अंतिम इच्छा पूरी करते हुए परिजनों ने पार्थिव देह मेडिकल शोध हेतु दान की
Body Donation: सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। शिक्षा विभाग पंजाब से सेवानिवृत्त एवं डेरा सच्चा सौदा से करीब 60 वर्षों से जुड़े अनथक सेवादार, मासिक पत्रिका सच्ची शिक्षा से जुड़े शाह सतनाम जी नगर निवासी भगवान सिंह इन्सां (87) बुधवार को अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर सचखंड जा विराजे। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पवित्र प्रेरणाओं पर चलते हुए स्वजनों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया। Sirsa News

डेरा सच्चा सौदा की अमर सेवा मुहिम के तहत उनकी पार्थिव देह को मेडिकल शोध कार्यों के लिए उत्तराखंड के देहरादून स्थित श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज एवं इन्द्रेश अस्पताल, देहरादून को दान कर दिया गया। बुधवार दोपहर बाद शाह सतनाम जी नगर से पार्थिव शरीर को फूलों से सजी एंबुलेंस में रखकर अंतिम यात्रा निकाली गई, जो शाह मस्ताना जी-शाह सतनाम जी धाम, डेरा सच्चा सौदा सरसा तक पहुंची।
”जब तक सूरज चांद रहेगा, शरीरदानी भगवान सिंह इन्सां तेरा नाम रहेगा”
इस दौरान एंबुलेंस के साथ चल रहे शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सदस्य, साध-संगत व परिजनों ने जब तक सूरज चांद रहेगा, शरीरदानी भगवान सिंह इन्सां तेरा नाम रहेगा तथा शरीरदानी भगवान सिंह इन्सां अमर रहे के गगनभेदी नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। अंतिम यात्रा में शाह सतनाम जी नगर, बठिंडा व आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साध-संगत व रिश्तेदार शामिल हुए। सचखंडवासी के पुत्र बलजिंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता ने 14 अक्तूबर 1967 को गुरुमंत्र ग्रहण किया था और तब से निरंतर डेरा सच्चा सौदा से जुड़े रहे।
वे सच्ची ग्रंथ समिति के पक्के सेवादार थे। उन्होंने लम्बा समय सच्ची लंगर समिति में सेवा की। भगवान सिंह इन्सां मूल रूप से पंजाब के बठिंडा जिले के गांव कोटली खुर्द के निवासी थे और वर्तमान में शाह सतनाम जी नगर में रह रहे थे। वे अपने पीछे पुत्र, पौत्रों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उल्लेखनीय है भगवान सिंह इन्सां बहुत मेहतनी, लग्नशील, मिलनसार, सीधे-साधे इन्सां थे। वह दीन-दुखियों की मदद के लिए हमेशा अग्रणी रहते थे।
बेटा-बेटी एक समान की मिसाल बनी अंतिम विदाई | Sirsa News
अंतिम विदाई के दौरान डेरा सच्चा सौदा की बेटा-बेटी एक समान मुहिम की झलक देखने को मिली। सचखंडवासी की बेटी मलकीत कौर इन्सां, पुत्रवधू जतिंद्र पाल कौर इन्सां, पौती अपनीत कौर इन्सां, मनप्रीत कौर इन्सां और पुत्र बलजिंद्र सिंह इन्सां ने मिलकर अर्थी को कंधा दिया।















