नई दिल्ली। Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने हाल ही में घोषणा की है कि लगभग 25,000 ऐसे करदाताओं को SMS या ई-मेल अलर्ट भेजा जाएगा, जिनके विदेश में होल्डिंग्स (जैसे बैंक अकाउंट, संपत्ति, शेयर आदि) का खुलासा उनके 2025-26 के आईटीआर (आयकर रिटर्न) में नहीं हुआ है। इन करदाताओं को “high-risk” मामलों में शामिल किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेशों की एजेंसियों से साझा की गई जानकारी (फ्रेमवर्क Automatic Exchange of Information — AEOI के तहत) और उन लोगों के दाखिल रिटर्न में पाई गई जानकारी में अंतर देखा गया। विदेशी प्रॉपर्टी की रिपोर्ट नहीं करने पर नियम सख्त हैं। ब्लैक मनी अधिनियम के तहत, विदेशी संपत्ति का खुलासा न करने पर 10 लाख रुपये का जुर्माना, 30% टैक्स और देय कर का 300% अतिरिक्त जुर्माना लग सकता है।
क्या है AEOI / डेटा-शेयरिंग व्यवस्था — और क्यों हो रही है यह मुहिम
AEOI एक अन्तर्राष्ट्रीय सूचना-शेयरिंग व्यवस्था है, जिसके तहत विभिन्न देशों की टैक्स अथॉरिटीज़ अपने निवासियों/नागरिकों की विदेश में मौजूद वित्तीय संपत्तियों और खातों की जानकारी एक-दूसरे को भेजती हैं। भारत के लिए यह जानकारी मिलने के बाद, यदि किसी व्यक्ति ने अपनी विदेशी संपत्तियों (या विदेशी स्रोत आय) का खुलासा अपने ITR में नहीं किया — तो उसे विभाग “high-risk” टैक्सपेयर्स में मान रहा है। यही आधार है SMS/ई-मेल अलर्ट भेजने का। इस काम को विभाग अपनी नयी पहल NUDGE 2.0 का हिस्सा बता रहा है — मतलब: गैर-जबरदस्ती, पर कानूनी दायित्व याद दिलाकर (voluntary compliance) सुनिश्चित करना।
क्या है AEOI / डेटा-शेयरिंग व्यवस्था — और क्यों हो रही है यह मुहिम
AEOI एक अन्तर्राष्ट्रीय सूचना-शेयरिंग व्यवस्था है, जिसके तहत विभिन्न देशों की टैक्स अथॉरिटीज़ अपने निवासियों/नागरिकों की विदेश में मौजूद वित्तीय संपत्तियों और खातों की जानकारी एक-दूसरे को भेजती हैं।
भारत के लिए यह जानकारी मिलने के बाद, यदि किसी व्यक्ति ने अपनी विदेशी संपत्तियों (या विदेशी स्रोत आय) का खुलासा अपने ITR में नहीं किया — तो उसे विभाग “high-risk” टैक्सपेयर्स में मान रहा है। यही आधार है SMS / ई-मेल अलर्ट भेजने का।
इस काम को विभाग अपनी नयी पहल NUDGE 2.0 का हिस्सा बता रहा है — मतलब: गैर-जबरदस्ती, पर कानूनी दायित्व याद दिलाकर (voluntary compliance) सुनिश्चित करना।
अगर आपको ऐसा SMS / ई-मेल आता है — तो क्या करना चाहिए
1. सबसे पहले — देखें कि क्या आपके पास वास्तव में विदेश में कोई बैंक खाता, संपत्ति, शेयर, निवेश, एफएसआई (foreign source income) या अन्य विदेशी income/asset है।
2. अगर है — तो अपने ITR (AY 2025–26) की Schedule FA (Foreign Assets) और Schedule FSI (Foreign-Source Income) देखें। यदि आपने पहले नहीं भरी — तो 31 दिसंबर 2025 तक revised ITR दाखिल करना चाहिए।
3. अगर आपने गलती से ITR-1 भरा था (जब ITR-2 भरना था), या कोई अन्य वजह से disclosure नहीं हुआ — तो जल्दी सुधार करें।
4. अगर आपने विदेश में कोई संपत्ति / खाता नहीं रखा है, फिर भी SMS/ई-मेल मिला है — तो सावधानी रखें। पहले यह सुनिश्चित करें कि मेल/एसएमएस असली है, phishing नहीं। (ध्यान रहे: पहले से ऐसे phishing/धोखाधड़ी वाले fake ई-मेल देखने को मिले हैं।)
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