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    मोदी ब्रांड से बीजेपी फिर सत्ता पर काबिज

    BJP again dominates the Modi brand

    मोदी ब्रांड से बीजेपी फिर सत्ता पर काबिज शाम चार बजे तक एनडीए का आंकड़ा 350 तक पहुंच गया, यूपीए का आंकड़ा और अन्य 102 तक अटका रहा। अकेली बीजेपी को 295 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत की ओर है। वहीं अकेली कांग्रेस 54 सीट जीत पर है। बीजेपी ने कई जगह एक तरफा जीत दर्ज की। गुजरात में 26 की 26 बीजेपी को, राजस्थान में 25 (एक गठबन्धन की), मध्य प्रदेश में 28, उत्तर प्रदेश में 61, दिल्ली की 7, कर्नाटक में 23, बिहार में 22, महाराष्ट्र में 22, पश्चिम बंगाल में 18, झारखंड में 12, छतीशगढ़ में 10, पूर्वोत्तर में 11, हरियाणा में 9 और उड़ीसा में 5 सीट जीतने में भारतीय जनता पार्टी कामयाब रही। इस बार दक्षिण ने बीजेपी पर काफी भरोसा किया। बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत का सपना भी आकार लेने लगा है।

    विपक्ष के तमाम दावों और हमलों के बीच भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सत्ता पर काबिज होने में सफल रही है। हालांकि चुनाव मोदी के इर्द गिर्द रहा। यह सही अर्थ में मोदी की जीत है। मोदी सरकार ने यह साबित किया है की विकास और काम के आधार पर भी चुनाव जीता जा सकता है। बीजेपी द्वारा अपने चुनाव कैंपेन में अपने कार्यकाल के कामों के हिसाब के साथ ही राष्ट्रवाद और आतंकवाद को आधार बनाया गया जिस पर लोगों ने पूरा भरोसा किया। पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक ने माहौल को बिल्कुल बदल दिया इससे इन्कार नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान के प्रति लोगों में गुस्सा था जिसे मोदी ने समझ लिया।

    वैसे पूरा चुनाव मोदी के नाम पर लड़ा गया। मोदी खुद रैलियों में कहते थे कि आपका वोट सीधा सीधा मोदी के पास आने वाला है। लोगों ने पूरा विश्वास जताया। एक बार फिर मोदी सरकार के नारे ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। यह बात स्पष्ट हो रही है की आम लोगों के मन में नरेंद्र मोदी के प्रति विश्वास और गहरा हुआ है। तो वहीं कांग्रेस के ऊपर से लोगों का विश्वास उठ गया है। राहुल गांधी की न्याय योजना को लोगों ने स्वीकार नहीं किया। लोगों में कांग्रेस के प्रति अविश्वास की भावना प्रबल हो चुकी है। विपक्षी मोदी को जुमलेबाज कहते रहे लेकिन लोगों के मन से मोदी को निकालने में नाकाम रहे।

    मोदी आम लोगो की भावना से जुड़ने में कामयाब रहे। यह बहुत बड़ी बात थी। तभी तो इतना प्रचंड बहुमत मिला है। पांच साल तक भ्रष्टाचार मुक्त ईमानदार सरकार तथा योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के कारण लोगों में नरेंद्र मोदी की एक सही नेता की पैठ बन चुकी थी हालांकि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी को चोर और भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के बेबुनियाद आरोप मढ़े जिसे जनता ने सिरे से खारिज कर दिया । मोदी ने सबको मै हूं चौकीदार बनाकर राहुल गांधी के चौकीदार चोर है के नारे को बिल्कुल उल्टा डाल दिया। मोदी की छवि को बिगाड़ने की कोशिशों को जनता ने स्वीकार नहीं किया। राफेल राफेल को लेकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पूरे चुनाव कैंपेन में दलाल कहना चाहा लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।

    हालांकि उत्तर प्रदेश में गठबंधन ने थोड़ी कोशिश की रोकने की लेकिन कामयाबी इतनी नहीं मिली। जो कुछ उत्तर में थोड़ा नुकसान हुआ उसकी भरपाई दक्षिण पूर्व ने कर दी। इस जीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भी बहुत बड़ी भूमिका रही है। अगर इस जीत के मुख्य कारणों पर गौर करें तो सबसे पहला है मोदी की ईमानदार छवि और लोगों का उन पर भरोसा करना । दूसरा, राष्ट्रवाद की भावना से जुड़कर लोगों ने देश के नाम अपना मतदान किया जो बीजेपी के खाते में गया।

    विपक्षी पार्टियों के नेताओं द्वारा गलत बयान बाजी ने भी मोदी की राह आसान की।  अब सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी की चुनाव रणनीति फेल हो गई है और क्या चौकीदार चोर जैसे नारों ने कांग्रेस को हाशिए पर डाल दिया है? इसके अलावा क्षेत्रीय दलों पर से भी जनता का उठता भरोसा इस बात का संकेत है कि अब लोग जागरूक हुए हैं और उन्हें समझ आ रहा है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने परिवार या रिश्तेदारों के लिए ना करके देश हित में काम कर रहे हैं इसलिए लोगों को उन्हें सहयोग करना चाहिए। एक तरह से मोदी की साख ने लोगों के दिलों में काफी जगह बना ली ।

    दूसरी बड़ी बात यह है की विपक्ष पूरे पांच साल तक बीजेपी विरोधी कोई खासकैंपेन नहीं कर सका। केवल चुनावी वर्ष में सरकार के खिलाफ इन्होंने आवाज उठाई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रियंका गांधी का यह राजनीति में पहला अनुभव था जिसे उन्होंने काफी सकारात्मक रूप से प्रदर्शित किया लेकिन इसका अनुभव उनके भविष्य के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। इसके विपरीत मोदी पूरे पांच साल तक विभिन्न कार्यक्रमो से योजनाओं के प्रचार-प्रसार में संसार में जुटे रहे। विशेषकर सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग किया गया। जिससे उनकी पैठ जनता में बैठ गई।

    रेडियो के जरिए मन की बात हो या किसी अन्य कार्यक्रम के द्वारा लोगों से जुड़ने की बात हो मोदी ने कोई भी अवसर हाथ से जाने नहीं दिया। इसका फायदा यह रहा की पूरे पांच साल तक लोग मोदी से जुड़े रहे ।इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष की रणनीति भी काबिले तारीफ रही। अमित शाह ने यह साबित किया कि बूथ लेवल पर पन्ना प्रमुख की तैनाती और माइक्रो लेवल पर रणनीति से चुनावी परिणामों को बदला जा सकता है। इसके विपरीत कांग्रेस की रणनीति में पहली असफलता गठबंधन को लेकर कोई एक राय नहीं बन पाना है। कांग्रेस केवल अपने लिए जीतने के सपने देखने देखती रही और आखिर में नतीजा सिफर रहा । यह चुनाव परिणाम क्षेत्रीय दलों के लिए भी भविष्य के लिए अस्तित्व के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। विकास के नाम पर राजनीति की शुरूआत मोदी ने की थी। इसको सब जानते हैं लेकिन स्वीकार नहीं करते। पिछला चुनाव विकास के इर्द-गिर्द रहा।

    लेकिन इस बार मोदी सरकार ने जन धन योजना, उज्जवला योजना, मुद्रा योजना , सौभाग्य योजना आदि के द्वारा अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित की जिससे विकास को एक आधार मिला और जनता को उसका लाभ मिला। जनता को मोदी का महत्व अपने जीवन में लगने लगा और भरोसा हुआ। इसके इतर चुनाव में राष्ट्रवाद और आतंकवाद को केंद्र में रखा गया। जो भी हो मोदी ने यह साबित कर दिया की कुशल रणनीति और काम के आधार पर चुनाव के परिणामों को बदला जा सकता है। लोगों से सीधा भावात्मक जुड़ा कैसे रखा जा सकता है यह भी मोदी अच्छी तरह से जानते हैं। इसी का नतीजा है की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर बहुमत से सत्ता की कुर्सी पर बिठाया है।अब सरकार को फिर अपने कामों में खरा उतरना होगा।ताकि जनाधार का पूरा सम्मान किया जा सके।
    नरपत दान चारण

     

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