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    फिल्मों में भी धर्म के प्रति गलत नजरिया दिखाया जाता है: पूज्य गुरु जी

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    बरनावा। आॅनलाइन गुरूकुल में पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने फरमाया कि होली के पर्व पर लोग कहते हैं कि लोगों पर पानी गिर जाएगा और जिससे पानी की कमी आ जाएगी। लेकिन चमड़ा धोने और शराब बनाने में जितना पानी लगता है, अगर कोई पूरे साल में शराब व चमड़ा धोने में जितना पानी लगता है उसकी कैलकुलेशन कर ले तो होली में तो 100 परसेंट में से कुछ प्वाइंट भी पानी नहीं लगता। यह बात किसी को ध्यान में नहीं आती और इस बारे में तो कभी कोई आवाज नहीं उठाई जाती। उसे कभी नहीं रोका जाता। त्यौहारों पर ही क्यों इनका फोक्स है। पूज्य गुरू जी ने आगे फरमाया कि अन्य किसी भी धर्म में देवी-देवताओं को फिल्मों में गलत नजरिये से नहीं दिखाया जाता, उनका अनादर नहीं किया जाता। लेकिन सिर्फ और सिर्फ, हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की फिल्मों में, समाज में सरेआम बेइज्जती होती है और कोई रोकता भी नहीं। कहते हैं कि हम हिंदुस्तान में रह रहे हंै, हम भारत में रह रहे हैं, हिंदुस्तान जिसमें हिंदुत्व ज्यादा है। हम ये नहीं कह रहे कि हम इनका पक्ष ले रहे हैं, हम तो सभी को बराबर देख रहे हंै। जब दूसरे धर्मों में ऐसा नहीं हो रहा तो हमारे हिंदू धर्म में ऐसा क्यों हो रहा है, बहुत ही दुखद है यह बात, जिसका दिल करता है, निकल पड़ते हैं बेइज्जती करने, क्योंकि कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। कितनी बार फिल्मों में बेइज्जती की गई है। गुटखा बनाने वाले क्या कोई कमी छोड़ते हैं।

    शायद जहां तक हमें पता है गुटखे पर गणेश छाप तक लिखा होता है, यह बहुत ही दर्दनाक बात है। गुटखे को खाया, जिसमें पता नहीं किस-किस की गंदगी होती है, उसे मुंह में लगा लिया और फिर देवी-देवताओं के नाम से बने पाऊच को नीचे फैंक दिया जाता है और लोग उसे अपने पैरों के नीचे कुचल रहे हैं। पूज्य गुरू जी ने बताया कि हमने मुंबई में देखा था कि लोग गणेश चतुर्थी पर फाइबर के गणेश जी बना कर फैंक देते है और फिर लोग उन्हें निकाल कर तोड़ देते हंै। यह एक रीत थी। जिसमें या तो आटे से गणेश जी बनाते थे या ऐसी मिट्टी से रंग भरके खूबसूरत गणेश जी बनाए जाते थे और जब उनको पानी में परवाह करते थे, तो वो (मिट्टी के गणेश जी) पानी में घुल जाते थे तथा पानी को फिल्ट्रेशन करते थे। इसलिए उन्हें पानी में घोला जाता था। आज तो आप भी अपने देवी-देवताओं की बेइज्जती करवा रहे हैं। हम यही कह रहे हैं कि लोग वैसे तो एक-दूसरे के धर्मों की तुलना करने लग जाते हंै, अगर हमारा देश सभी धर्मों को मानने वाला देश है तो हमारे हिंदू धर्म का निरादर क्यूं हो रहा है और किस लिए हो रहा है। क्यूं नहीं हमारे हिंदू धर्म के हो रहे निरादर को रोका जाता। हम तो प्रार्थना कर रहे हैं कि इसे रोकना चाहिए। हम हमारे देश के राजा-महाराजाओं से प्रार्थना कर रहे हैं कि जब दूसरे धर्म में बात कहने से बवाल खड़ा हो जाता है तो हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की बेइज्जती क्यूं हो रही है, क्यंू दशहरे वाले दिन जुआ खेला जाता है, क्यंू दशहरे वाले दिन लोग रावण बन जाते है तथा राम को फोलो क्यूं नहीं करते। किसी को इन चीजों की परवाह नहीं है। राक्षस यानि रावण सारे बने होते हैं और राम जी तो कोई-कोई होता है।

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