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Saturday, February 7, 2026
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    …जब कोरोना ने एक दंपत्ति का तलाक होने से बचाया

    Story

    पति के कोरोना संक्रमित की सूचना मिलते ही घर पहुंची पत्नी

    • पत्नी खुद भी आई चपेट में तो पति ने निभाया धर्म, अब दोनों स्वस्थ, केस खत्म

    सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। यह हम सब जानते और मानते हैं कि कोरोना ने अभी तक लाखों लोगों की जिंदगी खत्म कर दी है। लाखों लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। वहीं इस दौर में घरेलू हिंसा के केस भी बहुत बढ़े हैं। इन सबके बीच कोरोना के कारण एक सकारात्मक काम भी हुआ। मन-मुटाव के चलते एक पति-पत्नी के बीच अदालत में चल रहा केस कोरोना के कारण खत्म हुआ और उनका परिवार बस गया।

    बता दें कि गुरुग्राम जिला निवासी विमलेश कुमार (बदला हुआ नाम) रांची में जॉब करता है। उसकी शादी रांची के ही एक गांव में हुई। उनका 4 साल का एक बच्चा भी है। (Couple’s Divorced story) बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच थोड़ा मनमुटाव हुआ। इस मनमुटाव का परिणाम यह निकला कि उसकी पत्नी के रिश्तेदारों के दखल से मामला अदालत में पहुंच गया, उसकी पत्नी ने अदालत में तलाक और गुजारा भत्ता का केस दाखिल कर रखा है।

    • उक्त युवती वहां से 321 किलोमीटर दूर अपने मायके में ही रह रही है।
    • युवक की पत्नी को जब पता चला कि उसका पति कोरोना संक्रमित हो गया है ।
    • उसकी अन्तर्रात्मा ने उसे झंकझोर दिया।
    • वह भूल गई कि अदालत में तलाक केस का चल रहा है।
    • उस समय उसके जह्न में सिर्फ और सिर्फ अपनी मांग के सिंदूर, अपने सुहाग के जीवन की चिंता थी।
    • सब कुछ भूलकर वह अपने 4 साल के बच्चे को लेकर अपने पति के पास पहुंचकर उसकी सेवा में लग गई।

    पत्नी खुद भी हो गई कोरोना संक्रमित

    पति की सेवा करते-करते वह खुद भी कोरोना संक्रमित हो गई। पति कोरोना नेगेटिव हुआ तो वह भी जिम्मेदारी के साथ अपनी कोरोना पॉजिटिव पत्नी की सेवा करने लगा। दोनों की यह सच्ची सेवा और प्रार्थना रंग लाई। अब पति-पत्नी दोनों स्वस्थ हैं। उनके एडवोकेट से चर्चा करने के बाद गुरुग्राम में एडवोकेट सुधीर मुद्गिल ने बताया कि तलाक का केस भी खत्म हो गया है। परिवार हंसी-खुशी के साथ रहने लगा है। सुधीर मुद्गिल का कहना है कि समाज को ऐसी घटनाओं से सीख लेनी चाहिए। जिस कोरोना महामारी में 1 साल से लेकर उम्रदराज तक लोगों की मौत हो रही है, ऐसे समय में हमें आपसी विवाद, द्वेष भुलाकर एक नई जिंदगी की शुरूआत करनी चाहिए। क्योंकि आज दुनिया ऐसे मुकाम पर है, जहां जिंदा रहना ही कामयाबी है।

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