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    मोबाईल इंटरनेट से फैलता ठग्गी का जाल रुकना चाहिए

    Thieving, Internet, RBI

    आरबीआई ने ई-मेल व इंटरनेट से ही रही ठग्गी से देशवासियों को सावधान किया है। बतौर बैंक कुछ जालसाज आरबीआई के अधिकारी बनकर, आरबीआई जैसी ही लैटर पैड व पोर्टल से लोगों को ठग्ग रहे हैं। इसके अलावा एक-दूसरे तरही की साईबर ठग्गी हो रही है, जिसका एक नमूना यहां पेश है मेरा नाम ऐमा सिमोन है और मैं अफ्रीकी देश सुडान में फंसी हूं यहां एक पादरी के पास से मैंने इंटरनेट लेकर आपको मेल किया है। मेरे पिता इंग्लैंड में एक इंजीनियर हैं वहां उनकी मौत हो चुकी है जबकि वह मेरे लिए करोड़ों पौंड छोड़कर गए हैं, जिसे पाने के लिए मुझे आपकी सहायता चाहिए। पैसा मिलने पर इसमें से एक बड़ा हिस्सा में आपको दूंगी। इस तरह कभी सीरिया, कभी ईराक, कभी लीबिया व अन्य किसी अशान्त देश का नाम लेकर ई-मेल के द्वारा ठग्गी हो रही है।

    ई-मेल के अलावा मोबाईल पर भी मोबाईल कम्पनी प्रतिनिधि व बैंक प्रतिनिधि बनकर यह ठग्गी का गिरोह देश में आम आदमी की खून-पसीने की कमाई को बैंक अकाऊंट से चुरा रहा है। इस गिरोह के देश व विदेश में कितने लोग हैं कोई पता नहीं? पुलिस ऐसी धोखाधड़ी में शिकायत लेती है, साईबर सेल जांच करता है परंतु कभी कोई पकड़ा गया हो इसकी कोई खबर नहीं। बैंक भी इस पर पल्ला झाड़ लेते हैं। बड़े पैमाने पर हो रहे इस अपराध को रोकने के लिए केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकारें अभी तक कोई विशेष आॅप्रेशन शुरु नहीं कर सकी।

    सबसे दु:खद बात यह है कि साईबर ठग्गी करने वाले ये ठग्ग बैंक खातों से धन उड़ा रहे हैं यहां कि कोई अपने पैसे को सबसे अधिक सुरक्षित समझता है। इस तरह हो रही ठग्गी से निपटने के लिए प्रशासन, बैंकों द्वारा सतत अभियान चलाना होगा, जो नागरिकों को जानकारी दे कि वह दस रूपये भी बिना मेहनत लालच न करें ताकि कोई जालसाज उनसे ठग्गी न कर सके।

    जो अनजाने में अपने कार्ड का पिन या मोबाईल ओटीपी बता बैठते हैं उनके लिए भी जागरूकता को प्रभावी बनाया जाए। जिस तेजी से आमजन फोन व इंटरनेट के प्रति जागरूक होगा उतनी ही तेजी से साईबर ठग्गी के क्राईम रूकेंगे। पुलिस प्रशासन, जांच एजेंसीज को भी उन्नत तकनीकी से दक्ष बनाया जाए।

    जब तक पुलिस की तकनीकी दक्षता ठग्गों से श्रेष्ठ नहीं होगी साईबर ठग्गी के अपराधी बचते रहेंगे व देशवासियों को ठगते रहेंगे। आरबीआई ने उसके स्वयं के नाम से हो रही ठग्गी प्रति तो जागरूक ता फैलाई है,अच्छा हो यदि ई-मेल से व मोबाईल से हो रही अन्य तरह की ठग्गी से भी आरबीआई बचाए।

     

     

     

     

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