़ा-कर्कट उठाने की सेवा करता है, क्योंकि इस सेवा से जो सुकून मिलता है, वह किसी भी नशे में नहीं। उन्होंने कहा कि अगर पूज्य गुरु जी की रहमत न होती तो वह भी शायद नशों की नदी में बह गया होता, परंतु करोड़ों बार धन्यवाद उस पूर्ण मुर्शिद का, जिन्होंने मुझे नशों की तरफ झांकने भी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सेवा करने का सौभाग्य मिला है और इस सेवा से जो कुछ मिलता है वो दुनिया में कहीं से खरीदा नहीं जा सकता।

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