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    कैथल से निकला एक और दधिची, मरणोपरांत किताब इंन्सा का शरीर दान व आँखे दान

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    Body Donation: मरने से 3 दिन पहले भी अपने भाई को कहा था मेरा शरीर दान करना है

    मरने से 3 दिन पहले भी अपने भाई को कहा था मेरा शरीर दान करना है | Body Donation

    कैथल (सच कहूं/कुलदीप नैन)। Body Donation: एक समय था जब लोग रक्तदान करने से भी डरते थे लेकिन आज समय बदल चुका है आज डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी शरीरदान करने से भी पीछे नहीं हटते और इस समय और सोच को बदलने वाले है, डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां। जी हां, आज पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए लाखों डेरा अनुयायियों ने आगे आकर मरणोपरांत शरीरदान व नेत्रदान करने के प्रतिज्ञा पत्र भरकर संकल्प लिया हुआ है। इस मुहिम पर चलते हुए अब तक हजारों डेरा अनुयायी शरीरदान कर चुके हैं।

    इस लिस्ट में अब कैथल के जोन नंबर 6, मायापुरी कॉलोनी में रहने वाले किताब इंन्सा का भी नाम जुड़ गया है। डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाये 163 मानवता भलाई कार्यो में से एक अमर सेवा मुहिम के तहत सचखंडवासी किताब इन्सां की पार्थिव देह मेडिकल रिसर्च हेतु नरीना मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च सेंटर गंगागनी, पनकी, कानपुर, उत्तर प्रदेश को दान की गई। वहीं उनकी आंखें सेवा संघ समिति कैथल को दान कर दी गईं, जो किसी की अंधेरी जिंदगी में उजाले का सबब बनेंगी। Kaithal News

    सचखंडवासी किताब इंन्सा को अंतिम विदाई देने के लिए परिजनों और रिश्तेदारों के अलावा बड़ी संख्या में ब्लाक कैथल व अन्य आस पास के ब्लाको से शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सदस्य व् सेवादार पहुंचे हुए थे । किताब इन्सां की मृत देह को फूलों से सजी गाड़ी में पुष्पवर्षा व इलाही नारों के साथ रुखस्त किया गया। डेरा सच्चा सौदा की बेटा बेटी एक समान मुहीम के तहत उनकी अर्थी को कंधा उनकी पुत्री काजल और पुत्रवधू ने दिया।

    जानकारी के अनुसार पिछले 2-4 दिन से बीमार चल रहे किताब इंन्सा मंगलवार सुबह अपनी स्वांसों रूपी पूंजी पूर्ण कर कुल मालिक के चरणों में सचखंड जा विराजे। किताब इन्सां ने पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज से नाम शब्द लेकर अपने पूरे परिवार को डेरा सच्चा सौदा से जोड़ा। किताब इंन्सा ने लम्बे समय तक शाह मस्ताना जी धाम की शाही कैंटीन मे पक्की सेवा भी की। इसके साथ ही कैथल डेरे में भी लगातार सेवा पर आते रहते थे।

    किताब इंन्सा ने मरणोपरांत शरीरदान का संकल्प पत्र भरा हुआ था और 3 दिन पहले भी किताब इंन्सा को जब सतगुरु ने आभास करवाया उसके आखिरी समय का, तब भी उसने मेरे को कहा कि तूने मेरा शरीरदान करना है। यही मेरी अंतिम इच्छा है। भाई की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए और पूज्य गुरु जी के वचनों पर चलते हुए किताब इंन्सा का शरीरदान किया गया है।                                                                                               जसमत इंन्सा, भाई

    इस देह को तो मिट्टी में मिल ही जाना है, क्यों न मरणोपरांत भी ऐसा कार्य किया जाए जो न केवल प्रेरणादायक हो, बल्कि इंसानियत के हित में भी हो। किताब इंन्सा के परिजनों ने समाज की परवाह किए बगैर शरीरदान व नेत्रदान जैसा महान कार्य किया है। डेरा सच्चा सौदा की ये मुहिम समाज में अनूठा उदाहरण है। पूज्य गुरुजी की शिक्षाओं से अन्य लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। Kaithal News
                                                                                                      बलजीत, पार्षद वार्ड 12, कैथल

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