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    भाजपा को पटखनी देने क्षेत्रीय दलों से गठबंधन की जुगत में कांग्रेस

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    नई दिल्ली (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में हाल के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के खिलाफ संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार की जीत के बाद कांग्रेस आगामी 2019 के आम चुनाव में केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा नीत सरकार को सत्ता से हटाने के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की रणनीित पर विचार कर रही है। विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की उत्सुकता को उसकी पूर्व की ‘एकला चलो’ की नीति में बदलाव के रूप में देखा।

    पार्टी सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीटों पर संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार खड़ा करने की रणनीति की जबरदस्त सफलता के मद्दनेजर कांग्रेस समूचे देश में विभिन्न सीटों पर क्षेत्रीय विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की संभाव्यता पर गौर कर रही है। इसी सप्ताह कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि सभी राज्यों के लिए एक समान रणनीति नहीं हो सकती।

    बहरहाल पार्टी 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा विरोधी मतों को अपनी ओर मिलाने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस करीब 400 लोकसभा सीटों पर क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन की संभावना पर नजर रखे हुए है।इसके अलावा वह इसी साल के अंत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन के लिए विचार कर रही है। इन दोनों राज्यों में वर्तमान में भाजपा की ही सरकारें हैं।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी(बसपा) से गठबंधन की दिशा में काम कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश में चुनाव पूर्व गठबंधन के लिए बसपा प्रमुख मायावती और वरिष्ठ बसपा नेता सतीश मिश्रा से भी बात की है। छत्तीसगढ़ में भी भाजपा के विरोधी मतों को अपने खाते में बटोरने के लिए ऐसे ही गठबंधन का प्रयास किया जा रहा है।