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    मई महीने के भंडारे ने रच दिया इतिहास | Barnava Naamcharcha

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    बरनावा नामचर्चा में उपस्थित साध-संगत
    • उत्तर प्रदेश की साध-संगत ने धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया सत्संग भंडारा
    •  पक्षी उद्धार मुहिम के तहत बांटे 175 मिट्टी के सकोरे
    •  75 परिवारों को राशन और 75 जरूरतमंद बच्चों को दिए वस्त्र

    बरनावा (रकम सिंह)। शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा में रविवार (Barnava Naamcharcha) को मई महीने का सत्संग भंडारा उत्तर प्रदेश की साध-संगत द्वारा बड़ी धूम-धाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पावन भंडारे के अवसर पर आयोजित नामचर्चा में बड़ी तादाद में साध-संगत ने भाग लिया। इस अवसर पर उमड़ी साध-संगत के जोश, जुनून, अटूट विश्वास और अथाह श्रद्धा के सामने प्रबंधन द्वारा किए गए सारे प्रबंध छोटे पड़ गए और नामचर्चा की समाप्ति तक साध-संगत का अनवरत आना जारी रहा। पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए इस अवसर पर डेरा सच्चा सौदा द्वारा किए जा रहे 157 मानवता भलाई कार्यों को गति देते हुए गर्मी के मौसम को देखते हुए पक्षी उद्धार मुहिम के तहत बेजुबान पक्षियों के लिए चोगा-पानी के प्रबंध करने के लिए 175 मिट्टी के सकोरे बांटे गए।

    जिन्हें साध-संगत अपने घरों, प्रतिष्ठानों पर व सड़क किनारे वृक्षों पर लटकाएगी और उनमें नियमित रूप से दाना-पानी डालेगी। इसके अलावा फूड बैंक मुहिम के तहत 75 जरूरतमंद परिवारों को राशन तथा क्लॉथ बैंक मुहिम के तहत 75 जरूरतमंद बच्चों को वस्त्र बांटे गए। नामचर्चा कार्यक्रम के दौरान 29 अप्रैल को पूज्य गुरु जी द्वारा भेजी गई 15वीं रूहानी चिट्ठी पढ़कर सुनाई गई, जिसे साध-संगत ने पूरी श्रद्धाभाव से सुना।

    जिक्रयोग है कि बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने 29 अप्रैल 1948 को डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की और इसके पश्चात मई महीने में पहला सत्संग फरमाया था। इसलिए मई महीने को डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत पूज्य गुरु जी की शिक्षाओं पर चलते हुए सत्संग माह भंडारे के रूप में मना रही है और रविवार को उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की साध-संगत ने इसे सत्संग भंडारे के रूप में मनाया है। पूजनीय साईं जी, परम पिता शाह सतनाम जी महाराज और वर्तमान में पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन सान्निधय में रूहानियत के इस सच्चे दर से जुड़कर करोड़ों लोग नशे व सामाजिक बुराईयां छोड़ चुके हैं।

    रविवार को सुबह 11 बजे धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा का पवित्र व इलाही नारा बोलकर शुभ भंडारे की नामचर्चा की शुरूआत की गई। इसके पश्चात कविराजों ने सुंदर भजनवाणी के माध्यम से सतगुरु की महिमा का गुणगान किया। बाद में नामचर्चा पंडाल में लगाई गई बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीनों के माध्यम से पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने रिकॉर्डिड वचनों के माध्यम से उपस्थित साध-संगत को अपने वचनों से निहाल किया। इससे पूर्व उपस्थित साध-संगत ने धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा का पवित्र नारा लगाकर पूज्य गुरू जी को सत्संग भंडारे की बधाई दी।

    इस अवसर पर उपस्थित साध-संगत को संबोधित करते हुए पूज्य गुरु जी ने कहा कि जो हमारे पाक-पवित्र ग्रंथ, वेद है। उनमें आदिकाल से लिखा है कि पहले चार आश्रम बनाए गए थे। उनमें है ब्रह्मचर्य,गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम थे। उनको बनाने वाले महावैज्ञानिक थे। आज विज्ञान की नजर से देखे तो इन्होंने इंसान को बहुत कुछ दिया है। इंसान अगर ब्रहमचर्य का पालन करता है तो उसके अंदर विल पॉवर आती है और इंसान की सोचने की शक्ति बढ़ती है। पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि जब इंसान के विचार काबू में नहीं होते तो उनका डीएनए भी कमजोर हो जाता है। डीएनए मजबूत करने के लिए इंसान को लगातार प्रभु का सुमिरन करना चाहिए। इंसान को सदा पॉजिटिविटी सोच रखनी चाहिए। संतों का काम सदा सबका भला करना और भला मांगना ही होता है। संत कभी किसी के लिए बुरा नहीं मांगते। इंसान के शरीर को 84 लाख शरीरों में सर्वोत्तम माना गया है।

    पक्षी उद्धार मुहिम डॉक्यूमेंट्री से पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने के लिए किया जागरूक Barnava Naamcharcha

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    डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत मानव हित में 157 मानवता भलाई के कार्य कर रही हैं। इन्हीं कार्यों में से एक कार्य है पक्षी उद्धार मुहिम। जिसके तहत साध-संगत अपने-अपने घरों, प्रतिष्ठानों की छतों पर पक्षियों के लिए दानी पानी रखती है। पक्षियों के लिए मिट्टी के सकोरे रखती है। बेजुबानों की मदद के लिए लोगों में जागरूक लाने के लिए एक एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से आमजन को भी पक्षियों के लिए चोगा-पानी का प्रबंध करने के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान साध-संगत ने पक्षियों के लिए चोगा-पानी रखने का संकल्प लिया।

    पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां देश को नशा मुक्त बनाने के लिए निरंतर जुटे हुए है। समाज को नशा मुक्त करने के लिए पूज्य गुरु जी ने डेप्थ मुहिम के अलावा अनेक सॉन्ग के माध्यम से लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। नामचर्चा कार्यक्रम के दौरान पूज्य गुरु जी द्वारा गाया गया भजन आशीर्वाद माओं का… व देश की जवानी… चलाया गया। जिस पर साध-संगत ने नाच गाकर खुशियां मनाई। इन शब्दों को देश-विदेश में खूब पसंद किया जा रहा है और अब तक दोनों सॉन्ग को 28 मिलियन से अधिक लोग देख चुके है।

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    नामचर्चा कार्यक्रम में कविराजों ने अनेक शब्दवाणी के माध्यम से सतगुरु की महिमा का गुणगान किया। इस दौरान कविराजों ने लिए जा प्रभु का नाम लिए जा अमृत रस घूंट पिए जा.., प्रेम नशे की जिसे चढ़ जाए खुमारी है., कभी तेरे चरनन ना छोड़ेंगे हम…., सतगुरु जी प्रेम तेरा बड़भागी जीव पावे…..व असां तैनू रब मनया भजनों के माध्यम से साध-संगत को निहाल किया।

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