सुखों की खान है राम का नाम

Anmol Vachan, True Saint

सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का नाम सुखों की खान है। ऐसी सुखों की खान, जिसके सामने हीरे, जवाहरात, लाल सब फीके रह जाते हैं। इस काल की नगरी में राम-नाम की यह खान सरेआम दिखती नहीं, लेकिन संत राम-नाम की खान का पता बता देते हैं, आगे उस पर चलना, साधना करने वाले पर निर्भर करता है। कहीं से सोना, हीरे, लाल-जवाहरात निकल रहा हों और कोई पता बता दे कि फलां जगह ऐसा हो रहा है, तो हमें लगता है कि पूरी दुनिया वहां उमड़ पड़े। हालांकि उससे हासिल होगा सिर्फ मारामारी। फिर नतीजा होगा इन्सान का खात्मा। …चलो, हीरे-जवाहरात हासिल भी कर लिए, लेकिन अगर उसका मोल लगाने वाला ही कोई न बचा, तो क्या फायदा होगा? …चलो, अगर मोल भी लग गया, तो लूट, ठगी, बेइमानी से इकट्ठे किए गए ये जवाहरात सुख देने वाले नहीं होंगे। आप जहाज पर सफर करते हैं, लेकिन अगर आपका शरीर बीमारियों का घर है, आप चैन की नींद नहीं ले पाते, तो उन जहाजों के सफर का क्या फायदा होगा?

इसलिए जरा सोचिए, क्या वो सुखी नहीं जो मेहनत की करके खाते हैं! जिनके लिए धरती बिछौना है और आकाश ओढ़ना है, उनको नींद ऐसी आती है कि पता ही न चले, कब रात गुजर गई! …राम-नाम की खान ऐसी खान है। अगर राम-नाम की खान आपके पास है, तो चाहे जहाजों पे है या धरती के बिछौने पे, आप सुखी ही सुखी रहेंगे। क्योंकि राम-नाम सभी पर असर करता है, चाहे वो अमीर हो या गरीब। जो इन्सान राम-नाम का जाप करता है, राम-नाम की खान की तरफ बढ़ता है, उसे ही राम-नाम के हीरे-जवाहरात मिलते हैं, जो दोनों जहान में इन्सान को रोशन करते हैं, इन्सान के अंत:करण को खुशियों से लबरेज कर देते हैं।

 

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