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Friday, February 6, 2026
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    CBSE: सीबीएसई की नई पहल, अब कम होगा बच्चों की पढ़ाई का तनाव!

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    ‘अध्यापक-अभिभावक संवाद’ से कम होगा पढ़ाई का तनाव

    श्रीगंगानगर. बच्चों की पढ़ाई और उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड निरंतर नवाचार कर रहा है। इस कड़ी में इस बार सीबीएसई ने एक नई पहल के तहत पैरेंटिंग कैलेंडर जारी किया है जिससे अभिभावक और अध्यापकों के मध्य संवाद स्थापित कर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास को एक नई दिशा प्रदान की जाएगी। बता दें कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 से शुरू होने वाला यह पैरेंटिंग कैलेंडर बीते दिनों बोर्ड द्वारा गठित एक 10 सदस्य समिति की अनुशंसा पर बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित है जिसमें अभिभावकों और शिक्षकों की भागीदारी को बच्चों के विकास के लिए जरूरी माना गया है। CBSE News

    सत्र 2025-26 से लागू किया पैरेंटिंग कैलेंडर…..

    32 पृष्ठों में प्रस्तुत इस पैरेंटिंग कैलेंडर (Parenting Calendar) में बताया गया है कि मजबूत सहयोग से एक ऐसे वातावरण का निर्माण करना है जिसमें बच्चे अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान सकें। बोर्ड द्वारा किए गए अभिभावकों के सर्वेक्षण के साथ ही चार सेक्शन में विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया गया है।

    स्कूलों से रहेगा नियमित संपर्क | CBSE News

    इस कैलेंडर की खासियत यह है कि यह शिक्षा के दबाव को कम करने में अभिभावकों को सहयोग प्रदान करता है। जैसे-जैसे बच्चों पर पढ़ाई का मानसिक बोझ बढ़ता जा रहा है। वैसे ही अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। इसके लिए सीबीएसई ने अभिभावकों और स्कूलों के बीच नियमित संपर्क बनाए रखने की योजना बनाई है।

    यूँ शामिल होंगी कक्षावार गतिविधियां | CBSE News

    नर्सरी और किंडरगार्टन:- कहानी सुनाने, संगीत, पहेलियां आदि
    कक्षा 1-2:- आउटडोर शिक्षण, पारंपरिक खेल
    कक्षा 3-5:- विज्ञान प्रयोग, सांस्कृतिक गतिविधियां
    कक्षा 6-8:-कौशल स्वैप और सहयोग सत्र
    कक्षा 9-10:-कॅरियर मेंटरिंग और कला में भागीदारी
    कक्षा 11-12:- करियर मेंटरशिप, वित्तीय साक्षरता चुनौतियां

    विशेषज्ञों का कहना है:-

    “सीबीएसई ने इस पहल से शैक्षणिक स्तर उन्यन्न के साथ-साथ बच्चों के मानसिक हित को प्राथमिकता दी है। दिनोंदिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा, अवसाद और तनाव के चलते इस कैलेंडर का महत्त्व और बढ़ जाता है। आमतौर पर स्कूलों में होने वाली पीटीएम केवल कक्षाकक्ष तक सीमित होती है। पर यह संवाद हर गतिविधि को जोड़ते हुए विद्यार्थी के प्रत्येक पहलू को विकसित कर सकेगा।” CBSE News
    भूपेश शर्मा, जिला समन्वयक, विद्यार्थी परामर्श केंद्र,श्रीगंगानगर

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