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    बगावत के जुर्म में अंग्रेजों ने अब्बू सिंह को दी थी फांसी

    Shaheed Thakur Abbu Singh

    162वीं पुण्य तिथि पर सोमवार को विधायक जरावता पहुंचेंगे

    (Shaheed Thakur Abbu Singh)

    • परिजनों को शव तक नहीं दिया
    • सोहना के पहाड़ पर 16 दिसम्बर 1857 को दी गई थी फांसी
    • शहीद ठाकुर अब्बू सिंह की 162वीं पुण्यतिथि पर विशेष
    • जिला के सबसे बड़े गांव बोहड़ाकला में है अब्बू सिंह की प्रतिमा
    • 156 वर्ष के बाद रखी गई थी स्मारक की आधारशिला

    संजय कुमार मेहरा गुरुग्राम। जांबाजी के लिए राजपूत योद्धा 1857 के (Shaheed Thakur Abbu Singh) शहीद ठाकुर अब्बू सिंह का नाम ही काफी है। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ खुलकर बगावत की थी। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर उन्होंने 1857 में अग्रेंजी हुकुमत के दांत खट्टे किये थे। कल उनकी 162वीं पुण्यतिथि है।  गुरुग्राम जिला के सबसे बड़े गांव बोहड़़ाकलां में जन्में अब्बू सिंह बचपन से ही क्रांतिकारी की तरह सक्रिय रहते थे। उनमें अंग्रेजी हुकुमत से आजादी का जज्बा कुट-कुट कर •ारा हुआ था। ठाकुर अब्बू सिंह का विवाह राठीवास ठेठर की झिम्माबाई के साथ हुआ था।

    झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ 1857 में अब्बू सिंह ने अंगे्रेजों के छक्के छुड़ाये (Shaheed Thakur Abbu Singh)

    अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ बगावत के जुर्म के आरोप का मुकदमें में फांसी की सजा सुना दी गई। अंग्रेजी हुकुमत से बगावत के जुर्म में मजिस्ट्रेट लार्ड क्रिनिंग की अदालत के निर्देश पर विलियम फोर्ट मजिस्ट्रेट के सामने सोहना के पहाड़ पर सरेआम 16 दिसम्बर 1857 में ठाकुर अब्बू सिंह को फांसी दी गई। फांसी के बाद अब्बू सिंह का शव भी परिजनों को नहीं सौंपा गया था। गांव बिनौला में ठाकुर अब्बू सिंह की जमीन को अंग्रेजी हुकुमत ने जब्त कर लिया और फांसी दिए जाने के करीब आठ साल बाद अंग्रेजी हुकुमत ने जमीन को नीलाम कर दिया।

    शहीद स्मारक में नहीं दिखाई किसी ने दिलचस्पी (Shaheed Thakur Abbu Singh)

    बोहड़ाकला में बिनौला के सबसे बड़े बिस्वेदार रहे अब्बू सिंह की पांचवीं पीढ़ी के वंशज ठाकुर देशराज ने अपने जीते जी शहीद अब्बू सिंह के स्मारक के लिए देश के पीएम रहे वीपी सिंह से लेकर हालिया राजनेताओं सहित शासन-प्रशासन की चौखट पर गुहार लगाई। लेकिन किसी ने भी यहां स्मारक का निर्माण नहीं कराया। अब्बू सिंह के शहीद स्मारक की तमाम फाईलें धूल के गर्त और आश्वासनों के बोझ तले दबकर दम तोड़ चुकी हैं।

    मंथन जन सेवा समिति ने बनवाया शहीद स्मारक

    शहीद अब्बू सिंह के वशंज देशराज के देहावसान के बाद में मंथन जन सेवा समिति के अध्यक्ष आरपी सिंह चौहान ने अब्बू सिंह के शहीद स्मारक बनवाने के साथ ही प्रतिमा, सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई गई जमीन पर स्थापित करने का बीड़ा उठाया। स्मारक का शिलान्यास पूर्व मंत्री आफताब अहमद के हाथों कराया गया। मंथन जन सेवा समिति ने अपने संसाधनों सहित समाज के सहयोग से वर्ष 2014 में शहीद अब्बू सिंह की प्रतिमा स्थापित करके राजपूताना शौर्य, जीवट, राष्ट्र•ाक्ति सहित स्वयं के बलिदान के गौरव को पुन: जिंदा कर दिखाया। तमाम राजनेताओं, सरकार और राष्ट्रप्रेमियों के साथ-साथ शहीदों के सम्मान की हितकारी संस्थाओं के सामने शहीदों के सम्मान की चुनौती की है कि अहीरवाल में आखिर राजपूत शहीद अब्बू सिंह की उपेक्षा क्यों होती आ रही है।

    शहीद अब्बू सिंह की प्रतिमा से खड़ग गायब

    • इतने लंबे अंतराल के बाद एक तो किसी ने उनकी प्रतिमा बनवाने का बीड़ा उठाया
    •  बेहतरीन प्रतिमा बनवाकर शहीद स्मारक का निर्माण कराया।
    • अब शरारती तत्वों ने इस प्रतिमा को क्षति पहुंचाई है।
    • शहीद अब्बू सिंह के घोड़े पर बैठे की इस प्रतिमा में से शहीद अब्बू सिंह के हाथ से खडग गायब है।
    • यानी उसे किसी ने तोड़ दिया है।
    • यह शहीद का अपमान है। क्षेत्र के लोगों में इससे रोष भी है।

     

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