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    धार्मिक स्थलों पर हमेशा एकचित्त, एकमन होकर सुनें : पूज्य गुरु जी

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    बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा (यूपी) से आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से रूहानी वचनों की वर्षा करते हुए निहाल किया। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि मेडिटेशन में बड़ी शक्ति है, मेडिटेशन में बड़ी ताकत है। अगर कोई सही ढंग से गुरुमंत्र का जाप करे। ढंग यही है कि अगर बैठकर करो तो सिर्फ और सिर्फ गुरुमंत्र का ही जाप करो। चाहे पाँच मिनट, 10-15 मिनट। सत्संग सुनने आए हो तो सिर्फ सत्संग सुनो। राम-नाम की चर्चा सुनो, इधर-उधर की बातें, तूं एं क्यों हो गई, तूं एं क्यों बैठा है, ये चीजें करने में टाइम गुजार दोगे और फकीर जो समझाने जा रहे हैं उससे आप खाली रह जाओगे। वो कहते हैं ना चिकना घड़ा, बरसात हुई भी लेकिन बूंद एक ना ठहरी और जो थोड़े से कोरे घड़े होते हैं तो जब वो पानी में हैं पानी को अंदर तक भी ले जाते हैं।

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    तो ये आपके ऊपर है, आपने बतियाते ही रहना है तो आप चिकने घड़े हैं। आपके अंदर नहीं जा रहा है ज्ञान कुछ भी। कहां से आप चलकर आते हो, कितना समय निकालते हो राम-नाम के लिए या आप सत्संग में कहीं भी जाते हो, मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा, राम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड का नाम लेने पहुंचे हो, उसकी भक्ति करने पहुंचे हो, वहां भी बातें। इधर हो जा, उधर हो जा, ये नहीं, वो नहीं, फलां नहीं। क्या? पैसा लगाया, कितनी दूर चले, वहां पहुंचे, लेकिन बैठे थे परमात्मा की बात सुनने और लगे रहे अपनी चुगलियों में, अपनी बातों में, एक-दूसरे के कपड़े देखने में। अच्छा उसने कैसे पहने हैं? ऊंह, ये तो नहीं काम के, तूने क्या टिंडसी लेनी है भाई। अगले के पैसे, अगले के कपड़े, अगला पहनकर आया, तुझे तकलीफ क्यों? तो ये चलता है, बिना वजह। अरे सत्संग सुनने आए हो, पाक-पवित्र जगहों पर पधारे हो। वहां ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु का नाम चल रहा है। हमारे महापुरुषों के, गुरु साहिबान, पीर-पैगम्बरों के पवित्र वचन, जो 100 क्या लाख पर्सेंट सच्चे हैं वो चल रहे हैं। अरे सुनो, ज़िंदगी में बहारें आ जाएंगी।

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इसलिए हम कहते होते हैं कि चुप करके बैठा करो। कभी भी, कहीं भी धार्मिक जगह पर जाओ, सत्संग सुनो, महापुरुषों के वचन सुनो, पीर-फकीरों के वचन सुनो। सभी धर्मों में, पवित्र ग्रन्थों में, सारी पवित्र गुरबाणी दर्ज है, सभी धर्मों में। उसको सुनोगे तभी दिमाग में कुछ घुसेगा। चिकने घड़े मत बनो। सीधे घड़े बनो, उल्टे घड़े नहीं। सीधा है तो अमृत भी बरसेगा तो भर जाएगा और उल्टा है तो कुछ भी बरसता रहे रत्ती भर अंदर नहीं जाता। तो इसलिए गुरुमंत्र, राम का नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, ख़ुदा, रब्ब का नाम जहां भी धार्मिक पाक-पवित्र जगहों पर जब लिया जाता हो तो एकचित्त, एकमन होकर सुना करो।

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सारी ज़िंदगी खाते-पीते रहे हो। अगर थोड़ी सी देर के लिए मान लीजिये कहीं पानी न पहुंच पाया, मान लीजिये कोई चीज नहीं पहुंच पाई। क्या फर्क पड़ता है। थोड़ी गर्मी लग गई, क्या पता इससे जन्मों-जन्मों की गर्मी निकल जाए। जब संत, गुरु, महापुरुष, पीर-पैगम्बरों के वचन सुनोगे ऐसी पवित्र जगहों पर जाकर। तो जब भी आप किसी भी धार्मिक जगह पर धर्म की चर्चा सुनने जाओ एकचित्त, एकमन होकर सुनो, ताकि दिलोदिमाग में राम-नाम की बात बैठ जाए और ज़िंदगी का जो ट्रैक है आपका, वो साफ-सुथरा हो जाए और सुखमय जीवन जीवन आप जी पाएं।

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