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Saturday, February 28, 2026
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    Headache Treatment: कहीं आप भी हर व्यक्ति के जीवन में होने वाले ‘शिरोरोग’ से तो परेशान नहीं! जानें प्रकार, लक्षण और समाधान

    Headache Treatment
    Headache Treatment: कहीं आप भी हर व्यक्ति के जीवन में होने वाले 'शिरोरोग' से तो परेशान नहीं! जानें प्रकार, लक्षण और समाधान

    What is Headache: नई दिल्ली। सिरदर्द, जिसे आयुर्वेद में शिरोरोग कहा जाता है, एक सामान्य किन्तु अत्यंत कष्टकारी समस्या है। लगभग हर व्यक्ति जीवन के किसी न किसी चरण में इसका अनुभव करता है। यह कभी हल्के रूप में आता है और कभी लगातार बना रहकर जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने लगता है। Headache Treatment

    आयुर्वेद ग्रंथों में शिरोरोग को स्वतंत्र रोग के रूप में वर्णित किया गया है। सुश्रुत संहिता के अनुसार शिरोरोग पाँच प्रकार का होता है—वातज, पित्तज, कफज, त्रिदोषज और कृमिज। चरक संहिता में भी इनका उल्लेख मिलता है और माना गया है कि इनकी उत्पत्ति मुख्यतः त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन से होती है। कई बार इसका संबंध पाचन तंत्र की गड़बड़ियों से भी होता है।

    1. वातज सिरदर्द | Headache Treatment

    मानसिक थकान, नींद की कमी, चिंता और कब्ज के कारण उत्पन्न होता है। इसमें सिर में तीव्र दर्द होता है, जो प्रायः रात में बढ़ जाता है।
    उपचार: तैल मालिश, घी अथवा दूध जैसी स्निग्ध और गरम वस्तुओं का सेवन लाभकारी होता है।

    2. पित्तज सिरदर्द

    इसमें सिर में जलन, आंखों में गर्मी, अधिक प्यास और चिड़चिड़ापन दिखाई देता है।
    उपचार: शीतल लेप (जैसे चंदन), ठंडे पेय व विश्राम लाभदायक हैं।

    3. कफज सिरदर्द

    इसमें भारीपन, नींद अधिक आना, नाक बंद होना और आलस्य जैसे लक्षण होते हैं। यह अक्सर सर्दी, नमी या कफवर्धक आहार से बढ़ता है।
    उपचार: नस्य कर्म (नाक में औषधि), धूमपान (औषधीय धूम्र), भाप लेना और कफनाशक औषधियों का सेवन उपयोगी है।

    4. अर्धावभेदक (माइग्रेन)

    सुश्रुत संहिता में वर्णित यह रोग आधुनिक समय में माइग्रेन जैसा माना जाता है। इसमें सिर के केवल एक ओर तीव्र, चुभनभरा दर्द होता है और व्यक्ति प्रकाश या ध्वनि के प्रति संवेदनशील हो जाता है। इसका कारण वात और पित्त दोष की प्रधानता है।
    उपचार: नेस्य क्रिया, शिरोधारा (पंचकर्म), विश्राम तथा मानसिक शांति देने वाले उपचार उपयोगी बताए गए हैं।

    5. त्रिदोषज व कृमिज सिरदर्द

    त्रिदोषज सिरदर्द तीनों दोषों के असंतुलन से होता है और अक्सर दीर्घकालिक होता है। कृमिज प्रकार आंतों या शरीर में परजीवियों की वृद्धि से संबंधित माना गया है। Types of headache in Ayurveda

    चरक संहिता में शिरोरोग से राहत के लिए शीतल लेप, शुद्ध घी व दूध का सेवन, त्रिफला जैसे रसायन और स्वच्छ वातावरण में विश्राम करने की सलाह दी गई है। वहीं सुश्रुत संहिता पुरानी अवस्था में पंचकर्म जैसे शोधन उपचारों को आवश्यक मानती है। Headache Treatment