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    अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस : पंजाबी यूनीवर्सिटी को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे विद्यार्थी संगठन

    पीयू का मुख्य गेट बंद कर किया यातायात ठप्प, यूनीवर्सिटी प्रशासन के फूले हाथ-पांव

    • यूनीवर्सिटी प्रशासन व प्रदेश सरकार के विरूद्ध किया प्रदर्शन, रैली कर की नारेबाजी

    पटियाला। (सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर) अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर पंजाबी यूनीवर्सिटी को बचाने के लिए यूनीवर्सिटी की विद्यार्थी संगठनें सामने आई हैं व इन संगठनों ने भारी इक्ट्ठ कर यूनीवर्सिटी प्रशासन व पंजाब सरकार पर आरोप लगाते यूनीवर्सिटी का मुख्य गेट बन्द कर रोष रैली निकाली।

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    उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों ने 5 विद्यार्थी संगठनों पीएसयू, पीआरएसयू, एआईएसएफ, एसएफआई, पीएसयू (एल) के बने सांझे विद्यार्थी मोर्चे के नेतृत्व में पंजाबी यूनीवर्सिटी बचाव मुहिम का आगाज किया। यूनीवर्सिटी प्रशासन व पंजाब सरकार पर आरोप लगाते यूनीवर्सिटी का मुख्य गेट बन्द कर सैकड़ों विद्यार्थियों ने रोष रैली निकाली। विद्यार्थी नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार एक तरफ मातृभाषा की रक्षक बनने की दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पंजाबी भाषा, साहित्य व संस्कृति के पसार व विकास के लिए बनी पंजाबी यूनीवर्सिटी को संभाल नहीं रही, जोकि अपने आखिरी स्वास गिन रही है। उन्होंने कहा कि इस समय यूनीवर्सिटी 2,97,54,14,250/- करोड़ के वित्तीय घाटे में है।

    150 करोड़ के कर्ज सहित यूनीवर्सिटी 4,475, 414,250/- करोड़ के वित्तीय संकट से जूझ रही है, जिस कारण विद्यार्थियों के होस्टल खसताहालत में पहुंच चुके हैं। नये होस्टल का निर्माण व पुराने की मुरम्मत के लिए भी पैसा नहीं है। यूनीवर्सिटी के पंजाबी विभाग में प्रोफैसरों, एसो. व सहायक प्रोफैसरों के कुल 15 पद सैक्शनड हैं, जिनमें 6 पद खाली हैं। पंजाबी भाषा विभाग में 8 सैक्शन्ड पदों में 7 पद खाली हैं। इसी तरह भाषा विज्ञान व पंजाबी कोशकारी विभाग में 10 सैक्शन्ड पदों में 9 पद खाली हैं। राजनीती शास्त्र के सैक्शन्ड पदों में 8 पद खाली हैं। इस कारण पीएचडी की सीटें भी खत्म हो रही हैं। इस मौके विद्यार्थी नेता अमनदीप सिंह, रशपिन्दर जिंमी, अमृतपाल, वरिन्द्र खुराना, गुरप्रीत, सुखी व अध्यापक नेता सहित अन्य मौजूद थे।

    विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पीएचडी खोजार्थियों को लगाया जा रहा है। खोज के अहम संस्थान नयी शिक्षा नीति के तहत नये शुरू किए 5 वर्षीय इंटीग्रेटड कार्यक्रम (एफआईवाईपी) की तरफ झुकाव होने के कारण आज डिग्री कॉलेज में रुपांतरित हो रहे हैं। इन कोर्सों के लिए सैंकड़ों विद्यार्थी भर्ती किए गए हैं लेकिन अध्यापकों, क्लास रूमों व होस्टलों का प्रबंध तक नहीं किया गया है। नेताओं ने ऐलान किया कि पंजाब सरकार पंजाबी यूनीवर्सिटी की कुल वित्तीय जिम्मेवारी उठाते पूरी ग्रांट जारी करे व यूनीवर्सिटी का 150 करोड़ का कर्ज माफ करे। होस्टलों का निर्माण किया जाए। नये अध्यापकों की पक्के तौर पर यूनीवर्सिटी कैंपस, रीजनल केन्द्रों व कंस्टीचऐंट कॉलेजों में तुरंत भर्ती की जाए।

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