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    चीन का टकराव बनाम साजिश

    China Conspiracy

    लद्दाख में चीनी सेना द्वारा पहली बार गोलीबारी की घटना गंभीर सवाल खड़े करती है। इस घटना ने विदेशी मामलों के विशेषज्ञों के शक को वास्तविक्ता में बदल दिया है। दो माह पूर्व गलवान में हुए चीनी हमले को लेकर विदेशी मामलों के विशेषज्ञों ने यह शक जताया था कि क्या यह हमला चीनी सेना की अचानक बौखलाहट है या चीनी शासक के इशारे पर हुआ है। विशेषज्ञों ने भारत सरकार को राय दी थी कि सरकार कूटनीतिक स्रोतों के द्वारा इस बात का पता लगाए कि क्या हमले के लिए चीन की सरकार जिम्मेवार है। अब दो माह बाद घट रही घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि सीमा पर होने वाली हलचलें साधारण या अचानक नहीं बल्कि यह चीन की विस्तारवादी नीतियां या शक्ति संतुलन की किसी नई रणनीति का परिणाम है।

    गलवान घाटी में हमले के बाद कमांडर स्तर पर कई अन्य बैठकों के निर्णय सीमा पर प्रभावशाली नहीं दिख रहे। भले ही 45 वर्षों के बाद पहली बार गोलीबारी की बड़ी घटना है लेकिन गलवान में कंटीली तारों वाले डंडों का प्रयोग भी किसी घातक हथियार से कम नहीं था। जम्मू-कश्मीर जैसे हालात लद्दाख में बन रहे हैं। इस मामले में अब भारत को हर कदम सावधानी से उठाना होगा। अरुणाचल में कुछ भारतीयों के अगवा होने की घटनाएं भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। अरुणाचल को चीन अभी भी अपना अंग मान रहा है। भारतीय नागरिकों के अगवा होने का चीन ने जिस प्रकार जवाब दिया है वह भारत की संप्रभुता व अखंडता को चुनौती है। यह बात संतोषजनक है कि भारत सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर चीन को सख्ती से जवाब दिया है।

    200 से अधिक चीनी एप पर पाबंदी लगने से चीन को आर्थिक झटका लगा है लेकिन चीन सीमा पर उस वक्त शरारत कर रहा है जब शक्तिशाली विमान ‘राफेल’ भारत की सेना में शामिल हो रहे हैं। इससे स्पष्ट संकेत है कि चीन अपनी सैनिक क्षमता को और ज्यादा प्रभावशाली दिखाने का प्रयास कर रहा है। चीन को भारत-अमेरिका की दोस्ती भी हजम नहीं हो रही। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों के बीच चीन भारत को चुनौती दे रहा है, जो चीन के अमेरिका के खिलाफ मंसूबों को उजागर करती है। भारत सरकार को सीमावर्ती मामलों को अमेरिका-चीन टकराव के संदर्भ में देखना व निपटना होगा।

     

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