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    खूनी हुआ बठिंडा हाईवे, पिछले पांच सालों में उजड़ गए एक हजार परिवार

    Bathinda Highway
    बठिंडा बठिंडा -जीरकपुर सड़क पर घटे हादसो की फाइल तसवीर

    बठिंडा(अशोक वर्मा)। बेलगाम रफ़्तार व यातायात नियमों की पालना न करने के कारण बठिंडा पट्टी की सड़कों पर मानवीय जिंदगी का मौत के मुंह में जाना जारी है। हालांकि सरकार ने इस क्षेत्र की सड़कों को चहुं-मार्गीय बना दिया है हैं परंतु सड़क पर किंग बनकर चलने की मानसिकता के कारण अधिकतर सड़कें लोगों के खून की प्यासी बन गई हैं।

    शुक्रवार देर शाम को जिला बठिंडा (Bathinda Highway) के गांव भागीवांदर के पास हुए भयानक हादसे जिसमें दो पिता पुत्र व एक अन्य की मौत हो गई थी ने वास्तविकता से पर्दा उठा दिया है।

    विवरणों अनुसार पिछले पांच सालों दौरान बठिंडा जिले में करीब एक हजार लोगों की मौत हो चुकी है जबकि बड़ी संख्या लोग दिव्यांगों जैसी जिंदगी व्यतीत करने के लिए मजबूर हैं। पुलिस सूत्रों मुताबिक बीते दो सालों दौरान पंजाब में हादसों में 10 प्रतिशत विस्तार हुआ है।

    पुलिस अनुसार वाहनों की संख्या बढ़ने और ट्रैफिक नियमों प्रति असावधानी इसका मुख्य कारण हैं। पुलिस का मानना है कि अधिकतर हादसे नशों का प्रयोग के बाद अंधाधुन्ध गाड़ियां चलाने के कारण घटित होते हैं।

    पुलिस अनुसार कारें सब से अधिक हादसों का शिकार हुई हैं। इसके बाद बसों में पाबंदियों के बाद क्षमता अधिक सवारियां व तेज रफ़्तार के साथ चलाए जाते मोटर साइकिलों का नंबर है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि वाहनों में हुए वृद्धि मुताबिक सही तकनीक और योजनाबद्ध ढंग के साथ सड़कों का निर्माण तो हो गया परंतु लोगों ने नियमों की पालना नहीं करना सीखा, जिस कारण भी हादसे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों को चौड़ा करना इस समस्या का हल नहीं है बल्कि जरूरत अनुसार ‘ओवरटेक जोन’ बनाने और ट्रैफिक पुलिस कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए।

    जिले में एक दर्जन के करीब खतरनाक एक्सीडेंट प्वार्इंट हैं, जिनमें से दो तीन ऐसे स्थान हैं जहां पलक झपकते ही हादसा घटित होना आम बात है। वैसे जिले के देहाती क्षेत्र में खतरनाक एक्सीडेंट प्वार्इंट कम हैं जो अच्छी बात है पुलिस के लिए बड़ी समस्या स्पीड मापने के लिए रेडार का न होना है। यही कारण है कि तेज रफ्तार वाहन चालकों पर काबू नहीं पाया जा सका है।

    सरकारी बस के चालक अवतार सिंह का कहना था कि पुलिस चालकों को इंसानी जिंदगी की महत्तता बताकर सड़क हादसे रोकने का पाठ पढ़ाती नहीं थकती, परंतु मोटरसाईकलों और स्टंट करते लड़कों व तेज रफ़्तार कारों के मालिकों को कौन शिक्षा देगा, यह याद नहीं रखती है।

    उन्होंने कहा कि पुलिस कानून लागू करने में फेल रही है क्योंकि बड़े घरों की बसें सड़कों पर दौड़ती हैं उनको रोकने की कोई जुर्रत नहीं करता है।

    हादसों का कारण तेज रफतार | Bathinda Highway

    सहारा जन सेवा के अध्यक्ष विजय गोयल का कहना था कि 90 प्रतिशत सड़क हादसों का मुख्य कारण तेज रफ़्तार होती है उन्होंने कहा कि यदि लोग रफ़्तार को काबू में रखें तो अधिक हादसे घटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोग ट्रैफिक नियमों की पालना करें व नशे त्यागें तो भी सड़कों पर मौतों की दर कम की जा सकती है।

    सीनियर कप्तान पुलिस डॉ. नानक सिंह का कहना था कि हादसों के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताना सही नहीं है, वाहन चालक भी यातायात के नियमों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरी तरह चौकस है और हर मसले पर बाकायदा कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि यदि कोई भी कमी उनके ध्यान में लाई जायेगी तो उसे भी दूर किया जाएगा। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि अपना फर्ज समझ कर यातायात नियमों की पालना करें।

    वास्तविकता पहचाने प्रशासन | Bathinda Highway

    सामाजिक कार्यकर्ता गुरविन्दर शर्मा का कहना था कि प्रशासन वास्तविकता पहचाने और बिना कागज पत्र से वाहन चलाने वालों पर नकेल कसे। उन्होंने कहा कि लोगों को खतरनाक ड्राइविंग करने से रोकने के लिए तरीके निकाले जाएं तो भी हादसों पर लगाम लग सकेगी।

    उन्होंने कहा कि खुद को ‘किंग’ समझने वाली मानसिकता भी त्यागनी होगी क्योंकि सड़क पर साइकिल सवार को चलने का उतना ही हक है, जितना किसी ओर वाहन चालक को। उन्होंने कहा कि और अधिक खतरे वाले स्थानों पर पुलिस की दिन रात तैनाती ती भी करनी चाहिए।

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