‘भारत’ बनाम ‘इंडिया’

Bharat vs India
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सोशल मीडिया पर हंगामा, किसने क्या कहा?

Bharat vs India:- द्रौपदी मुर्मू की ओर से भेजे गए रात्रिभोज के निमंत्रण पर मंगलवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। जी-20 सम्मेलन के सिलसिले में भेजे गए इस निमंत्रण पत्र में ‘प्रेसीडेंट ऑफ भारत’ लिखा गया है। विपक्षी दलों ने ये आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार देश के नाम के तौर पर ‘इंडिया’ शब्द का इस्तेमाल बंद कर रही है और इसे अब केवल ‘भारत’ कहे जाने की योजना है। विपक्षी दलों के इन आरोपों पर केंद्र सरकार या राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से अब तक किसी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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‘भारत’ का नाम बदलने की मांग कब उठी

संविधान के पहले अनुच्छेद में लिखा है कि “इंडिया जोकि भारत है, राज्यों का एक संघ होगा.” ‘भारत’ का नाम बदलकर ‘इंडिया’ करने की मांग अतीत में भारतीय जनता पार्टी के नेता करते रहे हैं। हाल ही में संसद के मॉनसून सत्र के दौरान बीजेपी सांसद नरेश बंसल ने राज्यसभा में कहा था कि ‘इंडिया’ नाम ‘औपनिवेशिक दासता’ का प्रतीक है और इसे संविधान से हटाया जाना चाहिए। पिछले साल जून में सुप्रीम कोर्ट में इस सिलसिले में एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी जिसमें ‘इंडिया’ का नाम बदलकर ‘भारत’ करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था लेकिन ये कहा था कि इस याचिका को केंद्र सरकार के समक्ष रीप्रेजेंटेशन के तौर पर देखा जा सकता है।

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान ये कहा था कि लोगों को इंडिया के बजाय भारत नाम का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए।

भारत का नाम इंडिया कैसे पड़ा?

इसके पीछे इतिहासकारों को कई मत हैं। इंडिया शब्द आजादी के बाद ज्यादा प्रसिद्ध हुआ है।
अँग्रेज जब भारत आए थे उसे भारत या हिन्दुस्तान के नाम के उच्चारण में कठिनाई होती थी। ब्रिटिश अधिकारी ज्यादातर बोलचाल में भारत को इंडिया के नाम से पुकारते थे। अंग्रेजी भाषा के लिखावट में भी इंडिया शब्द का प्रयोग करते थे। आजादी के समय ब्रिटिश सरकार के साथ कागजी आदान-प्रदान में भी इंडिया शब्द का ज्यादा प्रयोग हुआ करता था।

भारत बनाम इंडिया के नामों पर एक नजर भारत नाम कैसे पड़ा

इन नामों के बारे में भी संक्षेप में जान लें। ताकि आप अपने प्रतियोगिता परीक्षा के सभी प्रश्न को सफलतापूर्वक हल कर सके।

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इंडिया

इंडिया नाम कैसे पड़ा, इण्डिया शब्द की उत्पत्ति सिंधु नदी (इंडस वैली) से हुआ है। इस शब्द को सबसे ज्यादा यूनानियों ने प्रचलित बनाया था। इंडिया शब्द की उत्पत्ति “इंडस” नाम शब्द से हुआ है। इंडस शब्द का उदय इंडस वैली से हुआ है, जो सिंधु नदी का नाम हुआ करता था। कुछ इतिहास-कारों का मानना है कि जब अलेक्जेंडर भारत आये थे। उन्होंने भारत की जगह आइएनडीयू शब्द का प्रयोग किया था। लेकिन इतिहास के पन्नों को देखें तो इंडिया शब्द का उदय सिंधु नदी से हुआ है। क्योंकि सिंधु नदी को इंडस वैली कहा जाता था। भारत को सभ्यताओं का देश कहा जाता है। दुनिया में सबसे पहले सभ्यता यहीं पर जन्म लिया था। हमारी सभ्यता का नाम सिंधु घाटी था। जो सिंधु नदी के पास था। सिंधु नदी का दूसरा नाम इंडस वैली था। जिसके कारण अपने देश का नाम इंडिया पड़ा।

भारत नाम कैसे पड़ा था?

जैन धर्म के अनुयायी कहते हैं कि भरत चक्रवर्ती सम्राट नाम पर भारत देश का नाम पड़ा है। हिंदू ग्रंथ स्कन्ध पुराण के अनुसार माना जाता है कि ऋषभ के पुत्र भरत से भारत का नाम भारत-वर्ष पड़ा था।

आर्यवर्त

आर्यवर्त भारत का सबसे पुराना नाम माना जाता है। कहा जाता है कि आर्यों के आगमन से पहले यहां पर मनुष्य नहीं रहते थे। उन्होंने ही लोगों को यहाँ पर बसाया था। इसीलिए इस देश का नाम उस समय आर्यवर्त पड़ा था।

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जम्बुद्वीप

धार्मिक वेदों मान्यताओं के अनुसार, धरती पर पहले सात द्वीप हुआ करते थे। जिसमें जम्बू इन सातों द्वीपों के बीच में स्थित था। इसी द्वीप के नाम पर कभी भारत का नाम जम्बुद्वीप हुआ करता था। जम्बुद्वीप की बात है यह सबसे पुराना नाम है। आज के भारत, आर्यवर्त, भारतवर्ष से भी बड़ा। एक अध्ययन में यह भी कहा गया है कि जामुन फल को संस्कृत में ‘जम्बु’ कहा जाता है। अनेक उल्लेख हैं कि इस केंद्रीय भूमि पर यानी आज के भारत में किसी काल में जामुन के पेड़ों की बहुलता थी। इसी वजह से इसे जम्बुद्वीप कहा गया। जो भी हो, हमारी चेतना जम्बुद्वीप के साथ नहीं, भारत नाम से जुड़ी है। ‘भरत’ संज्ञा की सभी परतों में भारत होने की कथा खुदी हुई है। Bharat vs India

भारतखण्ड

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जंबुद्वीप के नौ खंड थे। जिसमें एक खंड का नाम भारत था। इसी खण्ड के नाम पर कभी भारतखण्ड नाम हुआ करता था।

हिन्द

हिंद नाम सिंध की एक विकृत संज्ञा है। कहा जाता है कि सिंधु में “स” के जगह “ह” का उच्चारण के कारण हिन्द नाम पड़ा था। जिस का अधिकारिक कोई साक्ष्य नहीं है।

प्राचीन भारत: भारत का प्राचीन इतिहास आकर्षक और जटिल है। इस इतिहास को बनाने वाले कई अलग-अलग काल और राजवंश हैं, और प्रत्येक की अपनी अनूठी कहानी है। प्रारंभिक वैदिक काल से लेकर मौर्य साम्राज्य के उदय तक, भारत के अतीत के बारे में जानने के लिए बहुत कुछ है। यह इतिहास दिलचस्प पात्रों, महत्वपूर्ण क्षणों और महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा है जिन्होंने भारत को आज के देश में आकार दिया है। समृद्ध संस्कृति और लंबे समय से चली आ रही परंपराओं के साथ भारत का प्राचीन इतिहास आकर्षक है। ऐसा माना जाता है कि भारतीय उपमहाद्वीप के पहले निवासी सिंधु घाटी सभ्यता थे, जो लगभग 3300 ईसा पूर्व की है। इसके बाद वैदिक काल आया, जिसके दौरान हिंदू धर्म का विकास हुआ। लगभग 1500 ईसा पूर्व से, इस क्षेत्र पर मौर्य, गुप्त और कुषाण साम्राज्यों सहित कई शक्तिशाली साम्राज्यों का शासन था।

हिंद, हिन्दश, हिन्दवान

हिन्दुश शब्द तो ईसा से भी दो हजार साल पहले अक्कादी सभ्यता में था। अक्कद, सुमेर, मिस्र सबसे भारत के रिश्ते थे। ये हड़प्पा दौर की बात है। सिंध सिर्फ नदी नहीं सागर, धारा और जल का पर्याय था। सिंध का सात नदियों वाले प्रसिद्ध ‘सप्तसिन्ध’, ‘सप्तसिन्धु’ क्षेत्र को प्राचीन फारसी में ‘हफ्तहिंदू’ कहा जाता था। क्या इस ‘हिंदू’ का कुछ और अर्थ है?

जाहिर है, हिंद, हिंदू, हिन्दवान, हिन्दुश जैसी अनेक संज्ञाएं अत्यंत प्राचीन हैं। इंडस इसी हिन्दश का ग्रीक समरूप है। यह इस्लाम से भी सदियों पहले की बातें है। ग्रीक में भारत के लिए ‘इंडिया’ अथवा सिंधु के लिए ‘इंडस’ शब्दों का प्रयोग दरअसल इस बात का प्रमाण है कि हिंद अत्यंत प्राचीन शब्द है और भारत की पहचान है। संस्कृत का ‘स्थान’ फारसी में ‘स्तान’ हो जाता है। इस तरह हिंद के साथ जुड़ कर हिंदुस्तान बना। आशय जहां हिंदी लोग रहते हैं। हिंदू बसते हैं। भारत-यूरोपीय भाषाओं में ‘ह’ का रूपांतर ‘अ’ हो जाता है। ‘स’ का ‘अ’ नहीं होता। मेसोपोटामियाई संस्कृतियों से हिंदुओं का ही संपर्क था। हिंदू दरअसल ग्रीक इंडस, अरब, अक्काद, पर्शियन संबंधों का परिणाम है। Bharat vs India

हम हैं ‘भारतवासी’

‘इंडिका’ का प्रयोग मेगास्थनीज ने किया। वह लंबे समय तक पाटलीपुत्र में भी रहा, मगर वहां पहुंचने से पूर्व बख़्त्र, बाख्त्री (बैक्ट्रिया), गान्धार, तक्षशिला (टेक्सला) इलाकों से गुजरा। यहां हिंद, हिन्दवान, हिंदू जैसे शब्द प्रचलित थे। उसने ग्रीक स्वरतंत्र के अनुरूप इनके इंडस, इंडिया जैसे रूप ग्रहण किए। यह ईसा से तीन सदी और मोहम्मद से 10 सदी पहले पहले की बात है।

हिन्दुस्तान के नाम का इतिहास | Bharat vs India

भारत के बाद देश का नाम हिन्दुस्तान पड़ा। इस नाम के पीछे भी एक बड़ी रौचक कहानी है। दरअसल, तुर्की और ईरान के लोग जब भारत में दाखिल हुए तो उन्होंने सिंधु घाटी से प्रवेश किया था। ये लोग स को ह बोला करते थे, इसलिए उन्होंने सिंधु को हिंदू कहना शुरू कर दिया और यहीं से हिंदुओं के देश को हिंदुस्तान कहना शुरू हो गया।

कैसे पड़ा देश का नाम

हिन्दुस्तान के बाद देश का नाम इंडिया रखा गया। इसका कारण यह था कि जब अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी बनाई। इसके बाद जब अंग्रेजों ने धीरे-धीरे शासन करना शुरू किया उन्हें हिंदुस्तान बोलने में दिक्कत आती थी, इसलिए उन्होंने सिंधु घाटी से ही एक और नाम निकाला।

सिंधु घाटी को इंडस वैली भी कहा जाता है और इंडस को लैटिन में इंडिया कहते हैं। यहीं से भारत का नाम इंडिया पड़ा और दुनिया में इस नाम को खूब प्रसिद्धि मिली।

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ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना

बता दें कि ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 400 साल पहले 1600 में हुई थी। जानकारी के अनुसार, विलियम हॉकिन्स 1608 में ईस्ट इंडिया के जहाज लेकर भारत आए थे और उन्होंने गद्दे और रजाई के काम के लिए इसकी शुरूआत की। साल 1613 में मुगल बादशाह जहांगीर की इजाजत से ईस्ट इंडिया कंपनी ने सूरत में पहला कारखाना लगाया।
बता दें कि कंपनी एक व्यापारिक कंपनी थी, लेकिन उसके पास ढाई लाख सैनिकों की एक फौज थी। जब भी कंपनी को व्यापार से फायदा नहीं होता, वो उस जगह सेना की मदद से उसे संभव बना देती। इसी रणनीति के तहत कंपनी की सेना ने केवल कुछ ही सालों में ही भारत की आधी धरती पर कब्जा कर लिया था।

सबसे पुराना नाम था आर्यावर्त

देश का सबसे पुराना नाम आर्यावर्त था। इतिहासकारों का मानना है कि आर्यों से पहले यहां इंसान नहीं रहते थे और आर्यों ने ही उनको बसाया, जिसके बाद इसे आर्यावर्त नाम दे दिया गया।
                                                                                              -लेखन व संकलन: राजेश बेनीवाल

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