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    दीपोत्सव को सौहार्द और प्रेम से मनाना ही हमारी संस्कृति- डॉ राजीव गुप्ता पुट्ठी

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    दीपोत्सव को सौहार्द और प्रेम से मनाना ही हमारी संस्कृति- डॉ राजीव गुप्ता पुट्ठी

    बड़ौत (सच कहूँ/सन्दीप दहिया)। दीपावली (Diwali) विश्व में मनाया जाने वाला एक ऐसा पर्व है जो सभी जगह बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। शिक्षा रत्न सम्मान से सम्मानित मां अम्बा बालिका डिग्री कालिज ग्वालीखेडा के प्राचार्य ओर भारतीय वैश्य परिवार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजीव गुप्ता पुट्ठी का मानना है कि दीपावली जहॉ दीपो का उत्सव है वहीं अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक भी हैं, इस पर्व को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। Baraut News

    ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रभु राम लंकापति रावण को हराने के बाद अपनी नगरी अयोध्या में लौटे थे. और सभी नगरवासियों ने पूरी अयोध्या को दीपो से सजा दिया था और उनका स्वागत किया था, भगवान राम की अयोध्या वापसी पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी इस पर्व को माना जाता है। इस दौरान घरों को साफ किया जाता है और घर के हर कोने को दीपक, फूलों और रंगीन रंगोलियों से सजाया जाता है। इसको मनाने वाले एक दूसरे को उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और नए कपड़े पहनते हैं। दिवाली की रात यानि इस पूरे त्यौहार के मुख्या शाम को लोग धन और समृद्धि के देवी-देवता, लक्ष्मी माता और भगवान गणेश की विशेष पूजा करते हैं। Baraut News

    लोग घरों में रंगीन मिट्टी के दीये जलाते हैं, जो प्रकाश और आशा की विजय का सन्देश देते हैं। यूँ तो कई दसकों से दीपावली को पटाखे और आतिशबाजियों से मनाया जाने लगा हैं लेकिन इस सदी में उनके पर्यावरण और स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं। इसलिए हमें अपने पर्यावरण का ध्यान रखते हुए दीपावली को प्रेम सदभावना से मनाना चाहिए। वैसे हाल ही के वर्षों में, दिवाली उत्सव के पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ी है। लोग अब त्योहार मनाने के लिए पर्यावरण-अनुकूल तरीकों का उपयोग करने के बारे में अधिक जागरूक हैं। बिजली की खपत कम करने के लिए लोग बिजली की रोशनी के बजाय पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों, जैसे मिट्टी के दीये का उपयोग करना चुनते हैं।

    इसके अतिरिक्त, पर्यावरण-अनुकूल आतिशबाजी, जो कम प्रदूषक और शोर पैदा करती है, लोकप्रियता हासिल कर रही है। प्राकृतिक सामग्रियों और जैविक, बायोडिग्रेडेबल सजावट से बने रंगोली डिज़ाइन एक स्वच्छ और अधिक टिकाऊ उत्सव में योगदान करते हैं। पर्यावरण-अनुकूल दिवाली का उद्देश्य पर्यावरण को संरक्षित करना, वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करना और इस प्रिय त्योहार को मनाने के अधिक जिम्मेदार और सामंजस्यपूर्ण तरीके को बढ़ावा देना है। हम सब इस पर्व को पूरे सौहार्द से मनाये, पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखे और पूरे उत्साह से दीपावली की ख्ुाशियॉ बाटे, सभी को शुभ दीपावली। Baraut News

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