UP SIR: यूपी में SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए 2.89 करोड़ वोटर, मचा हड़कंप

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UP Draft Voter List 2026: लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान के बाद उत्तर प्रदेश की प्रारंभिक निर्वाचक नामावली (ड्राफ्ट वोटर लिस्ट) मंगलवार को जारी कर दी है। आयोग के अनुसार, इस ड्राफ्ट सूची में प्रदेश में कुल 12 करोड़ 55 लाख मतदाता दर्ज किए गए हैं। UP SIR News

अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत 4 नवंबर से की गई थी। इससे पहले अक्टूबर 2025 में जारी मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख नाम दर्ज थे। गहन सत्यापन के बाद 2 करोड़ 89 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए नामों में 46 लाख 23 हजार मतदाता ऐसे हैं जिनका निधन हो चुका है। इसके अलावा 2 करोड़ 17 लाख से अधिक मतदाता ऐसे पाए गए, जो अपने पुराने पते से स्थानांतरित हो चुके हैं। वहीं, 25 लाख से अधिक नाम ऐसे थे, जिनकी प्रविष्टियां एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मिलीं।

इन आंकड़ों के साथ उत्तर प्रदेश अब देश में सबसे अधिक मतदाता नाम हटाने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले तमिलनाडु इस सूची में शीर्ष पर था, जहां करीब 97 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। गुजरात में लगभग 73 लाख, पश्चिम बंगाल में 58 लाख और राजस्थान में करीब 44 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए थे। चुनाव आयोग ने पहले उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 दिसंबर को जारी करने का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन बाद में इसे स्थगित कर दिया गया। अब अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को प्रकाशित की जाएगी।

24 जून को देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की थी

गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने 24 जून को देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की थी। इस प्रक्रिया के तहत सभी पंजीकृत मतदाताओं को एन्यूमरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य किया गया, जबकि कुछ श्रेणियों के मतदाताओं से अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे गए। इससे पहले जून महीने में बिहार में एसआईआर अभियान चलाया गया था, जहां करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे। इसके बाद 27 अक्टूबर को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान शुरू किया गया।

पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गोवा, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें कुल मिलाकर एक करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। यह पूरा अभियान “शुद्ध निर्वाचक नामावली, सशक्त लोकतंत्र” की थीम के तहत संचालित किया गया, जो 4 नवंबर से शुरू होकर समयसीमा बढ़ाए जाने के बाद 26 दिसंबर को संपन्न हुआ।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि 6 जनवरी से 6 फरवरी तक मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद 6 जनवरी से 27 फरवरी के बीच सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 6 मार्च को उत्तर प्रदेश की अंतिम निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जाएगी। UP SIR News