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    Punjab Bus Strike: आश्वासन के बाद माने कच्चे कर्मी, खत्म की हड़ताल 

    Patiala News
    फाईल फोटो

    मांगों को लेकर पीआरटीसी व पनबस के कच्चे कर्मियों ने 11 फरवरी को शुरु की थी हड़ताल

    • बस अड्डों पर मची रही अफरा-तफरी, पीआरटीसी और पनबस को करोड़ों का नुकसान
    • कच्चे कर्मचारियों ने बस अड्डों पर किया विरोध प्रदर्शन

    पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)। Punjab Bus Strike News: पीआरटीसी और पनबस के कच्चे कर्मचारियों ने प्रबंधन के साथ हुई बैठक के बाद वीरवार शाम को हड़ताल समाप्त कर दी, जिससे आम लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि लगातार दूसरे दिन भी सरकारी बसों के पहिए जाम रहने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार और पीआरटीसी प्रबंधन के खिलाफ रोष प्रदर्शन भी किया। बसों की हड़ताल के कारण बस अड्डों पर सरकारी बसों को लेकर भारी अव्यवस्था देखने को मिली। विशेष रूप से महिलाओं के बीच बसों में चढ़ने को लेकर धक्का-मुक्की होती रही।

    जानकारी के अनुसार पंजाब रोडवेज पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने संगरूर जेल में बंद अपने साथियों की रिहाई सहित अन्य मांगों को लेकर 11 फरवरी दोपहर से हड़ताल शुरू की थी। दूसरे दिन भी सरकारी बसों की हड़ताल जारी रही, जिसके चलते बस अड्डों पर बहुत कम सरकारी बसें नजर आर्इं। पटियाला बस स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली। आधार कार्ड धारक महिलाएं सरकारी बसों के इंतजार में खड़ी रहीं। हालांकि अधिकांश महिलाओं ने निजी बसों में भी यात्रा की, जिससे निजी बस संचालकों को कुछ राहत मिली। नियमित कर्मचारियों ने कुछ सरकारी बसें चलाई, जो पूरी तरह यात्रियों से भरी हुई थीं। Patiala News

    वहीं यूनियन नेताओं हरकेश कुमार विक्की, सुल्तान सिंह, अतिन्द्र सिंह सहित अन्य नेताओं ने बताया कि आज लगभग 80 प्रतिशत पनबस और पीआरटीसी की बसें बंद रहीं। उन्होंने कहा कि 7 हजार से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं और यही कर्मचारी संस्थानों के लिए राजस्व अर्जित करते हैं। नेताओं ने दावा किया कि डेढ़ दिन में पीआरटीसी और पनबस को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

    नेताओं ने आरोप लगाया कि एक ओर पंजाब सरकार कच्चे कर्मचारियों को पक्का नहीं कर रही और दूसरी ओर अपने अधिकार मांगने वाले कर्मचारियों को जेल में बंद किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में सरकार के साथ दर्जनों बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार मांगों के समाधान का आश्वासन देकर सरकार पीछे हट जाती है। कर्मचारियों को बार-बार हड़ताल करने का कोई शौक नहीं है, बल्कि सरकार की गलत नीतियां उन्हें धरनों और हड़तालों की ओर धकेल रही हैं।

    राजस्व में भारी नुकसान

    इस संबंध में पीआरटीसी के नए चेयरमैन हरपाल जुनेजा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। पीआरटीसी के एक अधिकारी ने बताया कि नियमित कर्मचारियों और अन्य वैकल्पिक प्रबंधों के तहत काफी बसें चलाई गई। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों की जायज मांगों के समाधान की प्रक्रिया जारी है। वहीं एक अन्य अधिकारी ने स्वीकार किया कि हड़ताल के कारण राजस्व को भारी नुकसान हुआ है।

    साथियों की रिहाई और ड्यूटी पर बहाली को लेकर हुई बातचीत: हरकेश विक्की

    यूनियन के प्रदेश नेता हरकेश कुमार विक्की और अन्य नेताओं ने बताया कि शाम को पीआरटीसी और पंजाब रोडवेज प्रबंधन के साथ बैठक के बाद मांगों के समाधान का भरोसा दिया गया। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों को ड्यूटी पर नहीं लगाया गया था, उन्हें ड्यूटी पर बहाल करने पर सहमति बन गई है और इस संबंध में प्रबंधन द्वारा पत्र जारी किया जाएगा। इसके अलावा जेल में बंद साथियों की रिहाई के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन भी दिया गया है। इसके बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई। शाम को कुछ बसें चला दी गईं, जबकि शेष सभी बसें 13 फरवरी की सुबह से सड़कों पर दौड़ना शुरू कर देंगी। PRTC Bus Strike

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