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    Krishna Janmashtami 2024: भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर नाच-गाकर मनाई खुशी

    Krishna Janmashtami

    Krishna Janmashtami 2024: हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। टाउन की बरकत कॉलोनी स्थित फाटक गोशाला में श्री गोसेवा संस्थान की ओर से गोसेवार्थ श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन करवाया जा रहा है। 23 अगस्त से शुरू हुई श्रीमद् भागवत कथा 29 अगस्त तक चलेगी। सोमवार को चौथे दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर कथा में भक्त नरसिंह अवतार, कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया गया। साथ ही भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इस मौके पर विधायक गणेश राज बंसल, नगर परिषद सभापति सुमित रणवां, बालकृष्ण गोल्याण, मुकेश भार्गव ने केक काटा। भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर श्रद्धालुओं ने नाच-गाकर खुशी मनाई। Krishna Janmashtami

    सोमवार को कथा के मुख्य यजमान रतनलाल अजीतपुरिया थे। मुरलीधर गर्ग, बृजमोहन लुहारीवाला, राजेन्द्र सिंह, मोहन लाल, शंकर खदरिया, जगदीश राय ने सपरिवार पूजा-अर्चना की। पंडित रामनारायण शास्त्री के सानिध्य में राधेश्याम, सुन्दर पाल, गणेश, मनीराम की ओर से मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना सम्पन्न करवाई गई। चौथे दिन कथा व्यास राजाराम दसोड़ी बीकानेर ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि आज का व्यक्ति कर्म करने से पहले उसके फल के बारे में सोचने लगता है, लेकिन वह यह भूल जाता है कि उसका काम तो सिर्फ कर्म करना है, फल देना तो भगवान के हाथ में है। इसलिए जो भी कार्य करें उसे पूरी ईमानदारी और सच्ची निष्ठा के साथ करें। मेहनत का फल सदैव मीठा होता है।

    भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार उनके 12 स्वरूपों में से एक है

    उन्होंने हिरण्यकश्यप के वध और नरसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार उनके 12 स्वरूपों में से एक है। ये ऐसा अवतार था जिसमें श्री हरि विष्णु के शरीर का आधा हिस्सा मानव का और आधा हिस्सा शेर का था। इसलिए इस अवतार को नरसिंह अवतार कहा गया है। भगवान ने यह अवतार अपने प्रिय भक्त प्रहलाद के प्राण बचाने के लिए लिया था। भगवान नरसिंह एक खंभे को चीरते हुए बाहर आए थे। हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान नरसिंह खंभे को चीरकर बाहर निकले थे और उन्होंने दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था। भगवान अपने भक्त की रक्षा के लिए किसी भी रूप में अवतार लेते हैं।

    कथावाचक दसोड़ी ने धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पापाचार बढ़ा है, तब-तब प्रभु का अवतार हुआ है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब धरा पर मथुरा के राजा कंस के अत्याचार अत्यधिक बढ़ गए, तब धरती की करुण पुकार सुनकर श्री हरि विष्णु ने देवकी माता के अष्टम पुत्र के रूप में भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया। इसी प्रकार त्रेता युग में लंकापति रावण के अत्याचारों से जब धरा डोलने लगी तब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने जन्म लिया। श्री गोसेवा संस्थान अध्यक्ष मुरलीधर अग्रवाल ने बताया कि कथा का समापन 29 अगस्त को होगा। 30 अगस्त को पूर्णाहुति होगी। इस मौके नरोत्तम सिंगला, मनोज सरावगी, नवीन बंसल, लव कुमार, रीटा चावला, मीरा बाई, प्रेम तावणिया, नवीन गर्ग, प्रिया ग्रेवाल आदि मौजूद रहे। Krishna Janmashtami

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