हमसे जुड़े

Follow us

18.7 C
Chandigarh
Saturday, March 28, 2026
More
    Home विचार कोरोना में बा...

    कोरोना में बाजार की पीड़ा समझें राजनेता

    अनिल धीरूभाई अंबानी के बेटे अनमोल अंबानी ने दो रोज पूर्व ट्वीट कर कोरोना में उद्योग जगत की पीड़ा व्यक्त की, जिससे कि मीडिया के एक बड़े वर्ग ने कुछ खास तव्वजो नहीं दी। ट्वीट में उन्होंने कहा कि देश में नेता चुनावी रैलियों में भीड़ जुटा रहे हैं, पेशेवर क्रिकेटर क्रिकेट खेल रहे है, पेशेवर अभिनेता फिल्मों की शूटिंग कर रहे हैं कहीं कोई कोरोना नहीं, बाजार पर कर्फ्यू, लॉकडाउन व समय सीमा क्यों थोपी जा रही है। बाजार देश की रीढ़ की हड्डी हैं जिसकी किसी को भी फिक्र नहीं है। इधर हरियाणा में सरकार 30 अप्रैल तक सरकारी स्कूल बंद रखने की घोषणा कर चुकी है जबकि निजी स्कूल संगठन स्कूलों को खोलना चाहते हैं। पंजाब में यूं तो कोरोना पर कड़ाई की जा रही है परन्तु सरकारी बसों में महिलाओं के मुफ्त यात्रा की भीड़ पर प्रशासन एकदम चुप है जबकि इससे निजी क्षेत्र की बसों की भी आर्थिक स्थिति चरमरा गई है।

    देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार भी बहुत अच्छी है जिससे बाजार में उत्साह था कि कामकाज फले-फूलेगा परन्तु सरकारी नीतियों से बाजार में उलटा-पुलटा माहौल है। राजनीति बाजार को लील रही है हालांकि राजनेताओं पर सदैव इस बात का भूत सवार रहता है कि वे अपने कार्यकाल में विकास व आर्थिक प्रगति को ऐसा रखें कि उन्हें लोग अच्छे प्रशासक समझें व बार-बार चुनें। कोरोना पर केंद्रीय व राज्य सरकारों, विभिन्न राजनीतिक दलों में बहुत ज्यादा मतभिन्नता है। राजनीतिक मतभिन्नता कुछ स्वार्थपूर्ण है कुछ अनुभवहीनता की वजह से भी है। देश आगे बढ़ रहा है परन्तु देश में नेताओं की सोच अभी भी पुरानी ही चल रही है, कोरोना में इसकी साफ-साफ तस्वीर देश देख रहा है। देश के युवा एवं पेशेवर विकसित राष्ट्रों के पेशेवरों के समान्तर हो रहे हैं, लेकिन नेता अभी भी पिछड़ेपन का परिचय दे रहे हैं।

    कोरोना में आर्थक गतिविधयां, स्वास्थ्य सुविधाओं, नागरिकों की शिक्षा एवं जीवन स्तर के हिसाब से देश को चलाया जाना चाहिए। यहां कोरोना का असर कम है या वैक्सीनेशन हो चुका, क्षेत्र कारोबार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है उस क्षेत्र में नागरिकों के अनुसार प्रशासन व्यवहार करे। यहां रोगी ज्यादा हैं लोग भी लापरवाह हैं और वक्सीनेशन की रफ्तार धीमी है उन क्षेत्रों में पाबंदियां बढ़ाई जाएं। अगर राजनेता राजनीतिक गतिविधियां चलाए रखते हैं और बाजार को बंद कर रहे हैं तब ये देश के लिए बेहद घातक सिद्ध होने वाला है। उद्यमियों व आर्थिक क्षेत्र में लगे पेशेवरों, कर्मिकों की पीड़ा को समझा जाए एवं उन्हें सुरक्षित रहते हुए कारोबार की पूरी छूट दी जाए।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।