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    अब गेहूं में नहीं पड़ेगी रसायनों की जरूरत, ब्रह्मास्त्र व नीमास्त्र सहित 4 पदार्थ करेंगे पोषण

    Farming

    गांव ख्योवाली में 4 किसानों ने लगाए प्राकृतिक खेती के प्लांट

    • बुआई से लेकर कटाई तक नहीं होगा रसायनों का प्रयोग
    • पूज्य गुरु जी कर चुके हैं ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित

    ओढां (राजू)। अब गेहूं में रसायनों की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र व ब्रह्मास्त्र सहित 4 तरह के पदार्थ आपकी फसल का पोषण करेंगे। इससे न केवल भयानक बीमारियों पर काफी हद तक अंकुश लगेगा तो वहीं किसान भी आर्थिक व शारीरिक रूप से मजबूत होंगे। इसकी शुरुआत ओढां खंड में गांव ख्योवाली से हो चुकी है। दरअसल जहरमुक्त खेती छोड़कर प्राकृतिक ढंग से खेती अपनाने के उद्देश्य से सरकार ने ‘कम लागत प्राकृतिक कृषि’ योजना शुरू की है।

    इस योजना को शुरुआती तौर पर ट्रायल के रूप में लिया गया है। विभाग का मानना है कि अगर ये योजना पूरी तरह से सफल हो जाती है तो किसान न केवल आर्थिक रूप से स्मृद्ध होंगे बल्कि जहरमुक्त अन्न खाने से भयानक बीमारियों से भी काफी हद तक बचा जा सकेगा। इस योजना की शुरुआत ओढां खंड में गांव ख्योवाली से हो चुकी है। जहां 4 जागरूक किसानों ने इस योजना को अपनाते हुए अपने खेतों मेंं ट्रायल के तौर पर लिया है। ये किसान अपने खेतों में गेहूं की फसल का उत्पादन योजना के तहत प्राकृतिक ढंग से करेंगे।

    किसानों ने इस ट्रायल के तहत गेहूं की बुआई बगैर यूरिया, डीएपी, पोटाश, जिंक, खरपतवार नाशक दवा सहित अन्य छिड़काव के की है। बुआई से लेकर कटाई तक संपूर्ण कृषि क्रियाएं प्राकृतिक ढंग से ही प्रयोग में लाई जाएंगी। इसमें बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र व ब्रह्मास्त्र सहित 4 तरह के पदार्थ डालें जाएंगे। कृषि विभाग ओढां के सहायक तकनीक अधिकारी रमेश सहु ने बताया कि योजना के तहत 4 किसानों के यहां एक तरफ तो योजना के तहत प्राकृतिक ढंग से तो वहीं दूसरी तरफ आमतौर पर होने वाली रसायनिक खेती के तहत चैक प्लांट के रूप में गेहूं का उत्पादन किया जा रहा है। गेहूं के कटान के समय पैदावार की औसतन व क्वालिटी की तुलना होगी।

    योजना के तहत प्लांट लगाने वाले जागरूक किसान पवन श्योराण, राधेराम शेरावत, सिद्धांत गोदारा व प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने इसे अपने खेतों में ट्रायल के तौर पर लिया है। अगर रसायनिक खेती की तुलना में प्राकृतिक खेती के तहत होने वाली पैदावार में बेहतर परिणाम मिला तो अगली बार इसी योजना के तहत ही खेती करेंगे। किसान पवन श्योराण ने बताया कि इस कार्य में थोड़ी मेहनत जरूर है, लेकिन अगर ये योजना सफल होती है तो किसानों को आर्थिक व शारीरिक दोनों रूप से लाभ मिलेगा।

    ये मिलेगा अनुदान 

    प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु सरकार द्वारा इस योजना के तहत अनुदान भी दिया जा रहा है। जिसमें 4 खाली प्लास्टिक ड्रमों पर 3 हजार रुपये व एक देसी गाय खरीदने पर 25 हजार रुपये का अनुदान है। यानी कुल 28 हजार रुपये के अनुदान का प्रावधान है। कृषि विभाग द्वारा ओढां खंड में 20 एकड़ भूमि में प्राकृतिक प्लांट लगाने का लक्ष्य है। जिसमें गांव ख्योवाली में इसकी शुरुआत 4 किसानों के खेतों में हो चुकी है।

    फसल का पोषण करेंगे ये 4 पदार्थ 

    प्राकृतिक खेती में किसान बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र व ब्रह्मास्त्र सहित 4 तरह के पदार्थांे का प्रयोग करेंगे। इन पदार्थांे को किसान अति कम लागत पर घर पर ही तैयार कर सकते हैंं। बीजामृत में देसी गाय का गोबर व मूत्र, बुझा हुआ चूना तथा जीवामृत में देसी गाय का गोबर व मूत्र, गुड़, बेसन, पानी व पेड़ के नीचे की मिट्टी का इस्तेमाल होगा। वहीं नीमास्त्र में नीम के पत्ते, गौमूत्र व गोबर तथा पानी व ब्रह्मास्त्र में गौमूत्र, नीम के पत्तों का पाउडर, सफेद धतूरे के पत्तों का पाउडर, सीताफल के पत्तों का पाउडर, करंज, अमरूद, अरंडी व पपीते के पत्ते शामिल हैं। इन पदार्थांे का घोल फसल में पोषक तत्वों की पूर्ति करने के साथ-साथ अन्य बीमारियों पर भी नियंत्रण करेगा।

    कुरुक्षेत्र से हुई शुरुआत 

    प्राकृतिक खेती की शुरुआत हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा की गई थी। जिसके तहत हिमाचल व गुजरात में काफी किसान इसे अपना चुके हैं। जिसके बाद इसे हरियाणा मेंं लाया गया है। हरियाणा में इसकी शुरुआत कुरुक्षेत्र से हुई। जहां पर गुरुकुल प्राकृतिक कृषि केंद्र शुरु किया गया है। यहां पर कृषि विभाग के अधिकारियों व प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को 3 दिन का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    पूज्य गुरु जी पहले कर चुके हैं जहरमुक्त खेती के लिए प्रेरित 

    पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां रसायनिक खेती छोड़कर आॅर्गेनिक खेती अपनाने के लिए किसानों को पहले से ही प्रेरित करते आ रहे हैं। इसके अलावा पूज्य गुरु जी ये भी बता चुके हैं कि किस तरह से कम जगह में अधिक पैदावार उठाई जा सकती है। पूज्य गुरु जी ने बताया है कि रसायनों से की गई खेती न केवल मनुष्य को बल्कि पर्यावरण को भी खतरे में डालती है। इसलिए अगर किसान आॅर्गेनिक तरह से फसल का उत्पादन करें तो न केवल काफी हद तक बीमारियों से बचा जा सकेगा बल्कि किसान आर्थिक रूप से भी स्मृद्ध हो सकते हैं। पूज्य गुरु जी के खेती से संबंधित टिप्स अपनाकर अनेक किसान स्मृद्ध हो चुके हैं। पूज्य गुरु जी जब बीते दिनों यूपी रहे तो उन्होंने सोशल मीडिया पर खेती करते हुए एक पोस्ट शेयर की। जिसमें पूज्य गुरु जी ने किसानों को आॅर्गेनिक खेती बारे जागरूक भी किया।

    ओढां खंड में प्राकृतिक कृषि की शुरुआत गांव ख्योवाली से हुई है। हमने 4 जागरूक किसानों के खेतों में रबी के ट्रायल प्लांट लगाए हैं। गेहूं की फसल पूरी तरह से रसायनों से मुक्त है। हम समय-समय पर देखभाल कर रहे हैं। ये प्लांट किसानों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होंगे। किसान रसायनिक ढंग से खेती करने के आदी हैं। अगली बार किसानों मेंं काफी जागरूकता आएगी। हम इसके लिए जागरूकता शिविर लगाएंगे।
    – रमेश सहु, सहायक तकनीक अधिकारी (कृषि विभाग ओढां)।

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