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    युवाओं को तरक्की के अवसर मिलें, तस्करों को दंड

    Hanumangarh News

    पंजाब व पड़ोसी क्षेत्रों में नशीले पदार्थों का लगातार बढ़ता प्रचलन जहां एक गंभीर सामाजिक चुनौती है, वहीं यह कानून व्यवस्था के लिए भी बड़ा संकट पैदा कर रहा है। खासकर पाकिस्तान सीमा से लगे इस संवेदनशील राज्य में यह चुनौती ज्यादा घातक साबित हो सकती है। हाल के दिनों में नशीले पदार्थों और हथियारों की खेपों की बड़ी बरामदगी इस बड़े संकट की ओर इशारा कर रही है। आए दिन चिट्टा नामक नशे से पंजाब के युवाओं की मौतें हो रही हैं, यही नहीं पंजाब से सटे क्षेत्रों में भी चिट्टा आम बिकने लगा है। पुलिस भी नशे से होने वाली मौतों के कारण को दबाने का प्रयास करती है, लेकिन इस तरह आंखों पर पट्टी बांधने से समाज को बचाया नहीं जा सकता। नशे के खिलाफ देश की पुलिस के पास नीति और रणनीति दोनों की कमी है। कहीं पुलिस नशा पीड़ितों को नशा तस्कर के तौर पर बदनाम करती देखी जा रही है। बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर विश्व भर में बदनाम कर दिया।

    पुलिस ने उसे एक खलनायक के रूप में पेश किया वहीं अब वही पुलिस कह रही है कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। पुलिस यह भी कह रही है कि हो सकता है कि आर्यन को फंसाया गया हो, बचीखुची भड़ास मीडिया ने निकाल दी। जिसने आर्यन की गिरफ्तारी व कोर्टों में तारीखों को चटकारे ले-लेकर छापा और दिखाया। जैसे कि आर्यन ही देश भर में नशा सप्लाई कर रहा हो। किसी भटके हुए युवक को समझाना ही हमारी जिम्मेदारी है न कि उसे देश भर में जलील किया जाए। यहां यह बताना भी जरूरी है कि पुलिस बड़ी मछलियों का पता होने के बावजूद भी उन्हें हाथ डालने से डरती है, वह केवल गलियों में छुटपुट नशा बेचने वाले मामूली से तस्कर को पकड़कर कार्रवाई तक सीमित है। वास्तव में नशा एक गंभीर मुद्दा बन गया है, जिससे निपटने के लिए केवल सरकार या पुलिस काफी नहीं। यदि पुलिस चाहती तब पंजाब में कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की सरकार में नशा को जड़ से खत्म कर सकती थी, लेकिन यहां सरकारों और पुलिस का ईमानदार और वचनबद्ध होना आवश्यक है।

    नशे को खत्म करने के लिए सामाजिक संस्थाओं और शिक्षा ढांचें की भूमिका को भी मजबूत करना होगा। युवाओं में नशों की बुराई के खिलाफ जागरूकता पैदा करनी होगी। जब कोई नशा करेगा ही नहीं तब नशा बिकेगा कैसे? नशा पीड़ितों को नशा करने के लिए नशा मुक्ति केंद्र सक्रिय करने होंगे। नशा केन्द्रों की लूट से बचाने के लिए सरकारी या गैर-सरकारी निशुल्क नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने होंगे। दूसरी ओर जब तक नशा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें कड़ा दंड नहीं मिलता, युवाओं के भटकाव को रोक पाना आसान नहीं होगा। युवाओं को नशे की दलदल से दूर रखने के लिये उन्हें सामाजिक, मानसिक और शारीरिक संबल देने की जरूरत है, इससे राज्य के सामाजिक व आर्थिक सकंट को दूर करने में मदद मिल सकती है तभी राज्य समृद्धि और विकास की गौरवशाली राह तलाश सकेगा।

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