कॉमनवेल्थ खेल : लाईट वेट मुक्केबाजी के सेमीफाइनल में मामूली अंतर से हारी

भिवानी की बेटी जैस्मिन ने मुक्केबाजी में देश की झोली में डाला कांस्य पदक

परिजनों और ग्रामीणों में खुशी, बोले-ओलंपिक में गोल्ड लाएगी बेटी

भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। मिनी क्यूबा के नाम से विख्यात भिवानी शहर को मुक्केबाजों का गढ़ यू ही नहीं कहा जाता, बल्कि यहां के मुक्केबाज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करते हैं तो लोगों के जह्न में मुक्केबाजी की नगरी भिवानी का नाम अपने आप आता है। भिवानी की महिला मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया ने बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ खेलों मे देश के लिए कांस्य पदक प्राप्त करके मिनी क्यूबा का नाम रोशन किया। 60 किलोग्राम की लाईट वेट मुक्केबाज जैस्मिन ने क्वार्टरफाइनल में न्यूजीलैंड की ट्रायगार्डन को 4-1 से हराकर कांस्य पदक हासिल किया। हालांकि जैस्मिन सेमीफाइनल में इंग्लैंड की खिलाड़ी गैमापैज रीचर्डसन से मामूली अंतर से हार गई। भिवानी में जैस्मिन के परिजनों ने इस बात की खुशी जताई कि उनकी बेटी ने देश की झोली में पदक डालकर उनका गौरव बढ़ाया है।

  • पिता करते हैं होमगार्ड में नौकरी

भिवानी शहर में 30 अगस्त 2001 को जन्मी जैस्मिन चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर है। उनके पिता जयवीर सिंह होमगार्ड की नौकरी करते हैं तथा माता जोगेंद्र कौर गृहणी है। जैस्मिन का छोटा भाई जयंत भी अपनी बहन की देखादेखी अब बॉक्सिंग खेलता है।

  • चाचा से प्रेरित होकर बॉक्सिंग में आई

जैस्मिन ने 16 वर्ष की आयु में अपने चाचा संदीप व प्रविंद्र से प्रेरणा लेकर मुक्केबाजी शुरू की। उसके दोनों चाचा राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं। 2019 में जैस्मिन ने यूथ एशियन खेलों में ब्रांज मैडल प्राप्त किया था। इससे पहले जैस्मिन आॅल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी व खेलों इंडिया में भी प्रतिभागी रह चुकी है। सीनियर नेशनल खेलों में सिल्वर मैडल के अलावा वर्ष 2021 में हुए सीनियर एशियन खेलों में कांस्य पदक भी प्राप्त कर चुकी है। बॉक्सम टूर्नामेंट में भी अपने भार वर्ग में जैस्मिन लंबोरिया सिल्वर मैडल प्राप्त कर चुकी है।

  • अब एशियन खेलों और ओलंपिक की तैयारी

जैस्मिन के ब्रांज मैडल जीतने की खुशी जहां उनके परिजनों को है। वहीं जैस्मिन के माता जोगेंद्र कौर व चाचा संदीप को इस बात का मलाल भी है कि जैस्मिन देश के लिए गोल्ड मैडल नहीं ला सकी, क्योंकि जैस्मिन ने बेहतर तैयारी की थी। ऐसे में मामूली अंतर से हारने के कारण वह कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में वह कांस्य पदक से आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि जैस्मिन के परिजनों का कहना है कि जैस्मिन इस प्रतियोगिता से लौटने के बाद एशियन खेलों व ओलंपिक खेलों के लिए अपनी तैयारियों में जुटेंगी। जहां वह देश के लिए जरूर गोल्ड मैडल लाएगी।

  • कड़ी मेहनत से हासिल किया मुकाम

जैस्मिन की माता का कहना है कि दूध-बादाम व कड़ी मेहनत के बल पर जैस्मिन ने मुक्केबाजी में अपनी जगह बनाई तथा कॉमनवेल्थ में कांस्य पदक प्राप्त किया। जैस्मिन के भाई जयंत ने बताया कि वह भी अपनी बहन की देखादेखी अब मुक्केबाजी करने लगा है।

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