कलेसर राष्ट्रीय उद्यान से सटे इलाकों में हाथियों का खतरा बढ़ा, दहशत में किसान

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Pratap Nagar News: हाथी को जंगल में खदेड़ते हुए।

प्रताप नगर (सच कहूँ न्यूज़)। Pratap Nagar News: कलेसर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में इन दिनों जंगली हाथियों का झुंड लगातार सक्रिय है। बीते करीब दस दिनों से हाथियों का यह झुंड आम वाली, टिब्बडियों, अराईयांवाला, कलेसर समेत आसपास के कई गांवों के जंगल और आबादी से सटे खेतों में देखा जा रहा है। किसी भी समय हाथियों के आबादी या किसानों के खेतों का रुख करने की आशंका बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों और किसानों में भय का माहौल है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि जंगल में हाथियों के लिए पर्याप्त पानी, भोजन और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण ये जंगली जानवर आबादी और फसलों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कई जगह हाथियों ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, वहीं रात के समय ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। Pratap Nagar News

किसानों और ग्रामीणों ने वन्य प्राणी विभाग पर लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारी नियमित और प्रभावी ढंग से गश्त करें तो हाथियों से फसलों और जान-माल की रक्षा की जा सकती है। लेकिन आरोप है कि शाम ढलते ही विभागीय कर्मचारी अपने फोन बंद कर कमरों में चले जाते हैं, जिससे रात के समय हाथियों के गांव या खेतों में घुसने की सूचना देने पर समय पर कोई सहायता नहीं मिल पाती।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी निगरानी, चेतावनी प्रणाली और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा जंगल के भीतर पानी के स्रोतों और चारे की कमी भी हाथियों को मानव बस्तियों की ओर खींच रही है। ऐसे में किसानों की मेहनत से उगाई गई फसलें पल भर में नष्ट हो रही हैं, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। Pratap Nagar News

स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग, जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि जंगल में जंगली जानवरों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि वे आबादी की ओर न आएं। साथ ही, हाथियों से प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रात्रि गश्त, त्वरित रिस्पॉन्स टीम और किसानों की फसलों व ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

उधर, इस मामले में वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर लीलू राम ने बताया कि जहां से भी हाथियों या अन्य जंगली जानवरों के आने की सूचना मिलती है, वहां तुरंत कर्मचारियों को भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों द्वारा हाथियों को जंगल की ओर वापस खदेड़ दिया जाता है। उनका कहना है कि जंगल क्षेत्र से सटी फसलों और आबादी में जंगली जानवरों का आना स्वाभाविक है। इंस्पेक्टर लीलू राम के अनुसार, पिछले कई दिनों से टिब्बडियों और आसपास के क्षेत्र में आए हाथियों को कर्मचारियों ने जंगल में वापस भेजा है और वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारी लगातार गश्त कर रहे हैं।

हालांकि, जमीनी हालात और ग्रामीणों की शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि समस्या गंभीर बनी हुई है और स्थायी समाधान के बिना आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।

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