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    बाईपास ग्राफ्ट एंजियोप्लास्टी के जरिए बचाई वृद्ध की जान

    उदयपुर (एजेंसी)। राजसथान में उदयपुर के पारस अस्पताल की कार्डियोलॉजी टीम ने एक 65 साल के मरीज की सफल री.डू वीनस पैर से लिया गया ग्राफ्ट बाईपास ग्राफ्ट एंजियोप्लास्टी की गई। अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के हेड डा अमित खंडेलवाल ने बताया की मरीज का 2006 में ह्रदय की तीन धमनियों आर्टरी में ब्लॉकेज के कारण बाईपास हुआ था। मरीज की स्थिति 10 साल तक स्थिर रही लेकिन फिर अचानक 2016 में उन्हें छाती में तकलीफ होने लगी तब पता चला की दाएं तरफ की धमनी के वीनस बाईपास ग्राफ्ट में 90 प्रतिशत ब्लॉकेज है। उस समय उनकी वीनस बाईपास ग्राफ्ट में एंजियोप्लास्टी की गई। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले मरीज को वापस छाती में दर्द घबराहटए पसीने की स्थिति में अस्पताल ले जाया गया। ईसीजी करने पर पता चला की मरीज को मेजर हार्ट अटैक आया है और गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पारस अस्पतालए उदयपुर रेफर कर दिया गया।

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    जब मरीज को पारस अस्पताल लाया गया तब उनका कम बीपी और अस्थिर हृदय गति की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत कैथ लैब में लिया गया जहां उनकी एंजियोग्राफी की गई जिसमें सामने आया की मरीज के दाई धमनी के वीनस बाईपास ग्राफ्ट में जो एंजियोप्लास्टी? 2016 में की गई थी उसी में शत प्रतिशत ब्लॉकेज वापस हो गया है।

    क्या है मामला

    उस ग्राफ्ट को खोलना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था क्योंकि आर्टिरियल ब्लॉकेज में ज्यादातर थ्रोम्बस एवं फेट पैड होता है पर वेन्स ग्राफ्ट ब्लॉकेजेस में डीजेनरेटेड डेब्रिस होती हैं जिसका इलाज बहुत मुश्किल होता है। मरीज की दाई तरफ की नाड़ी पहले से ही शत ब्लॉकेज के कारण खराब थी और उसी धमनी की बाईपास ग्राफ्ट में ब्लॉकेज होना यहां एक गंभीर समस्या थी और किस धमनी को खोला जाए यह भी एक महत्वपूर्ण निर्णय था। मरीज का इको पर ह्रदय पंपिंग फंक्शन सिर्फ 25 से 30 प्रतिशत रह गया था। डा खंडेलवाल ने बताया कि मरीज की कम हृदय गति को देखते हुए टेंपरेरी पेसमेकर से स्थिर किया गया। कई तारों और बलूंस की मदद से जिसमें कटिंग बलून ओपीएन.एनसी ?बलून भी इस्तेमाल किए गए और फिर अंत में 3 मेडिकेटेड स्टेंट लगाकर वीनस बाईपास ग्राफ्ट की गई। उस नाड़ी को खोल दिया गया जिससे रक्त का बहाव बेहतर रूप से होने लगा। उन्होंने यह भी बताया की एंजियोप्लास्टी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग कोरोनरी धमनी रोग के कारण अवरुद्ध कोरोनरी धमनियों को खोलने के लिए किया जाता है।

    यह ओपन.हार्ट सर्जरी के बिना हृदय की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह को शुरू करता है। हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में एंजियोप्लास्टी की जा सकती है या इसे वैकल्पिक सर्जरी के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि दिल का दौरा पड़ने के बाद जितना जल्दी हो मरीज की एंजियोप्लास्टी हो जानी चाहिए जिससे की मृत्यु का जोखिम कम हो जाता और हृदय की मांसपेशियों का नुकसान भी कम हो जाता है।

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