कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana News: कस्बे में स्थित अल-क़ुरआन अकादमी कैराना के निदेशक मुफ्ती अतहर शम्सी ने हाल ही में घटित हिंसक घटनाओं के संदर्भ में कहा कि भारतीय मुस्लिम समुदाय आज दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक ओर कट्टरपंथ और आतंकवाद, तथा दूसरी ओर उसके कारण फैलता इस्लामोफोबिया, सामाजिक बहिष्कार और सामूहिक संदेह। कुछ व्यक्तियों की हिंसक करतूतों का बोझ पूरे समुदाय पर डाल देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि भारत की साझी संस्कृति के लिए भी ख़तरनाक है। उन्होंने ज़ोर दिया कि कट्टरपंथ से निपटने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति ज़रूरी है।
वैश्विक स्तर पर डी-रेडिकलाइज़ेशन के लिए साझा चार्टर, और देश के भीतर भारतीय इस्लाम की बहुलतावादी, सूफी और अंतर-धार्मिक सह-अस्तित्व की परंपरा को संगठित अभियान के रूप में आगे बढ़ाना समय की ज़रूरत है। धार्मिक संस्थानों, उलेमा, शिक्षाविदों और नागरिक समाज को मिलकर शांति, दया और आपसी सम्मान के संदेश को मज़बूती से फैलाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कट्टरपंथ के विरुद्ध मज़बूत बौद्धिक काउंटर-नैरेटिव अनिवार्य है। इस्लाम की मूल शिक्षाएँ निर्दोषों की हत्या को सख़्ती से मना करती हैं। इस संदेश को शिक्षा, सेमिनार और डिजिटल माध्यमों से स्पष्ट रूप से पहुँचाया जाना चाहिए। परिवार, स्कूल और मस्जिदें युवाओं की सुरक्षा, परामर्श और सकारात्मक गतिविधियों में भागीदारी के ज़रिए अहम भूमिका निभा सकती हैं। Kairana News
मुफ्ती अतहर शम्सी ने कहा कि आतंकवादी घटनाओं के बाद बढ़ने वाला इस्लामोफोबिया सामाजिक एकता को कमज़ोर करता है और कट्टरपंथ को बढ़ावा दे सकता है। इसलिए अन्य समुदायों के साथ संवाद, संवैधानिक अधिकारों की शांतिपूर्ण माँग और सभी तरह की नफ़रत के खिलाफ़ साझा सामाजिक मोर्चा ज़रूरी है। साथ ही, समुदाय के भीतर शिक्षा और संस्थानों में सुधार, आलोचनात्मक सोच, करुणा और सामाजिक ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। अंत में उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक राष्ट्रीय और वैश्विक समस्या है, जिसका समाधान सभी नागरिकों की साझी ज़िम्मेदारी है। भारतीय मुसलमान, अपनी ऐतिहासिक परंपराओं और सामाजिक जुड़ाव के बल पर, शांति, न्याय और सांप्रदायिक सद्भाव को मज़बूत करने में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।
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