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    87वां दिन : कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून की मांग

    87th day To cancel the agricultural laws and demanded legislation on MSP

    अब गर्मी को लेकर किसानों ने कसी कमर

    • धरना स्थलों पर सबमर्सिबल पंप और कूलर-पंखों का किया जा रहा प्रबंध

    • गाँव स्तर पर किए जा रहे फसल कटाई के इंतजाम

    बहादुरगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून की मांग को लेकर देश के अन्नदाता पिछले 87 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। ठिठुरा देने वाली ठंड को हराकर अब किसान भीषण गर्मी के आगमन के मद्देनजर प्रबंधों में जुट गए हैं। बेशक सरकार को लग रहा है कि किसान आंदोलन मंद पड़ चुका है, लेकिन इसके बावजूद किसान अपनी मांगें माने जाने से कम पर मानने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। टिकरी बॉर्डर पर गर्मी के सीजन के आगमन को देखते हुए किसानों ने धरनास्थलों के आसपास सबमर्सिबल पम्पसैट लगवाने के साथ-साथ नए टैंट, पंखे, टीवी, और फ्रिज की व्यवस्था शुरू कर दी है। वहीं पीने के पानी के लिए आरओ सिस्टम भी लगवाए जा रहे हैं।

    किसान राजबीर, कुलबीर, रामेहर, गुरजंट, सुखदेव, कृष्ण और बाली आदि का कहना है कि संयुक्त मोर्चा के हर फैसले को सिरे चढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि देश का किसान हर परिस्थिति के लिये तैयार है। किसानों ने आगामी फसल की कटाई के लिए भी गांव के स्तर पर इंतजाम शुरू कर दिया है। किसानों ने कहा कि बातचीत सरकार ने बन्द की है, इसलिए सरकार ही शुरू करे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर देती है और न्यूनतम समर्थन मूल्य वाला कानून नहीं बनाती हम घरों को वापिस नहीं लौटेंगे।

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