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Saturday, February 28, 2026
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    Body Donation: उर्मिला देवी की मृत देह पर रिसर्च करेंगे मेडिकल के स्टूडेंट

    Body-Donation

    माता जी ने डेरा सच्चा सौदा में भरा हुआ था शरीरदान करने का फार्म

    • देहरादून के मेडिकल कॉलेज को रिसर्च के लिए किया गया शरीरदान

    रामपाल शादीहरी/प्रवीण गर्ग दिढ़बा मंडी। डेरा सच्चा सौदा के सतब्रह्मचारी राकेश इन्सां और सतब्रहमचारी रिंकू इन्सां की माता उर्मिला देवी  (82) इन्सां गत दिवस कुल मालिक के चरणों में सचखंड जा बिराजी। इस दौरान उनकी मृतक देह को मेडिकल रिसर्च के लिए दान किया। जानकारी देते हुए पुत्र सतपाल टोनी ने बताया कि माता जी ने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां की पावन शिक्षा पर चलते हुए मरणोपरांत शरीरदान करने का फार्म भरा हुआ था। उन्होंने बताया कि माता जी के देहांत के बाद परिवारिक सदस्यों ने उनकी अंतिम इच्छानुसार मृत देह मेडिकल रिसर्च के लिए हिमालय आयुर्वेदिक (पीजी) मेडिकल कॉलेज व अस्पताल देहरादून को दान किया।

    माता जी की मृतक देह को फूलों वाली सजी गाड़ी में रखा गया व डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने माता उर्मिला देवी अमर रहे के नारे लगाकर अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर 45 मैंबर रामकरन इन्सां, जोगा सिंह इन्सां, डॉ. सुखविन्द्र सिंह (बबला) संगरूर, जसपाल सिंह उभ्भावाल 25 मैंबर, प्रेम सिंह 25 मैंबर, इंद्रजीत मुनक ब्लॉक भंगीदास, करनैल इन्सां सहित सुजान बहनें, समितियों के जिम्मेवार व शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सदस्य उपस्थित रहे।

    पूज्य परम पिता जी से ली थी नाम की अनमोल दात

    बेटे सतपाल टोनी ने बताया कि माता जी ने पूज्य परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज से नाम की अनमोल दात 1981 में संगरूर सत्संग दौरान प्राप्त की थी। माता जी ने पूरे परिवार को नाम-शब्द दिलवाकर डेरा सच्चा सौदा के साथ जोड़ा, आज उनका परिवार बड़े स्तर पर आश्रम के सेवा कार्यों में जुटा हुआ है। माता जी के दो बेटे आश्रम में
    सतब्रह्मचारी भी हैं और अन्य परिवार ब्लॉक के नामचर्चा घर में सेवा कर रहा है।

    मरणोपरांत भी इंसानित पर परोपकार कर गई उर्मिला देवी: रामकरन इन्सां

    डेरा सच्चा सौदा के 45 मैंबर रामकरन इन्सां ने कहा कि माता उर्मिला देवी जी ने पूरे परिवार को डेरा सच्चा सौदा के साथ जोड़ा। इसके बाद पूरे परिवार ने हमेशा ही डेरा सच्चा सौदा की दिन-रात सेवा की जिसका कोई सानी नहीं। उन्होंने कहा कि माता जी ने जीते जी तो मानवता की सेवा की ही बल्कि मरणोपरांत भी शरीरदान कर अमर हो गई।

    मेडिकल रिसर्च के लिए ऐसे कार्य जरूरी: बबला

    सिविल अस्पताल संगरूर के फामेर्सी अधिकारी सुखविन्द्र बबला ने बताया कि माता उर्मिला देवी जी द्वारा किया गया शरीरदान सराहनीय कार्य है, ऐसा जज्बा किसी-किसी व्यक्ति में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि मेडिकल क्षेत्र में नई-नई बीमारियों के इलाज के लिए व मेडिकल शिक्षा के लिए मृतक शरीर होना बहुत जरूरी है जिस पर मेडिकल के विद्यार्थी अपनी पढ़ाई करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के युग में किया गया शरीरदान प्रयास गर्व की बात है।

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