Punjab SMAM Scheme: फाजिल्का (रजनीश रवि)। चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर फाजिल्का हरप्रीतपाल कौर ने बताया कि पंजाब सरकार ने खेती में अलग-अलग फसलों के लिए मैकेनाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए खेती की मशीनों पर सब्सिडी देने का फैसला किया है। ये मशीनें किसानों को सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (Punjab SMAM Scheme) स्कीम और क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन स्कीम के तहत सब्सिडी पर दी जाएंगी। इनमें अलग-अलग टेक्नोलॉजी वाली खेती की मशीनों पर सब्सिडी देने के लिए किसानों से एप्लीकेशन मांगी गई हैं। किसान 4 दिसंबर, 2025 को शाम 5 बजे तक एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पोर्टल agrimachinerypb.com पर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। Fazilka News
चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर ने फाजिल्का जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे इस स्कीम के तहत दी जा रही सब्सिडी का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएं ताकि फाजिल्का जिला खेती की मशीनीकरण में राज्य के लीडिंग जिलों में शामिल हो सके और खेती का खर्च और कुदरती रिसोर्स बचा सके। उन्होंने कहा कि ज़्यादा जानकारी के लिए किसान संबंधित ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर/असिस्टेंट एग्रीकल्चर इंजीनियर (संध) या चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर के ऑफिस में संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि न्यूमेटिक प्लांटर, मल्टी-क्रॉप थ्रेशर, गन्ना कटर, मूंगफली खोदने वाला, मेज़ ड्रायर, गन्ना हार्वेस्टर, कॉटन स्टॉक अपरूटर, पावर स्प्रेयर, धान की सीधी बुवाई के लिए DSR ड्रिल, लंबी फसलों में स्प्रे करने के लिए हाई क्लीयरेंस बूम स्प्रेयर, PTO. ऑपरेटेड बंड फार्मर, नर्सरी सीडर, रेज्ड बंड प्लांटर, ट्रैक्टर पावर्ड बूम स्प्रेयर, लकी सीड ड्रिल, मैनुअल/पावर स्प्रेयर वगैरह मशीनों की खरीद के लिए 40% से 50% तक की सब्सिडी या स्कीम के निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन एप्लीकेशन मंगाए गए हैं। इस बारे में नियम और शर्तें पोर्टल पर उपलब्ध हैं। Fazilka News
उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में किसान DSR ड्रिल का इस्तेमाल करके पानी और बिजली बचा सकते हैं, जबकि मक्का और दूसरी फसल विविधता वाली फसलों के लिए वे बेहतर तरीके से और कम समय में बुवाई का काम कर सकते हैं, जिससे समय की बचत होगी और अतिरिक्त बीज का खर्च भी बचेगा।
आवेदन भरते समय किसानों के पास सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी हो
उन्होंने कहा कि आवेदन भरते समय किसानों के पास आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, जमीन के मालिकाना हक का सबूत और अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट (अगर आवेदक अनुसूचित जाति का है) आदि की स्कैन की हुई कॉपी होनी चाहिए। स्कीम के तहत सिर्फ उसी आवेदक पर विचार किया जाएगा जो 5,000 रुपये की रिफंडेबल टोकन मनी जमा करेगा। कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने के लिए सहकारी समितियों, ग्राम पंचायतों और किसान उत्पादक संगठनों के प्रधान और सदस्यों का आधार कार्ड नंबर और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट होना जरूरी है। आवेदक सब्सिडी के हकदार तभी होंगे जब वे उसी कैटेगरी में आवेदन करेंगे जिससे वे संबंधित हैं।
उन्होंने कहा कि आवेदन मिलने के बाद, जिला स्तरीय कमेटी जरूरत पड़ने पर विभाग से मिले निर्देशों के अनुसार ड्रॉ सिस्टम के जरिए योग्य आवेदकों का चयन करेगी। पोर्टल के ज़रिए किसानों को ऑनलाइन अप्रूवल लेटर जारी किए जाएंगे, जिसके बाद किसान तय समय में डिपार्टमेंट से अप्रूव्ड और पोर्टल में रजिस्टर्ड किसी भी मशीनरी मैन्युफैक्चरर या डीलर से मशीन खरीद सकेंगे। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे स्कीम के तहत अप्लाई करने के लिए एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से लगातार कॉन्टैक्ट बनाए रखें और ज़रूरत पड़ने पर या किसी भी प्रॉब्लम या ज़्यादा जानकारी के लिए एग्रीकल्चर ऑफिस से कॉन्टैक्ट करें। Fazilka News















