Param Pita Shah Satnam Ji Maharaj: मैं 30 जनवरी 1976 को नागालैंड से अहमदाबाद जाने के लिए रवाना हुआ। वहां से दो दिन का सफर मिल्ट्री गाड़ी में तय करना पड़ा। एक गाड़ी में हम 29 जवान बैठे थे। मैं बैैठा-बैठा सुमिरन कर रहा था। लगभग 12-13 किलोमीटर चलने के बाद हमारी गाड़ी के ब्रेक फेल हो गए। गाड़ी खाई की तरफ जाने लगी। पहाड़ी इलाका होने के कारण खाई कम से कम दो-अढ़ाई हजार फुट गहरी थी। जब गाड़ी एकदम सड़क को छोड़कर खाई में गिरने लगी तो मेरी आंखें बंद हो गई और मुझे कुछ पता नहीं चला कि क्या हो रहा है। गाड़ी पलटे खाती हुई जा रही थी। MSG Bhandara Month
मैंने अपने सतगुरू को याद किया तो मुझे कुछ ऐसा महसूस हुआ कि जैसे मुझे पूजनीय परम पिता जी ने अपनी गोद में ले रखा हो। जब गाड़ी सड़क से 60-65 फुट नीचे जाकर एक वृक्ष के सहारे रूक गई तो मेरी आंखें खुल गई। मैंने देखा कि मुझे खरोंच तक नहीं आई। मैं उसी समय नीचे उतरा और हाथ जोड़कर पूजनीय परम पिता जी का धन्यवाद करने लगा।
गाड़ी में बैठे जवानों की दर्दनाक चीखें सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं और जिनको कम चोट आई, सभी मिलकर घायल जवानों को पीठ पर लाद-लाद कर ऊपर सड़क पर ले आए। जवानों का इतना बुरा हाल था कि देखा नहीं जाता था। हमनें जैसे-तैसे उन्हें अस्पताल पहुंचाया। मैंने पूजनीय परम पिता जी का लाख-लाख धन्यवाद किया।
श्री जिले सिंह फौजी, अहमदाबाद (गुजरात) MSG Bhandara Month















