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    त्यौहारी सीजन सिर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैंपलिंग के कार्य के आदेश तक नहीं

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    Pratap Nagar News: त्यौहारी सीजन सिर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैंपलिंग के कार्य के आदेश तक नहीं।

    प्रताप नगर (सच कहूं/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: त्यौहारी सीजन सिर पर है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी तक सैंपलिंग के आदेश तक नहीं हुए हैं। ऐसे में मिठाइयों में मिलावट का धंधा जोरो पर है। मिठाइयों में ये मिलावट और विभाग की लापरवाही आमजन के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।

    ग्रामीण रामपाल,सतीश,रूपचंद,सुरेश आदि ने बताया कि त्यौहारी सीजन में नकली मावा और नकली पनीर की जमकर सप्लाई हो रही है। इस सीजन में किसी भी मावा,पनीर,दूध सप्लाई करने वाले के पास समय और माल नहीं है। सभी सिंथेटिक मावा और पनीर बनाने में व्यस्त लगे हुए है। लोगों का कहना है कि त्यौहारी सीजन में मिठाई की दुकानों पर मिठाई की जगह ज़हर की सप्लाई हो रही है। Pratap Nagar News

    त्योहारी सीज़न के आते ही बाजारों में मिठाइयों की मांग तेज़ हो जाती है। लोग बड़े उत्साह से अपने प्रियजनों के लिए मिठाइयाँ खरीदते हैं, लेकिन क्या उन्हें पता है कि वे जो मिठाई खा रहे हैं,उसमें स्वाद के साथ ज़हर भी परोसा जा रहा है। लोगों का कहना है कि आज के समय में मिलावटखोरी एक गंभीर समस्या बन गई है, खासकर नकली मावा और नकली पनीर की सप्लाई के कारण।

    मावा और पनीर मिठाइयों के प्रमुख घटक होते हैं। इन्हें शुद्ध और ताजे दूध से बनाना चाहिए, लेकिन आजकल बाजारों में जो मावा और पनीर बेचे जा रहे हैं, उनमें सिंथेटिक दूध, डिटर्जेंट, स्टार्च, रिफाइंड तेल, यूरिया, और अन्य हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये रसायन न केवल मिठाई के स्वाद को बिगाड़ते हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालते हैं। स्वास्थ्य पर गंभीर असर नकली मावा और पनीर से बनी मिठाइयों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, फूड पॉइज़निंग जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। लंबे समय तक इनका सेवन करने से लीवर, किडनी और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर और भी घातक हो सकता है।

    सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन पर कोई सख्त नियंत्रण नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कुछ औपचारिक निरीक्षण जरूर किए जाते हैं, लेकिन वे केवल खानापूर्ति तक ही सीमित हैं। मिठाई की दुकानों पर इस्तेमाल हो रहे मावा और पनीर की गुणवत्ता की जांच के लिए न तो पर्याप्त लैब सुविधा है, न ही आवश्यक संसाधन। ऐसे में मिलावटखोर खुलेआम ज़हर बेचने से नहीं चूकते। प्रशासनिक लापरवाही और जनता की अनदेखी प्रशासन की लापरवाही और जनता की जागरूकता की कमी ने इस समस्या को और बढ़ावा दिया है। अधिकतर लोग सस्ती मिठाई की लालच में बिना उसकी गुणवत्ता देखे ही खरीद लेते हैं। दुकानदार भी अधिक मुनाफा कमाने के लिए नकली सामग्री का सहारा लेते हैं। जब तक कोई गंभीर घटना नहीं हो जाती, तब तक ना तो प्रशासन चेतता है और ना ही आम जनता आवाज़ उठाती है।

    जागरूक लोगों का कहना हैं कि इस मिलावट को रोकने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाने होंगे और मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू करना होगा। मिठाई की दुकानों की नियमित जांच, फूड टेस्टिंग लैब्स की संख्या में वृद्धि और मिलावट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अनिवार्य है। साथ ही, जनता को भी जागरूक होना होगा। उन्हें मिठाई खरीदते समय दुकानदार से उसकी गुणवत्ता और सामग्री की जानकारी मांगनी चाहिए। त्योहारों की मिठास तब तक सुरक्षित नहीं रह सकती जब तक नकली मावा और पनीर की खुली सप्लाई पर लगाम नहीं लगती। मिठाई के नाम पर ज़हर का व्यापार बंद होना चाहिए और इसके लिए सरकार, प्रशासन, मिठाई व्यापारी और आम जनता सभी को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी। Pratap Nagar News

    इस बारे में प्रताप नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर जितेंद्र ने बताया कि अभी तक उनके पास विभाग की ओर से लिखित में सैंपलिंग के आदेश नहीं आए है। निर्देश मिलते ही सैंपलिंग का कार्य किया जाएगा। उन्होंने मिठाई की दुकानों और संस्थानों से अपील की है कि घटिया किस्म के सिंथेटिक मावा और पनीर का प्रयोग बिल्कुल ना करें। सैंपलिंग के सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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