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    यूपी-हरियाणा सीमा पर पिलर लगाने के लिए निशानदेही शुरू

    Kairana News
    चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पिलर लगाने के लिए निशानदेही करने पहुंची टीम

    सीमा विवाद को लेकर चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश | Kairana News

    • चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पिलर लगाने के लिए निशानदेही करने पहुंची टीम

    कैराना (सच कहूँ न्यूज)। दशकों पुराने यूपी-हरियाणा सीमा विवाद में चंडीगढ़ हाईकोर्ट (Chandigarh High Court) के आदेश पर सर्वे ऑफ इंडिया व दोनों प्रदेशों के राजस्व विभाग की टीम ने हरियाणा के पानीपत जिले के राणा माजरा में सीमा पर 112 पिलर लगाने के लिए निशानदेही का कार्य शुरू कर दिया। निशानदेही के बाद वहां पर सीमा को दर्शांते हुए पिलर लगाए जाएंगे। करीब 50 साल से हरियाणा यूपी सीमा विवाद चला आ रहा है। जिस कारण सीमा पर भूमि के स्वामित्व को लेकर किसानों के बीच खूनखराबा होता है। पिछले माह तहसील प्रशासन ने मवी से लगती हरियाणा सीमा पर 22 बीघा सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया था, लेकिन हरियाणा प्रशासन उक्त भूमि को अपनी बता रहा है।

    यह मामला चंडीगढ़ हाईकोर्ट में होने के कारण कुछ दिन पहले चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने सीमा पर पिलर लगाने के आदेश जारी किए थे। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में गुरुवार को सर्वे ऑफ इंडिया चंडीगढ़ के सर्वेयर मुकेश जैन ने कैराना के राजस्व कानूनगो नरेश मलिक, हलका लेखपाल फुरकान व हरियाणा की राजस्व टीम के साथ हरियाणा के पानीपत जिले के राणा माजरा से लगती सीमा पर पिलर लगाने के लिए निशानदेही शुरू कर दी। राणा माजरा के पास पहले चरण में 112 पिलर लगाये जाएंगे। दोनों प्रदेशों की राजस्व टीम ने सिजरे के आधार पर पैमाइश करके पिलर लगाने के स्थान की निशानदेही का कार्य शुरू कर दिया। सीमा पर पिलर लगने के बाद सीमा विवाद के हल होने की संभावना है। Kairana News

    इन्होंने कहा..

    चंडीगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर सर्वे ऑफ इंडिया चंडीगढ़ द्वारा हरियाणा यूपी सीमा पर राणा माजरा के पास 112 पिलर लगाए जाएंगे। पिलर के स्थानों का चयन करने के लिए दोनों प्रदेशों के सिजरे के आधार पर पैमाइश करके निशान लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। – मुकेश जैन सर्वेयर, सर्वे आफ इंडिया चंडीगढ़

    मवी सीमा पर भी लगाए जाएंगे पिलर : एसडीएम | Kairana News

    एसडीएम स्वप्निल कुमार यादव ने बताया कि पिछले माह मवी सीमा पर 22 बीघा सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया था। यह भूमि यूपी के राजस्व रिकॉर्ड में यूपी सरकार की है। जबकि हरियाणा प्रशासन उक्त भूमि को हरियाणा की बता रहा था। जिस कारण सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वेयर को मवी अहतमाल में भी पिलर प्राथमिकता के साथ लगाने को कहा गया है। ताकि विवाद पर विराम लग सके।

    क्या है यूपी हरियाणा सीमा विवाद?

    यमुना नदी की धारा हरियाणा-यूपी की सीमा का निर्धारण करती है। वहीं, यमुना नदी की धारा बदलने के कारण यमुना पार की जमीन यूपी में आ गई और यूपी की जमीन हरियाणा में चली गई थी। जिस कारण सीमा पर विवाद बन गया। 1974 में केंद्र सरकार के निर्देश पर दीक्षित आयोग का गठन किया गया था। जिसमें दोनों प्रदेशों व केंद्र सरकार के बीच सहमति बनी थी कि यूपी के किसानों की जो जमीन यमुना पार चली गई।

    उस जमीन का यूपी से राजस्व से रिकॉर्ड डिलीट करके हरियाणा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। यमुना पार गई यूपी के किसानों की जमीन का रिकॉर्ड यूपी सरकार ने डिलीट कर दिया, लेकिन हरियाणा प्रशासन ने ऐसी जमीनों को अपने रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया। जिस कारण यूपी के किसानों की जमीन पर दबंग अपना कब्जा कर लेते हैं। ऐसे में सीमा पर फसल तैयार होने के समय हर बार खूनखराबा होता है। Kairana News

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