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    Saint Dr. MSG ने बताए मसालेदार और ज्यादा बाहर का खाना खाने के नुक्सान

    Dussehra 2025
    Karva Chauth | करवा चौथ पर पूज्य गुरु जी के वचन | Saint Dr MSG Insan

    बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने बरनावा आश्रम में फरमाया कि चटर-पटर ज्यादा खाते हैं बच्चे, उसमें क्या ताकत है? कौन से प्रोटीन हैं ये नहीं देखते, जीभ का स्वाद आना चाहिए ये देखते हैं। अब उसमें मसाले हैं तरह-तरह के, तरह-तरह की भावनाएं हैं उसमें। हम आपको कहा करते हैं ना ‘‘जैसा खाओ अन्न, वैसे होए मन’’, ये संत, पीर-पैगम्बरों की बाणी में लिखा है। तो आप बाहर जाकर खाना खा रहे हैं। मान लीजिये वो शैफ है खाना बना रहा है, उसके मालिक ने उसको डाँट दिया तो वो बना रहा है आपके लिए कुल्चा, या छोले बना रहा है या जो भी आप खाते हो डोसा बना रहा है या जो भी आप खाते हो बहुत सारे नाम हैं।

    तो वो बना रहा है, लेकिन वो गालियां दे रहा है, तेरी, फलानी, धिकड़ आप सब जानते हो, क्योंकि वो लड़ा हुआ है, पर आप बड़े मूड़ बनाकर गए हो यार बाहर का खाना खाने जा रहे हैं, आज तो सैटरडे है, संडे है, बच्चों को आजकल नौजवानों को होता है, वो आपका पंजाबी में कहिये तो मंजी ठोक देंदा है, कि सारा मूड़ बना बनाया, जब वो खाना खाओगे, उसकी भावनाएं मिक्स हो गर्इं, कुछ हो सकता है गुस्से में पसीना आया हो, उसका भी तड़का लगा हो साथ में। लगता देखा है हमने भाई, सब को नहीं हम कह रहे। पर जो देखा है तो वो तड़का भी लग गया साथ में स्पेशल वाला। और साथ में उसकी भावनाएं उसमें आ गई, वो बोलता रहा, गालियां देता रहा, आप खाते हो, यार मूड़ अच्छा भला लेकर आए थे, ये क्या हो गया? आप महसूस करना, कभी ना कभी ऐसा हुआ होगा सबके साथ। जरूर हुआ होगा, जो बाहर जाकर खाते हैं कभी ना कभी। जी, बिल्कुल हुआ है बच्चे हाथ खड़ा कर रहे हैं। होता है, बड़े अच्छे मूड़ में जाते हैं, बड़े खुशी में पता ही नहीं चलता, पल में लड़ाई हुई नहीं कि मूड़ तार-तार हो जाता है, तो इसकी वजह ये भी।

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि क्यों ना घर में राम-नाम का जाप करके, खुशी-खुशी भजन सुनते हुए खाना बनाया जाए, मालिक का नाम लेते हुए खाना बनाया जाए, ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को याद करते हुए खाना बनाया जाए, अगर खराब मूड़ है तो 100 पर्सेंट ठीक हो जाएगा, लाजमी खुशी आएगी। आप खुशियां होटल में ढूंढने गए हो, खुशियां घर में बैठी हैं। पर कौन मानता है आज के जमाने में, कहते अह…आउटिंग अच्छी होती है। चाहे छित्तर खाकर आएं, वो एक अलग बात है। आपस में लड़ाई हो जाती है वो छित्तर मारा ना मारा एक बराबर। दोनों के मुँह कूपा सूजे होते हैं मियां-बीबी के या बच्चों के। तो उसकी वजह पवित्र वेदों में ऐसे ही नहीं लिखा कि जैसा अन्न ग्रहण करोगे, वैसा मन पर असर लाजिमी होगा, जरूर होगा। तो घर के खाने को आप यू मजाक मत समझो। उसमें बड़ा कुछ छुपा होता है। पहले माँ-बहनें जो होती थी, चलो मान लो कोई गीत गाते ही बना लेती थी, या राम का नाम लेते हुए बनाया करती तो बड़ा उसका टेस्ट आज तक नहीं भूलते।

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