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    जाखल पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की गई कुर्सी, अविश्वास प्रस्ताव हुआ पास

    Jakhal
    Jakhal जाखल पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की गई कुर्सी, अविश्वास प्रस्ताव हुआ पास

    जाखल (तरसेम सिंह)। जाखल ब्लॉक समिति सदस्यों द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का अविश्वास प्रस्ताव मंगलवार को सिरे चढ़ गया है। पूर्व पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली के समर्थक ये दोनों पदाधिकारी अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए हैं। दरअसल, जाखल ब्लॉक समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर एडीसी अनुराग ढालिया की अध्यक्षता में तय समयानुसार 3 बजे फतेहाबाद के लघु सचिवालय में बैठक हुई। जिसमें ब्लॉक समिति के 10 सदस्यों में से 7 सदस्यों ने पहुंच कर अपनी सहमति दर्ज करवाकर अविश्वास प्रस्ताव पास कर दिया है। इसी के साथ ब्लॉक समिति के अध्यक्ष जगतार सिंह व उपाध्यक्ष मीनू रानी को पद मुक्त कर दिया गया। अब नई अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन को लेकर नई तिथि प्रशासन के द्वारा निर्धारित की जाएगी। इस दौरान सिटी थाना एसएचओ ओमप्रकाश के नेतृत्व में भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।

    दरअसल, नवंबर 2022 में जाखल ब्लॉक समिति के चुनाव हुए थे। इसके बाद जगतार सिंह व मीनू रानी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली के जजपा में रहते हुए जीते थे। उस समय जजपा समर्थित वार्ड नंबर 1 से सदस्य जगतार सिंह नड़ैल ने 6 वोट लिए थे।

    उन्होंने एक वोट से जीतकर अध्यक्ष पद पाया था। वहीं, वार्ड नंबर 6 से सदस्य मीनू रानी भी 6 वोट लेकर उपाध्यक्ष पद पर काबिज हुई थी। जीतने के बाद दोनों तत्कालीन पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली के पास उनके आवास पर बुक्के लेकर गए थे।

    पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली के भाजपा ज्वाइन करने के बाद जगतार सिंह व मीनू रानी भी उनके साथ ही रहे। इस समय केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार है। पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली भी भाजपा के सदस्य हैं।

    उन्होंने अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा से चुनाव भी लड़ा। मगर हार गए थे। अब केंद्र व प्रदेश में भाजपा सरकार होने के बावजूद अपने समर्थक प्रधान-उपप्रधान की कुर्सी नहीं बचा पाने से बबली को एक और झटका लगा है।

    दिलचस्प बात यह है कि ब्लॉक समिति के सदस्यों में भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सुभाष बराला के समर्थक भी हैं। देवेंद्र बबली और सुभाष बराला के बीच खींचतान जगजाहिर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब सुभाष बराला के नजदीकी सदस्य को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाए जाने की कवायद शुरू होगी।