हमसे जुड़े

Follow us

21.4 C
Chandigarh
Monday, March 30, 2026
More
    Home देश कोरोना से जीत...

    कोरोना से जीती जंग, बोली-घबराएं नहीं, सरकार व चिकित्सकों की सलाह मानें’

    Corona

    सच कहूँ से विशेष बातचीत: महिला ने उपचार के दौरान हुए अनुभव किए साझा

    (Defeated Corona)

    •  चिकित्सकों ने बढ़ाया हौंसला, दवाइयों के साथ दिया पौष्टिक आहार

    सच कहूँ/संदीप सिंहमार।  वर्तमान में भय का पर्याय बनी वैश्विक महामारी कोविड-19 कोरोना वायरस से जहां भारत के ही नहीं बल्कि विश्व भर के लोग भयभीत हैं। वहीं कोरोना का दर्द झेलकर ठीक होकर अपने घर लौटी हिसार के सेक्टर 16-17 निवासी महिला ने लोगों से जागरूक रहने व सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है। कोरोनावायरस से जंग जीतने के बाद दूरभाष पर सच कहूँ से विशेष बातचीत में महिला ने अपने उन पीड़ादायक दिनों के अनुभव सांझे किए, जिनमें वह क्वारन्टीन से लेकर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आइसोलेशन वार्ड में चिकित्सकों की निगरानी में रही। घर लौटने के बाद महिला के साथ हुई बातचीत के दौरान किए गए सवाल जवाब यहां दिए जा रहे हैं ताकि क्वारंटाइन, आईसोलेशन व चिकिसा प्रक्रिया को आमजन समझकर अपने मन से भय निकाल सके।

    सवाल: आप वायरस से संक्रमित कैसे हुए?

    जवाब: बेटा अमेरिका में रहता है। मैं अपने पति के साथ अमेरिका गई थी। 6 महीने अमेरिका रहने के बाद 19 मार्च को ही हम हिसार लौटे थे। यहां आने के बाद जिला प्रशासन व चिकित्सकों की सलाह अनुसार अपने घर में ही क्वारंटाइन किया गया। क्वारंटाइन के दौरान हमने पूरी समझदारी से सोशल डिस्टेंसिंग का बेहतर ढंग से पालन किया। इसी बीच मुझे बुखार हो गया। एक सप्ताह तक बुखार ठीक नहीं हुआ तो चिकित्सकों की सलाह अनुसार सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया। 30 मार्च को कोरोनावायरस होने की पुष्टि हो गई।

    तब उसे तुरंत उपचार के लिए पहले हिसार के सामान्य अस्पताल और फिर अलावा मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया। उसी दिन मेरे पति को भी आइसोलेट किया गया। लेकिन अच्छा यह हुआ कि हमारी सोशल डिस्टेंसिंग के कारण ही पति की रिपोर्ट नेगेटिव आई। उनका मानना है यदि सरकार व चिकित्सकों की सलाह मानी जाए तो संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है, जैसा हमने किया। हमारी सावधानी से परिवार रिश्तेदार व आसपास के सभी लोग स्वस्थ हैं।

    सवाल: पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद आप घबराएं या नहीं?

    जवाब : घबराहट किस बात की। मैं बिल्कुल भी नहीं घबराई। मुझे सरकार, प्रशासन व चिकित्सकों पर पूरा भरोसा था कि मैं जल्द ही स्वस्थ हो जाऊंगी। 6 महीने अमेरिका में बिताने के कारण खानपान में बदलाव से इम्यूनिटी पावर कमजोर हो गई थी। यदि मैं इस दौरान हिसार में होती तो कोरोनावायरस से पीड़ित ही नहीं होती। फिर भी कोरोनावायरस से पीड़ित होने के बावजूद भी चिकित्सकों की सलाह व निर्देशन में मैंने डटकर मुकाबला किया और आज स्वस्थ होकर आपके बीच में हूँ।

    सवाल : उपचार के दौरान चिकित्सकों का कितना सहयोग मिला?

    जवाब : कोरोना वायरस की पुष्टि होने के बाद जब उसे उपचार के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया तो मुझे यह लगा यहां घर से भी ज्यादा मेरी देखभाल की जा रही थी। वार्ड में तैनात चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने समय पर दवाइयां देने के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी दिया। मुझे पूरे एक सप्ताह तक चिकित्सकों का इतना प्यार मिला, जिससे मेरा हौंसला बना रहा। इस दौरान चिकित्सकों ने किसी भी सूरत में मनोबल टूटने नहीं दिया। अस्पताल में जब उसे यह बताया गया कि उसकी कोरोनावायरस की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई है तो मनोबल और ज्यादा बढ़ गया। यही वजह रही बेहतर उपचार पौष्टिक आहार व चिकित्सकों की काउंसलिंग के कारण जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौटी।

    सवाल : कोरोना वायरस से डरे लोगों को आप क्या कहना चाहेंगी?

    जवाब : वर्तमान समय में कोरोनावायरस से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है। यदि सरकार व स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का सही ढंग से पालन किया जाए तो कोरोनावायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है। फिर भी यदि कोई किसी भी वजह से कोरोनावायरस से पीड़ित हो भी जाता है तो वह व्यक्ति अपने मन में किसी भी प्रकार का भय या वहम ना पाले। बल्कि चिकिसकों की निगरानी में रहते हुए दवाइयों का सेवन करते हुए पूरा आहार लें। कोविड-19 में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड से भी किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है बल्कि वहां भी हम सबके लिए बहुत अच्छे ढंग से व्यवस्था की गई है।

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।