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    सरकार ने दी क्लीन चिट, नहीं होगी जांच

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    31 हजार करोड़ के अनाज घोटाले का मामला

    सुनील जाखड़ ने करवाई थी शिकायत दर्ज, एफआईआर करवाने के लिए लगाया था जोर

    चंडीगढ़ (अश्वनी चावला)। पंजाब में 31 हजार करोड़ रुपये के अनाज घोटाले का आरोप लगा कर अकाली-भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ी करने वाली कांग्रेस ने अब गत सरकार को क्लीन चिट देने की तैयारी कर ली है।

    क्योंकि विभागी जांच में साफ हो गया है कि पंजाब में इस तरह का कोई घोटाला नहीं हुआ है। इस लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह द्वारा विधान सभा में अनाज घोटाले के दोष अधीन विजीलैंस जांच करवाने की घोषणा के बाद भी खुराक व सिविल सप्लाई विभाग जांच करवाने को तैयार नहीं है।

    कैप्टन अमरेन्द्र ने विधान सभा में की थी विजीलैंस जांच की घोषणा

    जानकारी अनुसार गत अकाली-भाजपा सरकार दौरान केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली कैश क्रैडिट लिमिट (सीसीएल) को केन्द्र सरकार ने रोक लिया था और पंजाब सरकार को इसे सीसीएल का पिछला बकाया देने के लिए कहा था,

    जो कि लगभग 31 हजार करोड़ रुपये बन चुका था। यह 31 हजार करोड़ रुपये कैसे बन गए और अनाज कहां गया? इस संबंध में कई तरह के सवाल उठाते हुए विरोधी पक्ष के लीडर रहे सुनील जाखड़ ने इसे पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया था, जिसे लेकर पंजाब कांग्रेस द्वारा पांब भर में हंगामा किया गया

    और चुनाव दौरान भी कई रैलियों में मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह ने इस 31 हजार करोड़ रुपये का जिक्र करते हुए सत्ता में आने के बाद जांच करवाने तथा बादलों को सजा दिलाने की घोषणा की थी।

    पंजाब सरकार को लग रहा है हर वर्ष 1600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बयाज

    कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद खुराक व सिविल सप्लाई विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के कहने पर जब जांच की तो सच सामने आया कि गत 13-14 वर्षों से पंजाब व केन्द्र सरकार ने हिसाब-किताब नहीं किया, जिस कारण यह 31 हजार करोड़ का दोनों के खाते में अंतर आ गया है।

    केन्द्र सरकार द्वारा लेबर व ट्रकों द्वारा लिफ्टिंग के रेट फिक्स किए हुए थे, पंजाब में उससे ज्यादा रेट दिए गए। यह फर्क करोड़ों में चला गया और पंजाब सरकार के खाते में जुड़ गया। इसी तरह धान व गेंहू के सीजन में अनाज की खरीद से लेकर एफसीआई को अनाज भेजने के साथ ही लेखा-जोखा करने में 4-5 माह लग जाते हैं। इस दौरान बैंक खरीद के लिए जो कर्ज देते थे, उन्होंने 4-5 मांह का अतिरिक्त बयाज पंजाब से तो वसूल लिया,

    किन्तु एफसीआई ने देने से साफ इंकार कर दिया। क्योंकि जिस रेट पर खरीद हुई है, उसी की ही अदायगी की गई है। इसी कारण हर साल पंजाब सरकार को 1600 करोड़ रुपये का घाटा पड़ रहा था, जो कि 13-14 वर्षों में 31 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इसी कारण केन्द्र सरकार इस 31 हजार करोड़ रुपये को सैटल करने के लिए तैयार हो गई है।

    घोटाला ही नहीं हुआ तो जांच कैसी: केएपी सिन्हा

    खुराक व सिविल सप्लाई विभाग के प्रिंसिपल सचिव केएपी सिन्हा ने कहा कि 31 हजार करोड़ की बकाया राशि का कोई घोटाला नहीं है, बल्कि यह तो पंजाब सरकार के सिर अतिरिक्त देनदारी है। इस लिए विजीलैंस जांच किस बात की करवाएं? उन्होंने कहा कि विभाग की जांच हो गई है

    और सब कुछ साफ हो गया है। इस लिए कोई विजीलैंस जांच करवाने की जरूरत नहीं है। केन्द्र सरकार ने भी स्वीकार कर लिया है कि पंजाब सरकार के सिर अतिरिक्त भार पड़ा है, जिसे भविष्य में नहीं पड़ने देने व पुराना सैटल करने की बातचीत चल रही है।

    कैप्टन ने जेतली से की बकाया माफी की मांग

    कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने 31 हजार करोड़ रुपये के मामले में अरुन जेतली से मुलाकात की है और गुहार लगाई है कि इसे माफ किया जाए, क्योंकि इसमें पंजाब सरकार का कोई दोष नहीं है।

    इस लिए केन्द्र सरकार को यह 31 हजार करोड़ रुपये माफ करते हुए खातों का मिलान करवा लेना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई दिक्कत पेश न आए। अरुन जेतली ने कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की मांग को प्रवान करते हुए कमेटी गठन करना स्वीकार कर लिया है, जिसकी रिपोर्ट पर फैसला लिया जाएगा।

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