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    डेरा सच्चा सौदा ने खोजा बिजली संकट का समाधान

    Solution to Power Crisis

    पूज्य गुरु जी के दिशा-निर्देशन में पर्यावरण संरक्षण को लेकर पेश की मिसाल

    •  रोजाना सौर ऊर्जा के माध्यम से कर रहा 1200 यूनिट उत्पादन

    सच कहूँ/भगत सिंह सरसा। वर्तमान भयानक बीमारियों के दौर में स्वच्छ वातावरण मानव जीवन की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। वहीं बिजली के बेतहाशा दाम आमजन के बजट को बिगाड़ रहे हैं। ऐसे हालातों में अब सरकारें और आमजन सौर ऊर्जा का विकल्प अपनाने को मजबूर हो गए हैं। सौर ऊर्जा को विद्युत में परिवर्तित करने के लिए सोलर पैनलों का उपयोग किया जाता है, जिसमें फोटोवोल्टिक सेल लगे होते हैं और ये सेल सोलर पैनल पर पड़ने वाली धूप को विद्युत में परिवर्तित कर देते हैं। डेरा सच्चा सौदा ने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन दिशा-निर्देशन में इस ओर पाँच वर्ष पहले ही पहल कर दी थी। इसी के परिणाम स्वरूप आज डेरा खपत से कहीं ज्यादा सौर ऊर्जा उत्पादन कर आमजन के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

    बता दें कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सौजन्य से शाह सतनाम जी धाम सरसा में 300 किलोवाट का सोलर सिस्टम चल रहा है, जिससे रोजाना 1200 यूनिट बिजली उत्पादन लिया जा रहा है। डेरा सच्चा सौदा द्वारा इस पहल के पीछे मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है। क्योंकि सोलर पैनल से पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाए बिना बिजली उत्पन्न हो जाती है। साथ ही बिजली के भारी बिल से छुटकारा भी पाया जा सकता है।

    डेरा सच्चा सौदा के इलैक्ट्रिक विभाग के इंचार्ज भारत भूषण इन्सां ने बताया कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के दिशा-निर्देशानुसार 8 दिसंबर 2016 को शाह सतनाम जी धाम में 300 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया गया, जो उस समय प्रदेश का सबसे बड़ा सोलर सिस्टम था। वे आगे कहते हैं कि सोलर सिस्टम में 3 तरह के पैनल होते हैं जैसे आॅन ग्रिड, आॅफ ग्रिड व हाईब्रेड सिस्टम। डेरा में आॅन ग्रिड सिस्टम के तहत पैनल लगाया गया है, जिसमें डीसी करंट को डायरेक्ट एसी करंट में परिवर्तित किया जाता है। इस सिस्टम में पैनल के अंदर 24 घंटे करंट की आवश्यकता रहती है, तभी यह वर्किंग करता है। इस सोलर सिस्टम की तीन यूनिट बनाई गई है ताकि भविष्य में किसी एक यूनिट में प्रॉब्लम आने पर अन्य सिस्टम कार्य करता रहे।

    प्लेटों से डस्ट हटाना जरूरी 

    उन्होंने बताया कि इस सोलर सिस्टम का समय-समय पर रखरखाव भी जरूरी है। यदि सिस्टम की क्षमता अनुसार बिजली उत्पादन चाहते हैं तो हर तीन महीने के बाद प्लेटों पर जमने वाली डस्ट इत्यादि की क्लीनिंग बहुत जरूरी है। वहीं पैनल लगाते समय इनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि तेज हवाओं या अंधड़ जैसी आपदाओं का ये सामना कर सकें।

    नामचर्चा घर भी होंगे आत्मनिर्भर

    पूज्य गुरु जी की प्रेरणानुसार डेरा प्रबंधन इस विषय पर विचार कर रहा है कि डेरा सच्चा सौदा के जिन-जिन उपक्रमों में बिजली की खपत ज्यादा है, वहां पर भविष्य में सोलर सिस्टम लगाया जाए। फिलहाल शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सैंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल व बड़े नामचर्चा घरों में सोलर सिस्टम लगाने की योजना पर कार्य चल रहा है।

    प्रति किलोवाट से एक दिन में बनती है 4 यूनिट बिजली

    भारत भूषण इन्सां ने बताया कि डेरा सच्चा सौदा में लगे सोलर सिस्टम से दिनभर में प्रति किलोवाट 4 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। यानि हर रोज 1200 यूनिट बिजली पैदा होती है, जिसका उपयोग विद्युत उपकरणों में किया जाता है। पैनल की मदद से बनने वाली बिजली के यूनिट की गणना नेट मीटरिंग से की जाती है। नेट मीटर यह भी दिखाता है कि इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड से कितने यूनिट बिजली ली, इसके बाद ज्यादा बिजली बन रही है तो उसका फायदा बिल में कटौती के रूप में मिलता है।

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