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Sunday, March 1, 2026
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    सावधान! किसी की जान पर भारी न पड़ जाए आपकी हड़बड़ाहट

    Careful! Do not let anyone's life overwhelm

    घर पर ही आइसोलेट होकर हो जाएंगे ठीक

    • संक्रमित होने पर घबराएं नहीं, सतर्कता से लें काम

    • सरकार और प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का करें पूर्णत: पालन

    सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। दिन-ब-दिन बेतहाशा बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के चलते मुश्किलें बढ़ती जा रही है। लेकिन लोगों की लापरवाही भी कोरोना के खिलाफ जंग को कमजोर कर रही है। संक्रमित होने की रिपोर्ट आते ही लोग भयभीत हो जाते हैं और अस्पतालों में बेड ढूंढने की कवायद में जुट जाते हैं। जबकि हकीकत ये है कि कोरोना संक्रमितों में से 90 फीसदी से ज्यादा को बेड की जरूरत नहीं पड़ती है। लेकिन खौफ के चलते मरीज किसी भी कीमत पर बेड लेने के लिए दौड़ रहे हैं। इस दौड़ में सभी दौड़ने लग गए तो वह वर्ग बेड से वंचित रह सकता है, जिन्हें बेड, आक्सीजन या वैंटीलेटर की सख्त जरूरत है। जरूरतमंद कोरोना से हार जाएगा। इस विषय को लेकर सच कहूँ ने शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल के सीएमओ डा. गौरव अग्रवाल से विस्तृत बातचीत की।

    जानिए कब पड़ेगी बेड की जरूरत

    1. अगर आप संक्रमित हैं और आपका गला खराब और खांसी है तो घबराएं नहीं, घर पर ही चिकित्सक की सलाह से आसानी से ठीक हो सकते हैं। ऐसे में अस्पताल में बेड की जरूरत नहीं होती।
    2. दो से तीन दिन तक 99 से 100 बुखार आ रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है। चिकित्सकों की सलाह लेते रहें, अपने स्तर पर किसी भी अंग्रेजी दवाई को न लें, इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन लेते रहें।
    3. लगातार पांच दिन से बुखार 101 से ऊपर है तो बिना देरी अस्पताल में कोविड-19 टेस्ट करवाएं, चिकित्सक की सलाह पर ही अस्पताल में दाखिल हों।
    4. कोरोना वायरस का फेफेड़ों पर अटैक होता है, ऐसे में आक्सीजन का स्तर गिरने लगता है। आक्सीजन 90 से ऊपर है तो घबराएं नहीं। 90 से नीचे आक्सीजन का लेवल जा रहा है तो सावधान हो जाइए। आक्सीजन बेड की आवश्यकता पड़ सकती है।

    रेमडेसिविर ठीक होने की गारंटी नहीं?

    डा. अग्रवाल के मुताबिक एम्स दिल्ली की रिवाइज गाइडलाइन में स्पष्ट है कि रेमडेसिविर लगाने के बाद तय नहीं है कि मरीज को इसका फायदा होगा या नहीं। न ही देखने में आया है कि इस इंजेक्शन के बाद मौत के रिस्क कम हो गया हो। जो मरीज आक्सीजन सपोर्ट पर है, आइसीयू में है, उसकी स्थिति के अनुसार चिकित्सक तय करता है कि कब और किस समय इंजेक्शन दिया जाना है। अभी तक की रिसर्च में यह नहीं आया है कि रेमडेसिविर लगाए जाने के बाद कोरोना संक्रमण खत्म हो जाएगा। इसलिए लोग इसके पीछे ना भागें।

    इसलिए बढ़ रहा मौत का आंकड़ा

    1. कोरोना को हल्के में लेना, लक्षण आने के बाद भी कोरोना की जांच नहीं कराना।
    2. लोग बिना जांच कराए अपने स्तर पर ही दवाइयां ले लेते हैं, जिससे संक्रमण रुकने की बजाय तेजी से मल्टीप्लाई हो रहा है। मरीज की हालात गंभीर होने के बाद उसकी मौत हो जाती है।
    3. वैक्सीनेशन को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां भी कारण हैं। जो वैक्सीनेशन कराने योग्य हैं, वे नहीं लगवा रहे हैं तो संक्रमण आसानी से शिकार बना रहा है।

    कोरोना संक्रमण के प्रति ना बरतें लापरवाही

    कोरोना संक्रमण के प्रति लापरवाही बरती तो समझो चपेट में आ गए। संक्रमण आसपास ही है। ऐसे में हर समय सचेत रहने की जरूरत है। हल्के लक्षण आते ही कोरोना की जांच कराएं। चिकित्सक की सलाह से इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जरूरी खान-पान, मल्टी विटामिन दवाइयों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। सरकारी गाइडलाइन का पालन आवश्यक रूप से करें। लगातार बढ़ रहे केस लोगों की लापरवाही का भी एक कारण है। बेवजह अस्पतालों में बेड के लिए दौड़ न लगाएं, ज्यादातर मरीज होम आइसोलेशन में रहकर ठीक हो रहे हैं। बहुत कम परिस्थितियों में ही मेडिकल संसाधनों की जरूरत पड़ती है। घर पर रहिये-सुरक्षित रहिये।

    डॉ. गौरव अग्रवाल, सीएमओ शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल, सरसा

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