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    प्रदेश में रियल एस्टेट ब्रोकर्स और प्रॉपर्टी डीलरों की मनमानी पर लगेगी रोक

    Real estate brokers and property dealers will be banned in the state

     खरीददारों और विक्रेताओं से संयुक्त रूप से एक प्रतिशत से अधिक कमीशन वसूलने पर प्रतिबंध (Real Estate)

    • ब्रोकर्स के लिए आचार संहिता तैयार, लगभग दो दर्जन बिल्डरों और ब्रोकर्स के खातों का फोरेंसिक ऑडिट

    अनिल कक्कड़/सच कहूँ चण्डीगढ़। प्रदेश में रियल एस्टेट  के ब्रोकरों और प्रॉपर्टी डीलरों की बढ़ती मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ग्राहकों के हित में पहली बार निर्णय लेते हुए (Real Estate) ब्रोकर्स द्वारा खरीदारों और विक्रेताओं से संयुक्त रूप से एक प्रतिशत से अधिक कमीशन वसूलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार के इस फैसले से ग्राहकों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। प्रॉपर्टी डीलर्स संपत्ति विक्रेताओं के साथ-साथ खरीदारों से मनमाना कमीशन वसूल रहे ब्रोकर्स और प्रापॅर्टी डीलर्स के मामले में हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (हरेरा), गुरुग्राम के अध्यक्ष डॉ. के.के. खंडेलवाल और सदस्य एस.सी.कुश ने संज्ञान लिया है।

    मनमाने कमिशन पर लगेगा अंकुश

    रियल एस्टेट की पंजीकृत परियोजनाओं के लिए हरेरा ने हरियाणा प्रापर्टी डीलर्स एवं कंसल्टेंट्स विनियामक अधिनियम, 2008 के तहत बनाए गए हरियाणा प्रॉपर्टी डीलर्स एवं कंसल्टेंट्स विनियामक नियम, 2009 में निर्धारित से अधिक कमीशन नहीं लेने पर सभी प्रमोटरों और ब्रोकर्स को प्रतिबंध आदेश जारी करने का निर्णय लिया है। उक्त नियमों के नियम 10 में संपत्ति के विक्रेता एवं खरीददार द्वारा भुगतान के लिए सहमत मूल्य पर एक प्रतिशत कमीशन का प्रावधान है, अर्थात् वैध रसीद के तहत डीलर के रजिस्टर में दर्ज उनके समझौते के अनुसार सौदे के अंतिम रूप पर उनमें से प्रत्येक को आधा-आधा प्रतिशत का भुगतान करना होता है।

    5 से 10 फीसदी तक वसूला जा रहा है कमिशन

    प्रॉपर्टी डीलर-ब्रोकर्स प्रोमटर्स के साथ सांठ-गांठ करके गलत व्यवहार कर रहे हैं और विक्रेताओं और खरीदारों दोनों से निर्धारित कमीशन से अधिक मनमाना शुल्क वसूल रहे हैं। यह पता चला है कि संपत्ति के मूल्य का 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक कमीशन एजेंट द्वारा वसूला जा रहा है और इस अतिरिक्त कमीशन का बोझ अंतत: आबंटी द्वारा सांझा किया जाता है। हरियाणा प्रापर्टी डीलर्स एवं कंसल्टेंट्स विनियामक अधिनियम, 2008 के तहत संबंधित उपायुक्त द्वारा प्रॉपर्टी डीलर-ब्रोकर्स को लाइसेंस दिए जाते हैं। पंजीकृत परियोजना की रियल एस्टेट डील के लिए बातचीत करने के लिए प्रॉपर्टी डीलर का पंजीकरण रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 9 के तहत रेरा द्वारा किया जाता है और पंजीकरण तब इस शर्त के अधीन होता है कि रियल एस्टेट एजेंट उस समय लागू होने वाले किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करेगा। तदनुसार, सभी रियल एस्टेट एजेंट्स को यह चेतावनी दी जाती है कि वे नियमों में निर्धारित से अधिक कमीशन नहीं लें। ऐसा करना कानून के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।

    भ्रामक प्रचार पर भी नजर रखेगी सरकार

    रियल एस्टेट एजेंट-ब्रोकर नई परियोजनाओं के विज्ञापन जारी करने में भी शामिल हैं जो आम जनता को गुमराह कर रहे हैं। आचार संहिता प्रॉपर्टी डीलर्स द्वारा रखे जाने वाले खातों की अतिरिक्त पुस्तकों को संरक्षित करेगी, ताकि यह जांच की जा सके कि कमीशन कानून के अनुसार वसूल किया जा रहा है या नहीं। इसके अतिरिक्त, इससे लेनदेन का रिकॉर्ड भी रखा जा सकेगा जिसे खरीददार और ब्रोकर्स के बीच विवाद होने के मामले में प्राधिकरण द्वारा जारी किया जा सकता है।

    अनधिकृत कॉलोनियों की बिक्री से जुड़े ब्रोकर्स-डीलर्स के रजिस्ट्रेशन होंगे रद्द

    डॉ. खण्डेलवाल ने कहा कि यह भी नोटिस में आया कि कुछ ब्रोकर्स-प्रॉपर्टी डीलर्स अनधिकृत कॉलोनियों की बिक्री में भी संलिप्त हैं। ऐसे ब्रोकर्स पर सख्त नजर रखी जा रही है, ताकि उनके पंजीकरण रद्द किए जा सकें और उनके खिलाफ कानून के अनुसार आपराधिकध्सिविल कार्रवाई शुरू की जा सके। ब्रोकर्स के लिए यह अनिवार्य है कि वे उन परियोजनाओं से संबंधित अनुमोदनध्योजनाओं, विनिदेर्शों, ब्रोशर्स आदि की प्रतिलिपियां रखें जहाँ उनके द्वारा सौदों की सुविधा दी जा रही है। जिन ब्रोकर्सध्प्रॉपर्टी डीलर्स के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें प्राधिकरण के साथ उनके पंजीकरण को रद्द करने सहित उनके लाइसेंस वापिस लेने के लिए उपायुक्त को सिफारिश करने जैसा दंड भी दिया जाएगा।

     

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