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    रेलवे स्टेशन पर लावारिस मिले बच्चे को कासगंज के परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाया, दादा-पोते के मिलन से भावुक हुआ माहौल

    Bhiwani News
    Bhiwani News: बच्चें को परिजनों को सौंपते सीडब्ल्यूसी के सदस्य। छाया: नितिन।

    6 दिन पहले स्टेशन पर मिला बच्चा दादा को सौंपा, यूपी के कासगंज का निकला परिवार

    भिवानी (सच कहूँ/इंद्रवेश)। Bhiwani News: जिला बाल कल्याण समिति भिवानी ने एक बार फिर एक बिछड़े हुए बच्चे को उसके परिवार से मिलाकर मानवीयता की मिसाल पेश की है। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मिले एक बच्चे को कड़ी मशक्कत के बाद उत्तर प्रदेश के कासगंज में रहने वाले उसके परिजनों तक पहुंचा दिया गया। गुरुवार को बच्चे के दादा भिवानी पहुंचे, जहां कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बच्चा उन्हें सौंप दिया गया। इस बारे में जानकारी देते हुए समिति के सदस्य एडवोकेट धीरज सैनी ने बताया कि 20 मार्च को रेलवे सुरक्षा बल को भिवानी रेलवे स्टेशन पर एक बच्चा लावारिस हालत में मिला था।

    आरपीएफ ने बच्चे को तुरंत बाल कल्याण समिति भिवानी के सुपुर्द किया। बच्चा अपना नाम, पता या घर का रास्ता बताने में पूरी तरह असमर्थ था, जिससे उसकी पहचान करना सीडब्ल्यूसी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई थी। सीडब्ल्यूसी भिवानी के चेयरमैन एडवोकेट प्रदीप सिंह तंवर ने बताया कि जब यह बच्चा हमारे पास लाया गया, तो वह काफी डरा हुआ था, जिसके कारण कुछ भी बोल नहीं पा रहा था। हमने तुरंत राजस्थान और उत्तर प्रदेश की पुलिस के साथ-साथ वहां की स्थानीय सीडब्ल्यूसी इकाइयों से संपर्क साधा। उन्होंने बताया कि हमारा मुख्य उद्देश्य बच्चे को सुरक्षित रखते हुए उसके मूल निवास का पता लगाना था। 20 मार्च से लेकर आज तक बच्चा हमारी देखरेख और संरक्षण में पूरी तरह सुरक्षित रहा। Bhiwani News

    चेयरमैन ने बताया कि निरंतर प्रयासों के बाद 24 मार्च को सफलता मिली। उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के एक परिवार ने बच्चे की पहचान अपने परिजन के रूप में की। इसके बाद फोन के माध्यम से परिवार से संपर्क साधा गया और उन्हें भिवानी बुलाया गया। वीरवार को बच्चे के दादा अपने पोते को लेने भिवानी पहुंचे। जैसे ही दादा-पोते का मिलन हुआ, माहौल भावुक हो गया। चेयरमैन एडवोकेट प्रदीप सिंह तंवर और समिति के अन्य सदस्यों नीलम रानी, दिनेश अत्री, एडवोकेट धीरज सैनी ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्चे को सुरक्षित रूप से उसके दादा के सुपुर्द कर दिया।

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