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Saturday, February 28, 2026
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    West Bengal: पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर छिड़ा विवाद: ममता बनर्जी ने रोक लगाने की मांग की

    Political, Democratic System, Government, Mamata Banerjee

    14 लाख फ़ॉर्म ऐसे जिनसे संबंधित मतदाता अनुपस्थित थे

    नई दिल्ली। चुनाव आयोग की ओर से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान अब तक बड़ी संख्या में ऐसे प्रपत्र चिन्हित किए गए हैं जिन्हें “संग्रह योग्य नहीं” माना गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार लगभग 14 लाख फ़ॉर्म ऐसे पाए गए हैं जिनसे संबंधित मतदाता या तो अनुपस्थित थे, दोहरे नाम के रूप में सूचीबद्ध थे, निधन हो चुका था या स्थायी रूप से अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो चुके थे। West Bengal News

    अधिकारी ने बताया कि मंगलवार दोपहर तक यह संख्या 13.92 लाख तक पहुंच चुकी थी और उम्मीद है कि आगे डेटा अपडेट होते रहने पर यह आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ सकता है। इससे पूर्व सोमवार शाम तक यह संख्या 10.33 लाख थी।

    अभियान में बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLO) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जो घर-घर पहुंचकर प्रपत्र वितरित करने और आवश्यक सूचना एकत्रित करने का कार्य कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के लिए 80,600 से अधिक BLO नियुक्त किए गए हैं, जिन्हें लगभग 8,000 पर्यवेक्षक, 3,000 सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी तथा 294 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आपत्ति | West Bengal News

    इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक विस्तृत पत्र लिखकर इसे तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने इस कार्यवाही को “अव्यवस्थित, दबावपूर्ण और चिंताजनक” बताते हुए कहा कि स्थिति “बहुत संवेदनशील स्तर” पर पहुंच गई है।

    पत्र में मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया बिना उचित योजना, प्रशिक्षण और स्पष्ट संवाद के लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि आवश्यक दस्तावेज़ों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है, सर्वेक्षण में जुटे BLO को कार्य समय में मतदाताओं से मिलना अत्यंत कठिन हो रहा है, और बड़ी संख्या में अधिकारी अत्यधिक बोझ के कारण परेशानी का सामना कर रहे हैं। West Bengal News

    उन्होंने चेताया कि यदि इस प्रक्रिया को तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो इसके परिणाम प्रशासनिक ढांचे और नागरिकों दोनों के लिए “अपरिवर्तनीय” हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घर-घर सर्वेक्षण, ई-फ़ॉर्म सबमिशन और नियमित सरकारी कार्यों का दबाव बूथ-स्तरीय कर्मचारियों को “मानवीय सीमा से अधिक” कार्य करने को मजबूर कर रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा और कार्यप्रणाली की पुनर्समीक्षा की जाए और उचित प्रशिक्षण एवं सहयोग सुनिश्चित किया जाए। West Bengal News