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    सात सालों में 127 मानव तस्करी के मामले प्रदेश में दर्ज

    Human Trafficking Cases

    विधानसभा बजट सत्र- सदन में उठा मानव तस्करी का मुद्दा

    (Human Trafficking Cases)

    •  43 नाबालिग लड़कियां एवं 16 नाबालिग लड़के मानव तस्करी से पीड़ित
    •  प्रदेश में मानव तस्करी और सैरोगेसी के बढ़ते मामलों पर विधायकों ने जताई चिंता
    •  मानव अंगों की खरीद-फरोख्त पर सरकार से विधानसभा में मांगा जवाब

    चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)। प्रदेश में पिछले सात साल में 127 मामले अधिकृत पर मानव तस्करी के दर्ज किए गए हैं। जिनमें सबसे ज्यादा 24 मामले 2018 में दर्ज किए गए थे। वहीं इन मामलों में 43 नाबालिग लड़कियां एवं 16 नाबालिग लड़के पीड़ित हैं। इस बाबत हरियाणा विधानसभा में जारी बजट सत्र के दौरान एक विधायक द्वारा मानव तस्करी और मानव अंगों की खरीद-बिक्री के मामलों की जानकारी मांगी गई। जिसके जवाब में गृह मंत्री अनिल विज ने विस्तृत रिपोर्ट पेश की।विधायक ईश्वर सिंह ने प्रश्न काल के दौरान सरकार से मानव तस्करी के मामले एवं पीड़ितों की संख्या पर सवाल किया।

    • सरकार इसकी रोकथाम के लिए क्या उपाय कर रही है।
    • इसके जवाब में गृह मंत्री अनिल विज ने एक विस्तृत रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी
    • राज्य में मानव अंगों की तस्करी के संबंध में कोई अभियोग अंकित नहीं हुआ है।
    • वहीं मानव तस्करी के संबंध में वर्ष 2018 में 24 अभियोगों की तुलना में वर्ष 2019 में यह घटकर 17 रह गई।

    मानव तस्करी की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम

    गृह मंत्री विज ने बताया कि मानव तस्करी की रोकथाम के लिए सरकार ने मानव तस्करी निरोधक इकाइयों का गठन किया है। ये इकाइयां राज्य अपराध शाखा हरियाणा का हिस्सा हैं, जो पंचकूला, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मधुबन (करनाल), हिसार, भिवानी और रोहतक में स्थित हैं। वहीं किशोर न्याय एवं संरक्षण अधिनियम की धारा 107 के तहत राज्य के प्रत्येक पुलिस स्टेशन में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। राज्य के प्रत्येक जिले में विशेष किशोर पुलिस इकाइयों का गठन किया गया है।

    नैशनल इंफर्मेटिक्स सैंटर (एनआईसी) ने ट्रैक दा मिसिंग चाइल्ड ना से एक राष्टÑीय पोर्टल विकसित किया है, जिसमें न केवल लापता बल्कि बरामद किए बच्चों का भी जिक्र है। वहीं खोया-पाया पोर्टल भी बच्चों का विवरण सांझा करने हेतु जनता को मंच प्रदान कर रहा है। उन्होंने आगे बताया कि लापता और बरामद बच्चों के मामलों से निपटने के लिए पुलिस बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड की सहायता के लिए सभी संबंधितों को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) प्रेषित की गई है।

    • राज्य में वर्ष 2015 से 2019 तक लापता बच्चों को बचाने के लिए 8 विशेष अभियान चलाए गए।
    • इसके अलावा राज्य में एक माह की अवधि का विशेष अभियान दिनांक 1.2.2020 से चल रहा है।
    • इस अभियान के दौरान दिनांक 15.2.2020 तक 625 लापता बच्चों को बचाया गया है।

    मानव तस्करी को बढ़ा रही है सैरोगेसी

    बच्चा पैदा करने के लिए किराए की कोख (सैरोगेसी) का चलन भी मानव तस्करी को बढ़ावा दे रहा है। इस बाबत विधायक ईश्वर सिंह ने सवाल किया कि हरियाणा में कई जगह सैरोगेसी सैंटर खुले हैं, क्या ये अपराध नहीं है? इस पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि सैरोगेसी का चलन विश्वभर में बढ़ा है।

    • हरियाणा में भी इसका चलन आ रहा है।
    • विधायक ने पूछा कि केंद्र सरकार ने सैरोगेसी को अभी लीगल नहीं किया है।
    • हरियाणा सरकार कैसे इसे मंजूरी दे सकती है।
    • इस पर विज ने कहा कि वे नियम जांचेंगे।

    पांच साल में 11973 बच्चे हुए थे लापता

    विधायक का जवाब देते हुए गृह मंत्री अनिल विज ने बताया कि प्रदेश में 2014 से 2019 तक कुल 11973 बच्चे लापता हुए थे जिसमें से 6500 लड़कियां थी। लेकिन प्रदेश की पुलिस ने करीबन 9500 को बच्चों को बरामद कर उनके माता-पिता को सौंप दिया। भाव पुलिस ने 78 फीसदी बच्चे ट्रेस किए।

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