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Tuesday, January 20, 2026
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    लक्खासिंह हत्याकांड के गवाहों पर फायरिंग

    Firing on witnesses of Lakhkasinh assassination

    दो बाइक पर सवार होकर आए तीन-चार जनों ने की फायरिंग

    • फायरिंग कर हुए फरार, बाल-बाल बचा लखासिंह का पुत्र
    • 23 नवंबर 2016 को बाबा लखासिंह की गोलियों से भूनकर कर दी थी हत्या

    हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। खुद को गुरुनानक देव का अवतार बताने वाले बाबा लक्खासिंह की नवंबर 2016 में गोलियों से भूनकर हत्या करने के मामले में गवाहों पर सोमवार अल सुबह फायरिंग हो गई। दो मोटर साइकिलों पर सवार होकर हथियारों से लैस होकर आए 3-4 अज्ञात जनों ने लक्खासिंह की चक आठ एलएलडब्ल्यू स्थित ढाणी में ताबड़तोड़ फायरिंग की। गनिमत रही कि फायरिंग के समय हत्याकांड का गवाह उसका पुत्र कमरे में सो रहा था।

    वहीं दूसरा गवाह उसका पिता पंजाब गया हुआ था। फायरिंग करने के तुरंत बाद बाइक सवार अज्ञात जने मौके से भाग गए। उधर, फायरिंग से आसपास के क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मौका मुआयना किया। इस संबंध में जंक्शन थाने में बाइक सवार 3-4 अज्ञात जनों के खिलाफ हत्या का प्रयास व आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज हुआ है। पुलिस के अनुसार गुरजीत सिंह पुत्र लक्खा सिंह निवासी चक आठ एलएलडब्ल्यू नवां ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि उसके पिता लक्खासिंह पुत्र गुलाब सिंह का 23 नवंबर 2016 को कत्ल हो गया था। यह मामला अदालत में चल रहा है। इस मामले में वह तथा उसके दादाजी गुलाब सिंह गवाह हैं। अदालत की ओर से गवाह को तलब किया गया है। इसी वजह से गवाह को धमकाने व जान से मारने के उद्देश्य से सोमवार अल सुबह 3 बजकर 50 मिनट पर दो मोटर साइकिलों पर 3-4 जने सवार होकर हथियारों से लैस होकर ढाणी में आए और फायरिंग शुरू कर दी।

    फायरिंग के समय वह कमरे में सो रहा था। उस समय आंगन में कोई नहीं था। वहीं संयोगवश उसके दादाजी गुलाब सिंह ढाणी में नहीं थे। वे पंजाब गए हुए थे। फायर कमरों के शीशे पर आकर लगे। फायरिंग कर अज्ञात हमलावर मोटर साइकिलों पर सवार होकर फरार हो गए। पुलिस ने अज्ञात जनों के खिलाफ भादंसं की धारा 307, 458, 195ए, 34 के अलावा 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। जांच थाना प्रभारी अरविन्द भारद्वाज कर रहे हैं। उधर, वारदात के बाद पुलिस अधिकारी चक आठ एलएलडब्ल्यू पहुंचे तथा हमलावरों की धरपकड़ के लिए आसपास के क्षेत्र में नाकाबंदी करवाई। हमलावरों का कोई पता नहीं लग पाया था।